
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
कभी किसी काम का महत्व उसके समय से भी जुड़ जाता है। इसी सोच के कारण शुभ मुहूर्त और राहुकाल जैसे समय पंचांग में विशेष रूप से देखे जाते हैं। 29 सितंबर 2026 के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और करण के साथ दिन के प्रमुख समयखंडों की जानकारी मिलती है। आज के फैसलों और योजनाओं के लिए समय की इस पारंपरिक गणना पर नजर डालते हैं।
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29 सितंबर 2026 को कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि शाम 5:11 PM तक रहेगी और मंगलवार का दिन है। आज पंचांग में सुबह के शुरुआती घंटों में योग और करण में बदलाव देखने को मिलेगा, जबकि 9:04 AM तक अश्विनी नक्षत्र रहेगा। दिन बढ़ने के साथ पंचांग की स्थिति बदलती रहेगी और शाम 7:23 PM पर चंद्रोदय होगा। इसलिए पूजा-पाठ, यात्रा या जरूरी कामों की योजना बनाते समय दिन के अलग-अलग समय को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष तृतीया (5:11 PM तक) |
वार | मंगलवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | भाद्रपद |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:50 |
सूर्यास्त | 17:48 |
चंद्रोदय | 19:23 |
चंद्रास्त | 08:15 |
नक्षत्र | अश्विनी (9:04 AM तक) |
योग | व्याघात (6:14 AM तक) |
करण | वणिज (6:13 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:26 AM से 12:12 PM |
राहुकाल | 2:49 PM से 4:18 PM |
गुलिक काल | 11:49 AM से 1:19 PM |
यमघण्टकाल | 8:49 AM से 10:19 AM |
दिशाशूल | उत्तर |
सूर्य राशि | कन्या |
चंद्र राशि | मेष |
चंद्र निवास | पूर्व |
आज कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि शाम 5:11 PM तक रहेगी। कृष्ण पक्ष में चंद्रमा के घटते चरण के साथ आने वाली तिथियों को पंचांग में अलग महत्व दिया जाता है। तृतीया के बाद तिथि परिवर्तन होगा, इसलिए दिन के किसी विशेष धार्मिक कार्य या तिथि आधारित आयोजन की योजना बनाते समय 5:11 PM के समय को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
आज मंगलवार है, जिसे परंपरा में मंगल ग्रह से संबंधित दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मंगलवार को साहस, ऊर्जा, अनुशासन और दृढ़ता से जुड़े कार्यों के लिए विशेष माना जाता है। दिन की व्यस्तता के बीच संयम के साथ काम करना और जल्दबाजी से बचना आज की दिनचर्या को संतुलित रख सकता है।
आज अमांत पद्धति के अनुसार भाद्रपद मास और पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास चल रहा है। दोनों मास गणना पद्धतियों में अंतर होने के कारण पंचांग में एक ही दिन के लिए अलग-अलग मास का उल्लेख दिखाई देता है। आज की तिथि को समझते समय इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में इन संवतों का उल्लेख पारंपरिक काल गणना को स्पष्ट करता है और धार्मिक तिथि की पहचान में भी उपयोगी होता है।
आज शरद ऋतु चल रही है। वर्षा ऋतु के बाद मौसम में बदलाव का दौर जारी रहता है और दिन तथा रात के तापमान में अंतर महसूस किया जा सकता है। इसलिए सुबह या शाम बाहर निकलने वाले लोगों के लिए स्थानीय मौसम के अनुसार दिनचर्या बनाना व्यावहारिक रहेगा।
अयन की दृष्टि से आज दक्षिणायन है। भारतीय पंचांग परंपरा में दक्षिणायन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण अवधि है। धार्मिक दृष्टि से इस अवधि का उल्लेख विभिन्न पंचांग विवरणों में नियमित रूप से किया जाता है।
आज सूर्योदय 5:50 AM पर होगा और सूर्यास्त 5:48 PM पर होगा। दिन के इन दोनों प्रमुख समयों को ध्यान में रखकर सुबह की दिनचर्या, पूजा-पाठ और शाम के जरूरी कामों की योजना बनाई जा सकती है।
आज चंद्रोदय 7:23 PM पर होगा, जबकि चन्द्रास्त अगले दिन 8:15 AM पर होगा। शाम के बाद चंद्रमा के दर्शन का समय इसी अवधि के आसपास रहेगा। पंचांग के अनुसार आज चंद्रमा मेष राशि में रहेगा और चंद्र निवास पूर्व दिशा में माना गया है।
आज अश्विनी नक्षत्र 9:04 AM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र में परिवर्तन होगा। ज्योतिषीय परंपरा में अश्विनी नक्षत्र को गति, आरंभ और सक्रियता से जुड़े गुणों के साथ देखा जाता है। दिन की शुरुआत में इस नक्षत्र की स्थिति होने के कारण सुबह का समय पंचांग की दृष्टि से विशेष रूप से ध्यान देने योग्य रहेगा।
व्याघात योग 6:14 AM तक रहेगा। इसके बाद योग बदल जाएगा। इसका अर्थ है कि सूर्योदय के कुछ ही समय बाद पंचांग की योग स्थिति में परिवर्तन हो जाएगा। इसलिए सुबह के शुरुआती समय और उसके बाद की अवधि को अलग-अलग देखकर दिन की योजना बनाना बेहतर रहेगा।
आज वणिज करण 6:13 AM तक रहेगा। इसके बाद करण में परिवर्तन होगा। योग और करण दोनों के समय सुबह जल्दी समाप्त हो जाने के कारण दिन की शुरुआत में ही पंचांग की गणना में दो महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।
आज शुभ मुहूर्त 11:26 AM से 12:12 PM तक रहेगा। किसी जरूरी कार्य का समय तय करते समय इस अवधि को पंचांग के अनुसार शुभ समय के रूप में देखा जा सकता है।
दिन के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 2:49 PM से 4:18 PM
गुलिक काल: 11:49 AM से 1:19 PM
यमघण्टकाल: 8:49 AM से 10:19 AM
पारंपरिक पंचांग मान्यताओं में इन अवधियों को महत्वपूर्ण नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। जरूरी या पहले से निर्धारित कार्यों के मामले में परिस्थितियों और अपनी सुविधा के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। यदि आज उत्तर दिशा की यात्रा करनी हो, तो पंचांग में दिए गए दिशाशूल को ध्यान में रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। यात्रा की वास्तविक स्थिति, मौसम और अन्य व्यावहारिक परिस्थितियों को भी साथ में देखना जरूरी है।
आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मेष राशि में रहेगा। चंद्रमा का निवास पूर्व दिशा में माना गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति को पंचांग में तिथि, नक्षत्र और योग के साथ देखा जाता है, जिससे दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति का विवरण पूरा होता है।
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