
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
25 अगस्त 2026 का दिन पंचांग के अनुसार अपनी तिथि, नक्षत्र और योग की वजह से अलग महत्व रखता है। आज के शुभ समय में किए गए धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए दिन कैसा रहेगा, इसे पंचांग की स्थिति से समझा जा सकता है। आइए जानते हैं आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा।
25 अगस्त 2026 के पंचांग में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि और मंगलवार का संयोग है। आज चंद्रमा मकर राशि में रहेगा, जबकि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रात तक प्रभावी रहेगा। दिन के पंचांग में तिथि, नक्षत्र और योग के साथ शुभ-अशुभ समय भी बदल रहे हैं, इसलिए किसी महत्वपूर्ण काम का समय तय करने से पहले आज के मुहूर्तों पर नजर डालना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष द्वादशी (6:22 AM तक) |
वार | मंगलवार |
पूर्णिमांत मास | श्रावण |
अमांत मास | श्रावण |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | वर्षा |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:37 |
सूर्यास्त | 18:25 |
चंद्रोदय | 16:45 |
चंद्रास्त | 02:42 |
नक्षत्र | उत्तराषाढ़ा (10:52 PM तक) |
योग | आयुष्मान (7:42 AM तक) |
करण | बालव (6:20 AM तक) |
अभिजीत मुहूर्त | 11:36 AM से 12:26 PM |
राहुकाल | 3:13 PM से 4:49 PM |
गुलिक काल | 12:01 PM से 1:37 PM |
यमघण्टकाल | 8:49 AM से 10:25 AM |
दिशाशूल | उत्तर |
सूर्य राशि | सिंह |
चंद्र राशि | मकर |
चंद्र निवास | दक्षिण |
आज शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 6:22 AM तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी। द्वादशी तिथि को धार्मिक परंपराओं में भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है, इसलिए पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए दिन का यह पक्ष विशेष महत्व रखता है।
आज मंगलवार होने के कारण भगवान हनुमान की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ, पूजा या ध्यान कर सकते हैं। इस तरह आज की तिथि में धार्मिक गतिविधियों के साथ मंगलवार की उपासना परंपरा भी जुड़ती है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं के अनुसार श्रावण मास चल रहा है। श्रावण का महीना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान शिव आराधना सहित कई धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा है।
पंचांग के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। ये संवत भारतीय कालगणना में तिथि और वर्ष की पहचान के लिए लंबे समय से उपयोग किए जाते रहे हैं।
अगस्त के इस समय में वर्षा ऋतु का प्रभाव बना हुआ है। बारिश और बादलों के कारण दिनचर्या प्रभावित हो सकती है, इसलिए बाहर जाने या यात्रा की योजना बनाते समय मौसम का भी ध्यान रखना व्यावहारिक रहेगा।
सूर्य की स्थिति के अनुसार अभी दक्षिणायन चल रहा है। पंचांग में अयन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़े कालखंड को दर्शाता है और इसका उल्लेख धार्मिक तथा ज्योतिषीय गणना में किया जाता है।
आज सूर्योदय 5:37 AM पर होगा और सूर्यास्त 6:25 PM पर। सुबह से शाम तक के कार्यों की योजना बनाते समय इन समयों को आधार बनाया जा सकता है।
आज चंद्रोदय 4:45 PM पर और चंद्रास्त 2:42 AM पर होगा। चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा और उसका चंद्र निवास दक्षिण दिशा में बताया गया है। चंद्र राशि में यह परिवर्तन आज के पंचांग को पिछले दिनों की तुलना में अलग ज्योतिषीय स्थिति देता है।
आज उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रात 10:52 PM तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में उत्तराषाढ़ा को दृढ़ता, लक्ष्य के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी जैसे गुणों से जोड़ा जाता है। दिन के अधिकांश हिस्से में इसी नक्षत्र का प्रभाव बना रहेगा।
आयुष्मान योग सुबह 7:42 AM तक रहेगा। इसके बाद अगला योग प्रभावी होगा। वहीं बालव करण सुबह 6:20 AM तक रहेगा। तिथि के साथ इन दोनों में परिवर्तन होने से दिन की पंचांग स्थिति भी समय के अनुसार बदलती रहती है।
आज अभिजीत मुहूर्त 11:36 AM से 12:26 PM तक है। किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए समय चुनते समय इस अवधि को ध्यान में रखा जा सकता है।
दिन के सावधानी वाले समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 3:13 PM से 4:49 PM
गुलिक काल: 12:01 PM से 1:37 PM
यमघण्टकाल: 8:49 AM से 10:25 AM
परंपरागत पंचांग मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरी काम पहले से तय हो तो उसके अनुसार समय का प्रबंधन किया जा सकता है।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में है। यदि उत्तर दिशा की यात्रा करनी हो तो पंचांग में दिए गए इस संकेत को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है।
आज सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा मकर राशि में हैं। सूर्य की सिंह राशि में स्थिति और चंद्रमा की मकर राशि में उपस्थिति आज के ज्योतिषीय विवरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
25 अगस्त के पंचांग में एक दिलचस्प बात यह है कि तिथि सुबह ही बदल जाती है, जबकि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रात तक बना रहता है। यानी दिन के अलग-अलग हिस्सों को एक ही नजर से देखने के बजाय समय के अनुसार पंचांग की स्थिति समझना अधिक उपयोगी रहेगा। पूजा, यात्रा या किसी जरूरी काम के लिए निकलने से पहले तिथि और मुहूर्त दोनों को देखना आज की बेहतर तैयारी हो सकती है।
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