
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
आज का पंचांग दिन की ज्योतिषीय परिस्थितियों का विस्तृत संकेत देता है। तिथि और नक्षत्र के साथ बनने वाले योगों के अनुसार आज का दिन धार्मिक कार्यों, यात्रा या किसी नई शुरुआत के लिए कैसा रहेगा, यह आगे समझें। जानिए आज के शुभ समय और दिन की खास स्थिति।
23 अगस्त 2026 का पंचांग धार्मिक आस्था के साथ दिन की सही समय-योजना के लिए भी उपयोगी है। आज शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है और रविवार होने के कारण दिन की शुरुआत पूजा-पाठ तथा आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। वहीं शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अन्य समयों को ध्यान में रखकर जरूरी कार्यों का समय तय करना अधिक सुविधाजनक रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष एकादशी (4:20 AM तक) |
वार | रविवार |
पूर्णिमांत मास | श्रावण |
अमांत मास | श्रावण |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | वर्षा |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:36 |
सूर्यास्त | 18:27 |
चंद्रोदय | 15:18 |
चंद्रास्त | 00:52 |
नक्षत्र | मूल (5:45 PM तक) |
योग | विष्कुम्भ (6:15 AM तक) |
करण | वणिज (3:10 PM तक) |
अभिजीत मुहूर्त | 11:36 AM से 12:26 PM |
राहुकाल | 4:51 PM से 6:27 PM |
गुलिक काल | 3:14 PM से 4:51 PM |
यमघण्टकाल | 12:01 PM से 1:38 PM |
दिशाशूल | पश्चिम |
सूर्य राशि | सिंह |
चंद्र राशि | धनु |
चंद्र निवास | पूर्व |
आज शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 4:20 AM तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। एकादशी को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की उपासना और व्रत के लिए विशेष माना जाता है। इसलिए आज का दिन भक्ति, संयम और पूजा-पाठ से जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण रह सकता है।
आज रविवार होने के कारण सूर्यदेव की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। सुबह स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देना और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करना दिन की धार्मिक शुरुआत का हिस्सा बनाया जा सकता है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं में श्रावण मास चल रहा है। श्रावण का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान शिव उपासना, व्रत तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा रहती है।
काल गणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। पंचांग में इन संवतों का उल्लेख तिथि और समय की पारंपरिक गणना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अगस्त के इस समय में वर्षा ऋतु का प्रभाव बना हुआ है। मौसम में बदलाव और वर्षा की स्थिति को देखते हुए यात्रा या बाहरी गतिविधियों की योजना बनाते समय व्यावहारिक सावधानी रखना उपयोगी रहेगा।
सूर्य की स्थिति के अनुसार अभी दक्षिणायन चल रहा है। धार्मिक पंचांग में अयन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी महत्वपूर्ण कालगणना मानी जाती है।
आज सूर्योदय 5:36 AM पर होगा और सूर्यास्त 6:27 PM पर। दिन की शुरुआत में धार्मिक कार्यों या सूर्य उपासना के लिए समय निकाला जा सकता है, जबकि शाम के समय सूर्यास्त से पहले आवश्यक कार्य पूरे करना सुविधाजनक रहेगा।
आज चंद्रोदय 3:18 PM पर और चंद्रास्त 12:52 AM पर होगा। चंद्रमा धनु राशि में रहेगा और उसका चंद्र निवास पूर्व दिशा में बताया गया है। पंचांग की दृष्टि से चंद्रमा की यह स्थिति दिन के ज्योतिषीय विवरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आज मूल नक्षत्र 5:45 PM तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में मूल नक्षत्र को गहराई, मूल कारणों और परिवर्तन से जुड़े संकेतों के साथ देखा जाता है। इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा।
विष्कुम्भ योग सुबह 6:15 AM तक रहेगा। इसके बाद अगला योग प्रभावी होगा। वहीं वणिज करण दोपहर 3:10 PM तक रहेगा। करणों को पंचांग में दिन के अलग-अलग समयखंडों की प्रकृति समझने के लिए देखा जाता है।
दिन में अभिजीत मुहूर्त 11:36 AM से 12:26 PM तक रहेगा। महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इस समय को पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
आज इन समयों का भी ध्यान रखें:
राहुकाल: 4:51 PM से 6:27 PM
गुलिक काल: 3:14 PM से 4:51 PM
यमघण्टकाल: 12:01 PM से 1:38 PM
इन अवधि में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। विशेष रूप से शाम के समय राहुकाल और उससे पहले गुलिक काल होने के कारण जरूरी कार्यों का समय पहले से तय करना बेहतर रहेगा।
आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में है। पश्चिम दिशा की यात्रा आवश्यक हो तो पंचांग में बताए गए इस पारंपरिक संकेत को ध्यान में रखा जा सकता है।
ग्रह स्थिति के अनुसार सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा धनु राशि में स्थित हैं। सूर्य की सिंह राशि में स्थिति रविवार के दिन के साथ एक विशेष ज्योतिषीय संयोजन बनाती है, जबकि चंद्रमा की धनु स्थिति दिन की मानसिक और भावनात्मक प्रवृत्तियों से जुड़ी मानी जाती है।
23 अगस्त का दिन खास तौर पर एकादशी की धार्मिक भावना, रविवार की सूर्य उपासना और श्रावण मास की आध्यात्मिक परंपरा को साथ लेकर चल रहा है। यदि आज व्रत या पूजा कर रहे हैं, तो तिथि परिवर्तन के समय का ध्यान रखना उपयोगी होगा। वहीं सामान्य दिनचर्या के लिए शुभ मुहूर्त और सावधानी वाले समय पहले से देखकर कार्यों को व्यवस्थित किया जा सकता है।
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