आज का पंचांग 4 नवंबर 2026
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आज का पंचांग 4 नवंबर 2026

यहां आपको तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल, सूर्योदय और सूर्यास्त से जुड़ी जरूरी जानकारी एक ही जगह मिलेगी।

आज के पंचांग के बारे में

हिंदू पंचांग में एकादशी से पहले आने वाली दशमी तिथि व्रत की तैयारी और धार्मिक दिनचर्या को व्यवस्थित करने का अवसर देती है। 4 नवंबर 2026, बुधवार को कृष्ण पक्ष की दशमी सुबह लगभग 11:03 बजे तक रहेगी, फिर एकादशी आरंभ होगी। यदि आप अगले दिन व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो आज तिथि के बदलाव के साथ एकादशी की पूजा-विधि और पारण से जुड़े नियम भी समझ लें।

आज का पंचांग 4 नवंबर 2026 | Aaj Ka Panchang 4th November 2026

4 नवंबर 2026, बुधवार को कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि सुबह 11:04 AM तक रहेगी। आज सुबह के शुरुआती घंटों में योग और नक्षत्र बदलेंगे, जबकि तिथि और करण के समाप्त होने का समय लगभग एक ही है। शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक निर्धारित है, लेकिन इसी समय के आसपास राहुकाल भी शुरू होता है। इसलिए आज किसी पूजा, धार्मिक अनुष्ठान या जरूरी कार्य का समय चुनते हुए अलग-अलग पंचांग विवरणों को ध्यान से देखना महत्वपूर्ण है।

आज का पंचांग

विवरणजानकारी
तिथिकृष्ण पक्ष दशमी (11:04 AM तक)
वारबुधवार
पूर्णिमांत मासकार्तिक
अमांत मासअश्विन
विक्रम संवत2083 (सिद्धार्थ)
शक संवत1948 (प्रभाउ)
ऋतुशरद
अयनदक्षिणायन
सूर्योदय06:08
सूर्यास्त17:16
चंद्रोदय01:22
चंद्रास्त14:11
नक्षत्रपूर्व फाल्गुनी (3:31 AM तक)
योगब्रह्मा (8:00 AM तक)
करणविष्टि (11:05 AM तक)
शुभ मुहूर्त11:20 AM से 12:04 PM
राहुकाल11:42 AM से 1:06 PM
गुलिक काल10:19 AM से 11:42 AM
यमघण्टकाल7:32 AM से 8:55 AM
दिशाशूलउत्तर
सूर्य राशितुला
चंद्र राशिसिंह
चंद्र निवासपूर्व

दशमी तिथि और बुधवार का महत्व

आज कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि सुबह 11:04 AM तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू होगी। जो लोग एकादशी व्रत या उससे जुड़ी धार्मिक तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए तिथि परिवर्तन का समय विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है। व्रत की सही तिथि और नियमों के लिए स्थानीय पंचांग तथा अपनी परंपरा के अनुसार पुष्टि करना उचित रहेगा।

आज बुधवार है, जिसे परंपरागत रूप से भगवान गणेश और बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार गणेश पूजन, मंत्र-जप या प्रार्थना कर सकते हैं। दिन के कामों में स्पष्ट संवाद और सोच-समझकर निर्णय लेने पर ध्यान देना भी बुधवार की दिनचर्या को सार्थक बना सकता है।

कार्तिक मास और संवत का विवरण

आज पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास और अमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास है। दोनों पद्धतियों में चंद्र मास की गणना अलग आधार पर होती है, इसलिए पंचांग में एक ही दिन के लिए दो मासों के नाम मिलते हैं। व्रत, पर्व और धार्मिक तिथियों की जानकारी पढ़ते समय यह अंतर समझना उपयोगी है।

काल गणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। ये पारंपरिक संवत वर्ष की पहचान और पंचांग में तिथियों के संदर्भ को समझने में मदद करते हैं।

शरद ऋतु और दक्षिणायन

आज पंचांग में शरद ऋतु और दक्षिणायन का उल्लेख है। ऋतु वर्ष के मौसमी चरण को दर्शाती है, जबकि अयन सूर्य की वार्षिक गति पर आधारित पारंपरिक काल गणना से संबंधित है। इन दोनों विवरणों को तिथि और वार के साथ पढ़ने से पंचांग का व्यापक संदर्भ समझ में आता है।

सुबह और शाम के समय मौसम में अंतर हो सकता है। बाहर जाने या यात्रा की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम के अनुसार तैयारी करना व्यावहारिक रहेगा।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति

आज सूर्योदय 6:08 AM पर और सूर्यास्त 5:16 PM पर होगा। सुबह की पूजा, दिन की गतिविधियों और शाम के कार्यक्रमों की योजना बनाते समय इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।

आज चंद्रोदय 1:22 AM पर और चंद्रास्त 2:11 PM पर होगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा और चंद्र निवास पूर्व दिशा में बताया गया है। चंद्रमा के उदय-अस्त के समय और उसकी राशि को पंचांग के अन्य विवरणों के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति समझी जाती है।

पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र, ब्रह्मा योग और विष्टि करण

आज पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र 3:31 AM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा। यह समय सूर्योदय से पहले का है, इसलिए दिन के अधिकतर हिस्से में अगला नक्षत्र प्रभावी रहेगा। नक्षत्र विशेष से जुड़े धार्मिक कार्यों के लिए उसका सही समय देखना उपयोगी है।

ब्रह्मा योग सुबह 8:00 AM तक रहेगा। इसके बाद योग बदल जाएगा। किसी महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य के लिए समय चुनते हुए केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय तिथि, नक्षत्र और निर्धारित मुहूर्त को भी देखना चाहिए।

आज विष्टि करण सुबह 11:05 AM तक रहेगा, जबकि दशमी तिथि 11:04 AM पर समाप्त होगी। यानी दोनों के समाप्त होने में केवल एक मिनट का अंतर है। विष्टि करण को पारंपरिक पंचांग में भद्रा से संबंधित माना जाता है, इसलिए इस अवधि में किसी विशेष शुभ कार्य की योजना हो तो संबंधित नियम और समय की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।

शुभ मुहूर्त और अशुभ समय

आज का शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है। वहीं राहुकाल 11:42 AM से शुरू होकर 1:06 PM तक रहेगा। दोनों समयों में कुछ अवधि का मेल है, इसलिए किसी खास कार्य के लिए मुहूर्त तय करते समय केवल शुभ मुहूर्त की शुरुआत और समाप्ति देखना पर्याप्त नहीं होगा। कार्य की प्रकृति और संबंधित धार्मिक परंपरा के अनुसार समय की पुष्टि करें।

आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:

  • राहुकाल: 11:42 AM से 1:06 PM

  • गुलिक काल: 10:19 AM से 11:42 AM

  • यमघण्टकाल: 7:32 AM से 8:55 AM

पारंपरिक मान्यताओं में इन अवधियों के दौरान नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए अपनी परिस्थिति और सुविधा के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।

दिशाशूल और राशिगत स्थिति

आज दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यात्रा की दिशा तय करते समय इस विवरण पर विचार किया जाता है। यदि उत्तर दिशा में यात्रा करनी हो, तो अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्णय ले सकते हैं; साथ ही यात्रा की सुरक्षा, जरूरत और व्यावहारिक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना चाहिए।

आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा। पंचांग के अनुसार चंद्र निवास पूर्व दिशा में है। इन राशिगत स्थितियों को तिथि, नक्षत्र और योग के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय गणना को समझा जा सकता है।

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Published by Sri Mandir·November 4, 2026

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