
यहां जानें आज की तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय।
सोमवार, 2 नवंबर को कृष्ण अष्टमी दोपहर लगभग 1:10 बजे तक रहेगी, जिसके बाद नवमी लग जाएगी। व्रत, पूजा और धार्मिक आयोजनों की तारीख समझने में यह समय महत्वपूर्ण हो सकता है। तिथि के इस बदलाव के साथ नक्षत्र, योग और करण का विवरण भी पढ़ें, ताकि दिन की पंचांग गणना साफ तौर पर समझ में आए।
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2 नवंबर 2026, सोमवार को कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 1:11 PM तक रहेगी। आज नक्षत्र और योग की स्थिति पर भी ध्यान देना उपयोगी है, क्योंकि अश्लेषा नक्षत्र सुबह 3:47 AM तक और शुभ योग दोपहर 12:06 PM तक रहेगा। दिन में शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है। कार्तिक मास के इस दिन तिथि, करण और शुभ-अशुभ समय को साथ देखकर अपनी धार्मिक दिनचर्या और जरूरी कामों की योजना बनाई जा सकती है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष अष्टमी (1:11 PM तक) |
वार | सोमवार |
पूर्णिमांत मास | कार्तिक |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:07 |
सूर्यास्त | 17:17 |
चंद्रोदय | 00:22 |
चंद्रास्त | 12:59 |
नक्षत्र | अश्लेषा (3:47 AM तक) |
योग | शुभ (12:06 PM तक) |
करण | कौलव (1:13 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:20 AM से 12:04 PM |
राहुकाल | 7:31 AM से 8:55 AM |
गुलिक काल | 1:06 PM से 2:30 PM |
यमघण्टकाल | 10:18 AM से 11:42 AM |
दिशाशूल | पूर्व |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | कर्क |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 1:11 PM तक रहेगी। इसके बाद तिथि में परिवर्तन होगा। यदि आज कोई पूजा, व्रत या धार्मिक अनुष्ठान करना है, तो उससे जुड़ी तिथि और समय की जानकारी पहले देख लेना उपयोगी रहेगा।
सोमवार का संबंध पारंपरिक रूप से भगवान शिव की उपासना से माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन शिव पूजन, मंत्र-जप या ध्यान के लिए समय निकाल सकते हैं। दिन की व्यस्तता के बीच कुछ समय शांत मन से बिताना भी अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करने का अच्छा अवसर हो सकता है।
आज पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास और अमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास है। हिंदू पंचांग की इन दोनों प्रणालियों में महीने की गणना अलग तरीके से होती है, इसलिए एक ही दिन के लिए मास के दो अलग नाम मिल सकते हैं। व्रत और त्योहार की तिथि देखते समय संबंधित परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।
काल गणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। ये संवत पारंपरिक पंचांग में दिन और वर्ष की पहचान के लिए उपयोग किए जाते हैं। धार्मिक तिथियों को समझने में इनके उल्लेख से समय की गणना का संदर्भ स्पष्ट होता है।
आज शरद ऋतु है और पंचांग के अनुसार दक्षिणायन चल रहा है। इस समय सुबह और शाम के तापमान में अंतर महसूस हो सकता है, हालांकि वास्तविक मौसम स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। बाहर जाने या दिनभर की गतिविधियों की योजना बनाते समय मौसम का ध्यान रखना व्यावहारिक रहेगा।
पारंपरिक भारतीय काल गणना में अयन का संबंध सूर्य की वार्षिक गति से है। इसी कारण पंचांग में ऋतु और अयन दोनों का उल्लेख किया जाता है। ये विवरण केवल दिन की तिथि ही नहीं, बल्कि वर्ष के मौसमी और कालगत संदर्भ को भी समझने में मदद करते हैं।
आज सूर्योदय 6:07 AM पर और सूर्यास्त 5:17 PM पर होगा। सुबह की दिनचर्या, पूजा-पाठ और शाम की गतिविधियों के लिए इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।
आज चंद्रोदय 12:22 AM पर और चंद्रास्त 12:59 PM पर होगा। चंद्रमा की स्थिति के अनुसार यह समय दिन और रात के अलग-अलग हिस्सों में उसकी उपस्थिति को दर्शाता है। पंचांग में आज चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा और चंद्र निवास उत्तर दिशा में बताया गया है।
आज अश्लेषा नक्षत्र 3:47 AM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा। चूंकि यह समय सुबह से पहले का है, इसलिए दिन की अधिकांश गतिविधियों के दौरान अगला नक्षत्र प्रभावी रहेगा।
शुभ योग दोपहर 12:06 PM तक रहेगा। पंचांग परंपरा में योग को दिन की ज्योतिषीय स्थिति के एक हिस्से के रूप में देखा जाता है। किसी धार्मिक कार्य के लिए समय चुनते समय योग के साथ तिथि, नक्षत्र और निर्धारित मुहूर्त को भी देखना चाहिए।
आज कौलव करण 1:13 PM तक रहेगा, जबकि अष्टमी तिथि 1:11 PM पर समाप्त होगी। इस तरह तिथि समाप्त होने के लगभग दो मिनट बाद करण का समय भी पूरा होगा। दोपहर के आसपास होने वाले इन बदलावों को ध्यान में रखकर पंचांग आधारित कार्यों का समय तय किया जा सकता है।
आज का शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जाता है। किसी विशेष पूजा या आयोजन के लिए संबंधित विधि और स्थानीय पंचांग की जानकारी भी ध्यान में रखनी चाहिए।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 7:31 AM से 8:55 AM
गुलिक काल: 1:06 PM से 2:30 PM
यमघण्टकाल: 10:18 AM से 11:42 AM
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में इन समयों के दौरान नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, रोजमर्रा के जरूरी कामों में अपनी परिस्थिति और सुविधा के अनुसार निर्णय लेना भी आवश्यक है।
आज दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार पूर्व दिशा की यात्रा की योजना बनाते समय इस विवरण को ध्यान में रखा जाता है। यात्रा की वास्तविक जरूरतों, समय और परिस्थितियों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।
पंचांग के अनुसार आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा। चंद्र निवास उत्तर दिशा बताया गया है। इन स्थितियों को तिथि, नक्षत्र और योग के साथ पढ़ने से दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय गणना का व्यापक संदर्भ मिलता है।
आज तिथि दोपहर में समाप्त हो रही है और शुभ योग भी दोपहर 12:06 PM तक है, जबकि शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक निर्धारित है। इसलिए किसी खास धार्मिक कार्य के लिए केवल एक समय देखकर निर्णय लेने के बजाय उससे संबंधित तिथि, मुहूर्त और परंपरा की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। दिन की शुरुआत में पंचांग देख लेने से पूजा-पाठ और अन्य जरूरी कामों को सुविधानुसार व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
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