वंदे मातरम् लिरिक्स
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वंदे मातरम् लिरिक्स | Vande Mataram Lyrics

इस लेख में आपको वंदे मातरम् के पूरे लिरिक्स, इसके भावार्थ और राष्ट्रगीत से जुड़ी खास बातें सरल भाषा में मिलेंगी।

वन्दे मातरम् के बारे में

जब भी “वन्दे मातरम्” की पंक्तियाँ सुनाई देती हैं, दिल अपने आप गर्व और देशभक्ति से भर जाता है। यह गीत केवल शब्द नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना है। इस लेख में जानिए वन्दे मातरम् के बोल हिंदी में, साथ ही गीत से जुड़ी खास जानकारी और इसका महत्व, ताकि आप इसके भाव को और गहराई से समझ सकें।

वन्दे मातरम् बोल

‘वन्दे मातरम्’ गीत जब भी गूंजता है, तो मन अपने आप गर्व, सम्मान और देशभक्ति से भर जाता है। ये गीत हमें हमारी मातृभूमि से जोड़ता है और यह याद दिलाता है कि हमारा देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी माँ के समान है। स्वतंत्रता संग्राम के समय से लेकर आज तक, ‘वन्दे मातरम्’ भारतीयों की आत्मा की आवाज बना हुआ है और हर पीढ़ी को देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देता है।

वन्दे मातरम् का महत्व

“वन्दे मातरम्” भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसका भारतीय इतिहास में बहुत बड़ा स्थान है। इस गीत ने आज़ादी की लड़ाई के समय लाखों लोगों में जोश और साहस भरा था। जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब यही गीत लोगों के दिलों में आजादी की आग जलाता था। यह गीत हमें अपने देश से प्रेम करना, उसकी रक्षा करना और उसके सम्मान के लिए हमेशा खड़े रहना सिखाता है। आज भी जब यह गीत गाया जाता है, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

आपको बता दें कि वन्दे मातरम् को वर्ष 1950 में संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। तब से यह भारत का राष्ट्रीय गीत है। इस गीत की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इस गीत को 1896 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन में सबसे पहले रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था और उन्होंने ही इसे संगीतबद्ध भी किया था।

वन्दे मातरम् के बोल और भावार्थ

वन्दे मातरम् |

सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,

शस्यश्यामलाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्!

भावार्थ: इन पंक्तियों का भावार्थ है कि “हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं, तुम्हारी वंदना करता हूं. जो जल से भरपूर है, और फलों-फसलों से समृद्ध है, जिसकी हवा मलय पर्वत से आने वाली ठंडी, सुगंधित हवा जैसी शीतल है. जिसकी धरती हरी-भरी फसलों से लहलहा रही है, ऐसी माँ (मातृभूमि)... हे माँ! मैं तुझे प्रणाम करता हूं।”

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,

सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

भावार्थ: इन पंक्तियों का अर्थ है “वो जिसकी रात्रि को चांद की रोशनी शोभायमान करती है, वो जिसकी भूमि खिले हुए फूलों से सुसज्जित पेड़ों से ढकी हुई है. सदैव हंसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली, सुख देने वाली, वरदान देने वाली मां तुम्हें मेरा प्रणाम है।”

कोटि कोटि कण्ठ कल कल निनाद कराले

द्विसप्त कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले

के बोले मा तुमी अबले

बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्

रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥

वंदे मातरम्!

भावार्थ: इन पंक्तियों में कवि कहता है कि हे मातृभूमि, करोड़ों कंठों से तुम्हारी जय-जयकार गूंज रही है। तुम्हारे करोड़ों हाथ शक्तिशाली हैं और तुम शत्रुओं का नाश करने वाली हो। तुम कमजोर नहीं, बल्कि अपार शक्ति से भरी हुई हो और अपने बच्चों की रक्षा करने वाली हो। इसलिए मैं ऐसी शक्तिशाली और उद्धार करने वाली माँ को नमन करता हूँ।

तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि मर्म

त्वं हि प्राणाः शरीरे

बाहुते तुमि मा शक्ति,

हृदये तुमि मा भक्ति,

तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्॥

वंदे मातरम्!

भावार्थ: यहाँ कवि कहते हैं कि हे माँ, तुम ही विद्या हो, तुम ही धर्म हो और तुम ही हमारे हृदय की भावना हो। हमारे शरीर में जो प्राण हैं, वह भी तुम ही हो। हमारे बाहुओं में शक्ति और हृदय में भक्ति तुम्हीं से आती है। हम तुम्हारी ही प्रतिमा हर मंदिर में स्थापित करते हैं और तुम्हें ही पूजते हैं।

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमलदल विहारिणी

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्

नमामि कमलां अमलां अतुलाम्

सुजलां सुफलां मातरम्॥

वंदे मातरम्!

भावार्थ: इन पंक्तियों में भारत माता को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में देखा गया है। कवि कहता है कि तुम दुर्गा की तरह शक्ति देने वाली हो, लक्ष्मी की तरह समृद्धि देने वाली हो और सरस्वती की तरह ज्ञान देने वाली हो। तुम पवित्र, सुंदर और अतुलनीय हो, और तुम्हारी धरती जल और अन्न से भरपूर है।

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्

धरणीं भरणीं मातरम्॥

भावार्थ: यहाँ कवि ने भारत माता को हरी-भरी, सरल, सौम्य, मुस्कुराने वाली और सुंदर आभूषणों से सजी हुई बताया है। वह धरती जो सबका पालन-पोषण करती है, वही हमारी सच्ची माँ है।

‘वन्दे मातरम्’ गीत भारत की आत्मा की आवाज है। यह हमें हमारे देश से जोड़ता है, हमें गर्व करना सिखाता है और हमें अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है। इस गीत के बोल हर भारतीय के दिल में मातृभूमि के लिए प्रेम, सम्मान और समर्पण भावना जागृत करने वाले हैं।

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Published by Sri Mandir·January 23, 2026

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