क्या जीवन में अचानक रुकावटें, भ्रम या नकारात्मकता बढ़ रही है? इस नवरात्रि अष्टमी 18,000 राहु मंत्र जाप और दुर्गा-चंडी हवन के माध्यम से राहु के प्रभाव को शांत कर जीवन में शांति और प्रगति का मार्ग खोलें।
क्या जीवन में अचानक रुकावटें, भ्रम या नकारात्मकता बढ़ रही है? इस नवरात्रि अष्टमी 18,000 राहु मंत्र जाप और दुर्गा-चंडी हवन के माध्यम से राहु के प्रभाव को शांत कर जीवन में शांति और प्रगति का मार्ग खोलें।
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नवरात्रि दुर्गा अष्टमी राहु शांति विशेष

18,000 राहु मूल मंत्र जाप और दुर्गा-चंडी हवन

भ्रम, नकारात्मकता और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को शांत करने के लिए
temple venue
राहु पैठाणी मंदिर, नवदुर्गा मंदिर, पौड़ी, उत्तराखंड | कटरा, जम्मू
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क्या जीवन में अचानक रुकावटें, भ्रम या नकारात्मकता बढ़ रही है? इस नवरात्रि अष्टमी 18,000 राहु मंत्र जाप और दुर्गा-चंडी हवन के माध्यम से राहु के प्रभाव को शांत कर जीवन में शांति और प्रगति का मार्ग खोलें।

इस नवरात्रि अष्टमी राहु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति पाकर जीवन में शुभता का मार्ग खोलें

नवरात्रि का पावन समय सनातन धर्म में अत्यंत शक्तिशाली आध्यात्मिक काल माना जाता है। इन नौ दिनों में की गई पूजा, व्रत और अनुष्ठान का विशेष महत्व बताया गया है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इस दिन देवी शक्ति की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। इस बार नवरात्रि अष्टमी का योग मूल नक्षत्र के साथ बन रहा है, जिसे माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और राहु ग्रह के प्रभाव को शांत करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

मान्यता है कि इस समय किए गए मंत्र जाप और हवन से मानसिक तनाव, भय, भ्रम और जीवन में आने वाली रुकावटों को शांत करने की प्रार्थना की जाती है। यह अनुष्ठान जीवन में शांति, स्पष्टता और प्रगति का मार्ग खोलने की भावना से किया जाता है।

🔥 यह अनुष्ठान क्यों माना जाता है विशेष?

ज्योतिष के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु का प्रभाव सक्रिय होता है, तो जीवन में भ्रम, मानसिक तनाव, डर, अस्थिर विचार और अचानक आने वाली बाधाएँ बढ़ सकती हैं। कई बार इसका प्रभाव स्वास्थ्य, रिश्तों और करियर पर भी पड़ता है। ऐसे समय में सही पूजा और अनुष्ठान करने से राहु के प्रभाव को शांत करने की प्रार्थना की जाती है।

वैदिक परंपरा में माँ दुर्गा को राहु से संबंधित देवी माना गया है। इसलिए राहु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए दुर्गा-चंडी हवन अत्यंत शुभ माना जाता है।

इसी पावन अवसर पर श्री मंदिर द्वारा दो पवित्र स्थलों पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।
पहला अनुष्ठान उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित राहु पैठाणी मंदिर में किया जाएगा, जहाँ राहु मूल बीज मंत्र का 18,000 बार जाप किया जाएगा। यह जाप राहु के प्रभाव को शांत करने और मानसिक अस्थिरता, भय तथा जीवन की बार-बार आने वाली बाधाओं को कम करने की भावना से किया जाता है।

दूसरा अनुष्ठान जम्मू के त्रिकुटा पर्वत क्षेत्र में स्थित नवदुर्गा मंदिर में किया जाएगा, जो माँ आदिशक्ति को समर्पित है। मान्यता है कि माँ दुर्गा की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, आध्यात्मिक संरक्षण प्राप्त होता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

🙏 यदि आप जीवन में छिपी नकारात्मकता, बिना कारण होने वाली देरी या अनजाने भय का अनुभव कर रहे हैं, तो यह अनुष्ठान आपके लिए एक पवित्र अवसर हो सकता है। श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में भाग लेकर आप हिमालय से होने वाले राहु मंत्र जाप और माँ दुर्गा के पवित्र हवन की दिव्य ऊर्जा से अपने जीवन में संतुलन और सकारात्मकता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

राहु पैठाणी मंदिर, नवदुर्गा मंदिर,पौड़ी, उत्तराखंड | कटरा, जम्मू

राहु पैठाणी मंदिर, नवदुर्गा मंदिर,पौड़ी, उत्तराखंड | कटरा, जम्मू
नोट: पंडित जी की सलाह है कि इस पूजा के साथ माँ दुर्गा को लाल गुड़हल माला अर्पण, लाल चुनरी, लाल देवी श्रृंगार या माँ दुर्गा मंगलमय पूजन भेंट अर्पित करने से देवी माँ की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

राहु शांति के लिए राहु शिला पर काले तिल के तेल का दान या नील वस्त्र दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे स्वास्थ्य और जीवन में संतुलन के लिए आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

उत्तराखंड में स्थित राहु पैठाणी मंदिर एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है, जहाँ भगवान शिव के साथ राहु देव की भी पूजा की जाती है। देश में ऐसे बहुत कम मंदिर हैं जहाँ राहु की पूजा भगवान शिव के साथ की जाती है, इसलिए इस मंदिर का धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार राहु और केतु पहले स्वर्भानु नाम के एक असुर थे। समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत निकला, तब स्वर्भानु ने छल से देवताओं के बीच बैठकर अमृत पी लिया। जब भगवान विष्णु को इसका पता चला, तो उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु का सिर उसके शरीर से अलग कर दिया ताकि वह पूर्ण रूप से अमर न हो सके। लेकिन अमृत का स्वाद चख लेने के कारण वह अमर हो चुका था। उसके शरीर का निचला भाग केतु और सिर वाला भाग राहु कहलाया। मान्यता है कि सुदर्शन चक्र से कटने के बाद उसका सिर पौड़ी में गिरा, जहाँ आज राहु पैठाणी मंदिर स्थित है। इसी कारण यह स्थान राहु से जुड़ा अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्थल माना जाता है।

जम्मू के त्रिकुटा पर्वतों में स्थित कटरा तीर्थ क्षेत्र अपनी दिव्यता, प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान माँ दुर्गा से जुड़ी कई पौराणिक कथाओं से संबंधित माना जाता है। माँ दुर्गा को यहाँ लक्ष्मी, सरस्वती और काली के संयुक्त स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। कटरा से लगभग 9 किलोमीटर दूर स्थित नवदुर्गा मंदिर माँ दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है। यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित है, जहाँ चट्टानों के रूप में माँ दुर्गा के नौ स्वरूप दिखाई देते हैं। भक्त इस पवित्र स्थान पर आकर सभी नौ देवियों के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

नवरात्रि के समय और विशेष रूप से शुक्रवार के दिन इस स्थान की पवित्रता और भी बढ़ जाती है। मान्यता है कि यहाँ किए गए अनुष्ठान, जैसे कन्या पूजन और दुर्गा-चंडी हवन, अत्यंत शुभ और फलदायी होते हैं।

⭕ नोट: यह पूजा मुख्य वैष्णो देवी मंदिर में नहीं बल्कि त्रिकुटा पर्वत की तलहटी में स्थित नवदुर्गा मंदिर में की जाएगी। इस पवित्र भूमि पर की गई पूजा भी उतनी ही फलदायी मानी जाती है।

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