
गुरुदेव की आरती गुरु के प्रति श्रद्धा और भक्ति को प्रकट करने का एक उत्तम मार्ग है, जिससे जीवन में ज्ञान, मार्गदर्शन और सफलता प्राप्त होती है।
सनातन धर्म के अनुसार जो व्यक्ति गुरूदेव की आरती करता है, उसे कोटि कल्पों तक स्वर्गलोक में स्थान प्राप्त होता है। और साथ ही व्यक्ति को अनंत में प्रवेश मिलता है। अपने गुरू की नित्य आरती पढ़ने व सुननें से व्यक्ति को परमपद की प्राप्ति होती है। तो आइए पढ़ते हैं गुरूदेव की आरती।
जय गुरुदेव दयानिधि, दीनन हितकारी, स्वामी भक्तन हितकारी, जय जय मोह विनाशक, भव बंधन हारी, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव, गुरु मूरति धारी, वेद पुराण बखानत, गुरु महिमा भारी, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
जप तप तीरथ संयम, दान बिबिध दीजै, गुरु बिन ज्ञान न होवे, कोटि जतन कीजै, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
माया मोह नदी जल, जीव बहे सारे, नाम जहाज बिठा कर, गुरु पल में तारे, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
काम क्रोध मद मत्सर, चोर बड़े भारे, ज्ञान खड्ग दे कर में, गुरु सब संहारे, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
नाना पंथ जगत में, निज निज गुण गावे, सबका सार बताकर, गुरु मारग लावे, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
पाँच चोर के कारण, नाम को बाण दियो, प्रेम भक्ति से सादा, भव जल पार कियो, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
गुरु चरणामृत निर्मल, सब पातक हारी, बचन सुनत तम नाशे, सब संशय हारी, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
तन मन धन सब अर्पण, गुरु चरणन कीजै, ब्रह्मानंद परम पद, मोक्ष गति लीजै, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
श्री सतगुरुदेव की आरती, जो कोई नर गावै, भव सागर से तरकर, परम गति पावै, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
जय गुरुदेव दयानिधि, दीनन हितकारी, स्वामी भक्तन हितकारी, जय जय मोह विनाशक, भव बंधन हारी, ॐ जय जय जय गुरुदेव हरे।।
!जय गुरूदेव!
और ये भी पढ़े
संत तुकाराम की आरती श्री जगन्नाथ जी की आरती जगन्नाथ जी की मंगल आरती भैरव बाबा की आरती
Did you like this article?

ॐ जय जगदीश हरे आरती - सुनें और पढ़ें अनुराधा पौडवाल द्वारा गाए गए भजन के बोल। जानें 'Om Jai Jagdish Hare' आरती के सुंदर और भक्तिमय शब्द।

अम्बे गौरी की आरती एक भक्तिपूर्ण स्तुति है, जो देवी दुर्गा के शक्ति स्वरूप को समर्पित है। यह आरती देवी गौरी (माँ पार्वती) की महिमा का गुणगान करती है और उनके भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।

शिवरात्रि आरती भगवान शिव की महिमा और आशीर्वाद की प्रार्थना के लिए समर्पित है। यह आरती महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव की विशेष पूजा में गाई जाती है, जो भक्तों को भगवान शिव के प्रति समर्पण और भक्ति से जोड़ती है।