
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
भारतीय पंचांग की खासियत यह है कि इसमें दिन को केवल तारीख के आधार पर नहीं देखा जाता, बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग और करण जैसी गणनाएं भी शामिल होती हैं। 30 सितंबर 2026 के लिए यही विवरण दिन के शुभ मुहूर्त और अन्य महत्वपूर्ण समयों के साथ सामने आते हैं। आइए, इस पारंपरिक समय-पद्धति के अनुसार आज के दिन को पढ़ना शुरू करें।
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30 सितंबर 2026 को कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2:56 PM तक रहेगी और बुधवार का दिन है। आज पंचांग की शुरुआत सुबह जल्दी होने वाले योग और नक्षत्र परिवर्तन से होगी, जबकि दोपहर में तिथि और करण की स्थिति बदलेगी। शाम 8:11 PM पर चंद्रोदय होगा। दिन के अलग-अलग हिस्सों में पंचांग की गणनाओं में होने वाले इन बदलावों को ध्यान में रखकर पूजा-पाठ, यात्रा और जरूरी कार्यों की योजना बनाई जा सकती है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष चतुर्थी (2:56 PM तक) |
वार | बुधवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | भाद्रपद |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:50 |
सूर्यास्त | 17:47 |
चंद्रोदय | 20:11 |
चंद्रास्त | 09:21 |
नक्षत्र | भरणी (7:37 AM तक) |
योग | वज्र (12:21 AM तक) |
करण | बालव (2:54 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:26 AM से 12:12 PM |
राहुकाल | 11:49 AM से 1:18 PM |
गुलिक काल | 10:19 AM से 11:49 AM |
यमघण्टकाल | 7:20 AM से 8:50 AM |
दिशाशूल | उत्तर |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | मेष |
चंद्र निवास | पूर्व |
आज कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2:56 PM तक रहेगी। कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को पंचांग की दृष्टि से विशेष रूप से देखा जाता है। आज तिथि दोपहर में बदल रही है, इसलिए किसी तिथि-आधारित पूजा या धार्मिक कार्य की योजना बनाते समय 2:56 PM का समय ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
आज बुधवार है, जिसे परंपरागत रूप से बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। बुधवार को बुद्धि, संवाद, सीखने और व्यवस्थित सोच से संबंधित गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए आज जरूरी कामों में स्पष्ट संवाद और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना दिन को व्यवस्थित रखने में मदद कर सकता है।
आज अमांत पद्धति के अनुसार भाद्रपद मास और पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास चल रहा है। दोनों मास गणना पद्धतियों का अलग आधार होने के कारण पंचांग में एक ही दिन के लिए दोनों नाम दिखाई देते हैं। तिथि और पर्व से जुड़ी जानकारी समझते समय इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। ये दोनों पारंपरिक संवत भारतीय काल गणना में उपयोग किए जाते हैं और पंचांग में किसी तिथि की समयगत पहचान को स्पष्ट करने का काम करते हैं।
आज शरद ऋतु चल रही है। इस समय मौसम में धीरे-धीरे बदलाव दिखाई देता है और सुबह-शाम का वातावरण दिन के मुकाबले अलग महसूस हो सकता है। बाहर के काम, यात्रा या दैनिक गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना व्यावहारिक रहेगा।
अयन की दृष्टि से आज दक्षिणायन है। पंचांग में दक्षिणायन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी अवधि को दर्शाता है। भारतीय परंपरा में अयन का उल्लेख धार्मिक और काल गणना से जुड़े विवरणों में किया जाता है।
आज सूर्योदय 5:50 AM पर होगा और सूर्यास्त 5:47 PM पर होगा। सुबह की दिनचर्या, पूजा-पाठ और शाम के जरूरी कामों का समय तय करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त की अवधि को आधार बनाया जा सकता है।
आज चंद्रोदय 8:11 PM पर होगा और चन्द्रास्त अगले दिन 9:21 AM पर होगा। यानी चंद्रमा का उदय शाम के बाद होगा और उसकी उपस्थिति रात के समय अधिक स्पष्ट रहेगी। पंचांग के अनुसार आज चंद्रमा मेष राशि में रहेगा और चंद्र निवास पूर्व दिशा में माना गया है।
आज भरणी नक्षत्र 7:37 AM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र में परिवर्तन होगा। पंचांग में नक्षत्र का समय दिन की शुरुआत की स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण होता है। सुबह 7:37 AM के बाद नक्षत्र बदलने के कारण दिन के शुरुआती हिस्से में ही पंचांग की स्थिति में परिवर्तन देखने को मिलेगा।
वज्र योग 12:21 AM तक रहेगा। यानी यह योग रात के शुरुआती हिस्से के बाद समाप्त हो चुका होगा और दिन के अधिकांश समय में अगली योग स्थिति प्रभावी रहेगी। इसलिए आज के दैनिक पंचांग को देखते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि वज्र योग की अवधि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है।
आज बालव करण 2:54 PM तक रहेगा। इसके बाद करण में बदलाव होगा। वहीं चतुर्थी तिथि 2:56 PM तक है। दोनों समयों में केवल दो मिनट का अंतर है, इसलिए दोपहर के आसपास पंचांग की तिथि और करण दोनों में बदलाव पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
आज शुभ मुहूर्त 11:26 AM से 12:12 PM तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य का समय निर्धारित करते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 11:49 AM से 1:18 PM
गुलिक काल: 10:19 AM से 11:49 AM
यमघण्टकाल: 7:20 AM से 8:50 AM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि आवश्यक कार्यों के लिए परिस्थिति, सुविधा और वास्तविक जरूरत के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। यदि आज उत्तर दिशा की यात्रा करनी हो तो पंचांग की इस गणना को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। इसके साथ यात्रा की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय जानकारी को भी ध्यान में रखना व्यावहारिक रहेगा।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मेष राशि में स्थित रहेगा। पंचांग के अनुसार चंद्र निवास पूर्व दिशा में है। सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति को तिथि, नक्षत्र और योग के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति को समझा जाता है।
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