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अजा एकादशी कब है

क्या आप जानते हैं अजा एकादशी 2026 कब है? जानिए इस व्रत की तिथि, पूजा विधि, मुहूर्त, महत्व और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का रहस्य – सब कुछ एक ही जगह!

अजा एकादशी के बारे में

अजा एकादशी का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। अजा एकादशी का व्रत विशेष रूप से पापों का नाश करता है और जीवन में शांति, समृद्धि और आशीर्वाद लाता है।

अजा एकादशी क्या है?

अजा एकादशी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी तिथि होती है। यह व्रत विशेष रूप से पापों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत करने से एक हजार गायों के दान का फल मिलता है, जिससे व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जीवन के समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं। जानकारी के अनुसार, पद्म पुराण में अजा एकादशी की व्रत कथा का उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार इस व्रत के श्रद्धापूर्वक पालन से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। अजा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए लाभकारी होता है, जो अपने पापों से मुक्ति चाहते हैं या जो जीवन में शांति और समृद्धि की कामना रखते हैं।

अजा एकादशी कब है: जानें शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 सितम्बर 2026, 07:29 PM
  • एकादशी तिथि समाप्ति: 7 सितम्बर 2026, 05:03 PM
  • पारण (व्रत तोड़ने का समय): 8 सितम्बर 2026, 06:02 AM से 08:33 AM
  • पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्ति समय: 7 सितम्बर 2026, 02:42 PM

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यधिक धार्मिक महत्व है और यह भगवान विष्णु की उपासना का एक विशेष दिन माना जाता है। भगवान विष्णु, जो संसार के पालनहार माने जाते हैं की पूजा इस दिन विशेष रूप से की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो भक्त एकादशी के दिन पूरी श्रद्धा, भक्ति और नियमों के साथ उपवास रखते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है।

वहीं, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह व्रत तन और मन की शुद्धि का अवसर होता है। उपवास से शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं और मानसिक एकाग्रता में वृद्धि होती है। इस दिन विशेष रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन और भगवान विष्णु की कथाओं का श्रवण किया जाता है, जो पुण्य के द्वारा आत्मा को शुद्ध करते हैं। एकादशी पर किए गए दान-पुण्य और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। इस दिन भक्तगण अपनी भक्ति और सादगी के साथ पूजा करते हैं, जिससे उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में दिव्य आशीर्वाद मिलता है।

व्रत और पूजा विधि

स्नान और व्रत का संकल्पः अजा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद हाथ में जल, फूल और चावल लेकर व्रत का संकल्प लें। सफाई और भगवान की स्थापनाः पूजा स्थल को अच्छे से साफ करके भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। भगवान विष्णु का स्नान और शृंगारः भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं। फिर उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं और चंदन, रोली और अक्षत (चावल) से उनका शृंगार करें। तुलसी और पीले फूल अर्पितः भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते और पीले फूल अर्पित करें। ध्यान रखें कि इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें। कथा का श्रवणः पूजा के दौरान अजा एकादशी की कथा का पाठ करना या सुनना बहुत महत्वपूर्ण है। इस कथा में भगवान विष्णु की महिमा और व्रत के महत्व को बताया गया है। आरती और प्रसाद वितरणः पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार के सभी सदस्य को प्रसाद वितरित करें। व्रत के दौरान आहारः इस दिन चावल और अनाज का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। व्रति फलाहार या निराहार रहकर भगवान की पूजा करते हैं। इसके अलावा खीर, मिठाइयाँ (मेवे से बनी), पंचामृत और पंजीरी का भी भोग लगाया जाता है। अजा एकादशी के व्रत का पालन पूरी श्रद्धा और नियम से करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

अजा एकादशी की पौराणिक कथा

अजा एकादशी की पौराणिक कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी हुई है। जो सत्यवादी और धर्मपरायण राजा थे, लेकिन एक श्राप के कारण उन्हें अपना राज्य, परिवार और प्रतिष्ठा खोनी पड़ी। सत्य का पालन करते हुए राजा हरिश्चंद्र को एक चांडाल के दास के रूप में काम करना पड़ा और शवदाह की चौकीदारी का कष्ट सहना पड़ा। इस दौरान वह अत्यधिक दुखी थे, तब ऋषि गौतम से उनका मिलन हुआ। राजा ने अपनी पूरी व्यथा उन्हें सुनाई, जिसके बाद ऋषि गौतम ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने की सलाह दी, क्योंकि यह व्रत सभी पापों को नष्ट कर देता है। राजा ने ऋषि की सलाह मानी और अजा एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप समाप्त हो गए। उनका पुत्र को जीवनदान मिला और वह फिर से अपना राज्य और परिवार प्राप्त करने में सफल हुए। इस प्रकार अजा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और भगवान की कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है।

अजा एकादशी के उपाय और लाभ

अजा एकादशी के उपाय

भगवान विष्णु के मंत्रों का जप: अजा एकादशी के दिन, भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करना बहुत लाभकारी होता है। विशेष रूप से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का एक माला जप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ: विधिपूर्वक विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। यह उपाय भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम तरीका माना जाता है। तुलसी पर गंगाजल चढ़ाना: तुलसी के पौधे पर गंगाजल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं। यह उपाय पवित्रता और पुण्य की प्राप्ति में सहायक होता है। पीले फूल और खीर का भोग: भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें और उन्हें खीर का भोग लगाएं। यह विशेष रूप से शुभ फल देता है और समृद्धि की प्राप्ति में मदद करता है। केसर वाला दूध अर्पित करना: भगवान विष्णु को केसर वाला दूध अर्पित करें। यह उपाय उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए बहुत प्रभावी है और सुख-समृद्धि लाता है।

अजा एकादशी के लाभ

पापों से मुक्ति: अजा एकादशी का व्रत पुराने और वर्तमान जन्म के सभी पापों को नष्ट करता है। व्रति इस दिन के विशेष उपायों से पापों से मुक्त होते हैं। अश्वमेध यज्ञ का पुण्य: इस व्रत को करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है, जो आत्मा की शुद्धि और भगवान के आशीर्वाद का कारण बनता है। भगवान विष्णु की कृपा: यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक साधन है। इससे व्यक्ति सुख-शांति और अंत में वैकुंठ की प्राप्ति करता है। सुख-समृद्धि में वृद्धि: अजा एकादशी का व्रत घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि करता है। यह धन, संपत्ति और मानसिक शांति की प्राप्ति में सहायक होता है। कष्टों का निवारण और मोक्ष: यह व्रत जीवन के सभी कष्टों का निवारण करता है और व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। इसे विशेष रूप से मानसिक और शारीरिक कष्टों के लिए लाभकारी माना जाता है। अजा एकादशी का व्रत उन व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी है, जो जीवन में शांति, समृद्धि, मोक्ष और भगवान विष्णु के आशीर्वाद की प्राप्ति करना चाहते हैं।

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Published by Sri Mandir·January 16, 2026

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