
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
रविवार की सुबह कई लोगों के लिए परिवार के साथ समय बिताने, सूर्य को अर्घ्य देने और नियमित पूजा करने का अवसर होती है। 1 नवंबर 2026 को कृष्ण पक्ष की सप्तमी दोपहर 2:52 बजे तक रहेगी, फिर अष्टमी शुरू होगी। दिन की शुरुआत से पहले तिथि और सूर्योदय का समय जान लेने से धार्मिक दिनचर्या व्यवस्थित की जा सकती है। आज के पंचांग में शुभ मुहूर्त और राहुकाल भी देखना न भूलें।
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1 नवंबर 2026 को रविवार के दिन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 2:53 PM तक रहेगी। आज का पंचांग देखते समय सुबह के नक्षत्र परिवर्तन और दोपहर में तिथि, योग तथा करण की समाप्ति पर ध्यान देना उपयोगी है। पुष्य नक्षत्र सुबह 4:31 AM तक रहेगा, जबकि साध्य योग 2:39 PM तक प्रभावी रहेगा। दिन का शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है। शाम की गतिविधियों और अगले दिन की योजना के लिए सूर्यास्त तथा चंद्रोदय के समय को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष सप्तमी (2:53 PM तक) |
वार | रविवार |
पूर्णिमांत मास | कार्तिक |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:06 |
सूर्यास्त | 17:18 |
चंद्रोदय | 23:19 |
चंद्रास्त | 12:17 |
नक्षत्र | पुष्य (4:31 AM तक) |
योग | साध्य (2:39 PM तक) |
करण | बव (2:55 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:20 AM से 12:04 PM |
राहुकाल | 3:54 PM से 5:18 PM |
गुलिक काल | 2:30 PM से 3:54 PM |
यमघण्टकाल | 11:42 AM से 1:06 PM |
दिशाशूल | पश्चिम |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | कर्क |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 2:53 PM तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। यदि आज किसी धार्मिक आयोजन या तिथि के अनुसार पूजा की योजना बना रहे हैं, तो इस परिवर्तन के समय को ध्यान में रखना चाहिए।
रविवार का संबंध पारंपरिक रूप से सूर्य देव से माना जाता है। इस दिन सूर्य उपासना, प्रार्थना और आत्मचिंतन के लिए समय निकालने की परंपरा है। अपनी श्रद्धा के अनुसार सूर्य को अर्घ्य देना या सुबह कुछ समय शांत मन से बिताना दिन की शुरुआत का हिस्सा हो सकता है।
आज पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास और अमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास है। दोनों प्रणालियों में चंद्र मास की गणना अलग तरीके से की जाती है, इसलिए एक ही तारीख के लिए पंचांग में अलग-अलग मास के नाम मिल सकते हैं। व्रत और त्योहारों की तिथि देखते समय यह समझना जरूरी है कि जानकारी किस गणना पद्धति पर आधारित है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। इन संवतों का उल्लेख भारतीय पंचांग में पारंपरिक वर्ष और तिथि की पहचान के लिए किया जाता है।
आज शरद ऋतु है और दक्षिणायन चल रहा है। पंचांग में ऋतु का उल्लेख वर्ष के प्राकृतिक चक्र को समझने में मदद करता है, जबकि अयन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़ी पारंपरिक काल गणना का हिस्सा है।
नवंबर की शुरुआत में दिन और रात के तापमान में अंतर महसूस हो सकता है। सुबह या शाम बाहर निकलने और यात्रा की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम के अनुसार तैयारी करना उपयोगी रहेगा।
आज सूर्योदय 6:06 AM पर और सूर्यास्त 5:18 PM पर होगा। सुबह की पूजा, दिन की गतिविधियों और शाम की दिनचर्या के लिए इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।
आज चंद्रोदय 11:19 PM पर होगा, जबकि चंद्रास्त 12:17 PM पर रहेगा। चंद्रमा देर रात उदित होगा और दोपहर में अस्त होगा। आज चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहेगा तथा पंचांग के अनुसार चंद्र निवास उत्तर दिशा में है। चंद्रमा की स्थिति को तिथि और नक्षत्र के साथ देखकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय गणना समझी जाती है।
आज पुष्य नक्षत्र सुबह 4:31 AM तक रहेगा। इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र आरंभ होगा। चूंकि पुष्य नक्षत्र सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए दिन के समय पंचांग में अगला नक्षत्र प्रभावी रहेगा। किसी नक्षत्र-विशेष से संबंधित धार्मिक कार्य की योजना बनाते समय इस अंतर को समझना उपयोगी है।
साध्य योग दोपहर 2:39 PM तक रहेगा। इसके बाद योग में परिवर्तन होगा। आज योग की समाप्ति और तिथि की समाप्ति के समय में अंतर है, इसलिए किसी कार्य के लिए पंचांग देखते समय दोनों विवरण अलग-अलग जांचने चाहिए।
आज बव करण दोपहर 2:55 PM तक रहेगा। यह सप्तमी तिथि के समाप्त होने के दो मिनट बाद तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद करण बदल जाएगा। इस तरह दोपहर के आसपास तिथि और करण के समय में बहुत कम अंतर है, जबकि साध्य योग उससे कुछ पहले समाप्त हो जाएगा।
आज का शुभ मुहूर्त 11:20 AM से 12:04 PM तक है। पारंपरिक पंचांग के अनुसार इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जा सकता है। किसी विशेष पूजा, संस्कार या आयोजन के लिए संबंधित धार्मिक नियमों और स्थानीय परंपरा को भी ध्यान में रखना चाहिए।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 3:54 PM से 5:18 PM
गुलिक काल: 2:30 PM से 3:54 PM
यमघण्टकाल: 11:42 AM से 1:06 PM
पारंपरिक मान्यताओं में इन समयों के दौरान नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज गुलिक काल के तुरंत बाद राहुकाल शुरू होगा, इसलिए दोपहर बाद समय निर्धारित करते हुए दोनों अवधियों का ध्यान रखें। जरूरी कामों में व्यावहारिक परिस्थितियों और सुविधा को भी महत्व दें।
आज दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यात्रा की योजना बनाते समय दिशाशूल पर विचार किया जाता है। यदि पश्चिम दिशा में यात्रा करनी हो, तो अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार उपायों पर विचार कर सकते हैं। यात्रा के लिए सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है।
राशिगत स्थिति के अनुसार आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा। चंद्र निवास उत्तर दिशा बताया गया है। सूर्य और चंद्रमा की राशियों के साथ तिथि, नक्षत्र तथा योग को मिलाकर पंचांग की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति देखी जाती है।
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