
होली के रंग केवल उत्सव की खुशी ही नहीं, बल्कि भगवान के प्रेम, करुणा और आनंद का प्रतीक भी हैं। जैसे रंग जीवन को सुंदर और उज्ज्वल बनाते हैं, वैसे ही ईश्वर की कृपा हमारे जीवन को सुख, शांति और सकारात्मकता से भर देती है।
भगवान और होली के रंग प्रेम, आनंद और दिव्य कृपा का सुंदर प्रतीक माने जाते हैं। जैसे रंग जीवन में खुशियां भरते हैं, वैसे ही ईश्वर का आशीर्वाद मन को पवित्र और प्रसन्न बनाता है। होली हमें सिखाती है कि भक्ति, करुणा और भाईचारे के रंगों से जीवन को सजाकर हम भगवान के और भी करीब आ सकते हैं सदा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सभी देवी-देवताओं का अपना विशेष प्रिय रंग होता है। आज हम आपके लिए अलग-अलग रंगों के महत्व के अनुसार जानकारी लेकर आये हैं। आप सभी होली के उत्सव में डूबने से पहले अपने इष्ट भगवान को अबीर गुलाल और रंग चढ़ाकर उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।
नारायण विष्णु एवं उनके परम अवतार श्री कृष्ण को पीताम्बरधारी कहा जाता है। शास्त्रों में भी वर्णित है कि पीला रंग श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय है। ऐसे में उन्हें पीले रंग के वस्त्र पहनाएं और उनके चरणों में पीले रंग का अबीर अर्पित करें।
मां दुर्गा, लक्ष्मी माता और हनुमानजी को लाल रंग सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। अतः इन सभी को लाल रंग के वस्त्र भेंट किए जाते हैं एवं हनुमान जी को लाल रंग का चोला चढ़ाया जाता है। होली के अवसर पर आप इन्हें लाल रंग का गुलाल अर्पित करें।
भगवान भोलेनाथ को होली के दिन उनके नीले स्वरूप के अनुसार नीले रंग का गुलाल अर्पित करें।
माँ बगलामुखी का प्रिय रंग पीला माना जाता है अतः इन्हें पीले रंग का अबीर अर्पित करें।
आदित्य नारायण सूर्यदेव का सर्वाधिक प्रिय रंग लाल माना जाता है। अतः इन्हें लाल रंग का गुलाल अर्पित करें।
शनि देव का प्रिय रंग नीला या काला माना जाता है। होली के दिन आप शनिदेव को नीला या काला रंग लगाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करें।
भगवान गणेश की पूजा में लाल रंग के सिंदूर का प्रयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। अतः होली के अवसर पर भगवान गणेश को लाल गुलाल या लाल सिंदूर भी अर्पित किया जा सकता है और इसके साथ बप्पा को बूंदी के लड्डू का भोग अवश्य लगाएं।
ज्ञान एवं विद्या की देवी मां सरस्वती का प्रिय रंग सफेद माना जाता है अतः उन्हें सफ़ेद रंग के फूल चढ़ाएं और साथ ही उन्हें पीले या ला रंग का गुलाल भी अर्पित करें।
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