
क्या आप जानते हैं भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाली पहली महिला कौन थीं? इस लेख में आप जानेंगे उस साहसी महिला का नाम, कब और कहाँ उन्होंने पहली बार तिरंगा फहराया।
जब भी हमारा राष्ट्रीय ध्वज ऊँचा फहरता है, तो देशभक्ति की भावना हर किसी के दिल में जग जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहली बार किस महिला ने इसे फहराया और उसके पीछे की कहानी क्या है? इस लेख में जानिए राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाली पहली महिला कौन थीं।
भीकाजी रुस्तम कामा, जिन्हें सम्मानपूर्वक ‘मैडम कामा’ कहा जाता है, भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की एक प्रमुख और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थीं। सुविधासंपन्न जीवन मिलने के बावजूद उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया। विदेश में रहते हुए भी वे भारतीय क्रांतिकारियों को निरंतर सहयोग देती रहीं और अपने ओजस्वी लेखों तथा प्रभावशाली भाषणों के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की।
भारतीय मूल की फ्रांसीसी नागरिक मैडम कामा ने लंदन, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों की यात्रा कर भारत की आज़ादी के बारे में लोगों को जागरूक किया और अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त किया। उन्होंने पेरिस इंडियन सोसाइटी की स्थापना की, जो विदेशों में रहने वाले भारतीय क्रांतिकारियों की मदद और सहयोग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनी।
उनके संघर्ष और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण 22 अगस्त 1907 को देखने को मिला, जब जर्मनी के स्टटगार्ट शहर में हुई सातवीं अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में उन्होंने विदेशी धरती पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उस समय यह तिरंगा आज के ध्वज जैसा नहीं था, लेकिन वह भारत की आज़ादी, सम्मान और संघर्ष का प्रतीक बना। मैडम कामा ने विदेशी मंचों से ब्रिटिश शासन का खुलकर विरोध किया और पूरी दुनिया के सामने भारत की स्वतंत्रता की आवाज बुलंद की।
भीकाजी कामा का जन्म 24 सितंबर 1861 को सोराबजी फ्रामजी पटेल और उनकी पत्नी जैजीबाई सोराबजी पटेल के घर हुआ था। उनके पिता पेशे से व्यापारी थे, उन्होंने कानून की पढ़ाई भी की थी और वे पारसी समाज में एक सम्मानित व्यक्ति थे। भीकाजी कामा ने एलेक्ज़ेंड्रा गर्ल्स इंग्लिश इंस्टिट्यूशन से शिक्षा प्राप्त की और वे एक मेहनती तथा प्रतिभाशाली छात्रा मानी जाती थीं। 3 अगस्त 1885 को उनका विवाह रुस्तम कामा से हुआ। विवाह के बाद इस समय में भीकाजी कामा ने अपना अधिकांश समय सामाजिक कार्यों और सेवा गतिविधियों में समर्पित किया।
भीकाजी कामा एक अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प वाली स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभिक दौर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपना जीवन देश की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया और विदेशी धरती पर रहते हुए भी ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज़ बुलंद की।
वे केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समानता के लिए भी सक्रिय रूप से संघर्ष किया। एक सच्ची और समर्पित राष्ट्रवादी के रूप में उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई, जिससे विश्वभर का ध्यान भारत की गुलामी और स्वतंत्रता की आकांक्षा की ओर आकर्षित हुआ।
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