महा काल भैरव पूजन और हवन एवं कालिका पूजन शक्तिपीठ कालीघाट देवी-भैरव विशेष महा काल भैरव पूजन और हवन एवं कालिका पूजन
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शक्तिपीठ कालीघाट देवी-भैरव विशेष

महा काल भैरव पूजन और हवन एवं कालिका पूजन

महा काल भैरव पूजन और हवन एवं कालिका पूजन
temple venue
शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल
pooja date
6 अक्टूबर, रविवार, नवरात्रि चतुर्थी
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महा काल भैरव पूजन और हवन एवं कालिका पूजन शक्तिपीठ कालीघाट देवी-भैरव विशेष महा काल भैरव पूजन और हवन एवं कालिका पूजन

सनातन धर्म में नवरात्रि को बहुत ही शुभ माना जाता है। साल भर में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिसमें शारदीय नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि नवरात्रि मां भगवती दुर्गा की पूजा करने का सबसे पवित्र समय होता है और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। वहीं इस दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा भी की जाती है। नवरात्रि का पर्व विशेषकर शक्ति साधना, तांत्रिक क्रियाएं, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। तंत्र शास्त्र में भगवान भैरव एवं मां काली को अत्यंत शक्तिशाली एवं महत्वपूर्ण बताया गया है। माना जाता है कि इस दौरान देवी काली एवं बाबा काल भैरव काल साधक की रक्षा करते हैं। वहीं इनकी साधना से सभी प्रकार की ऊपरी बाधा और तंत्र बाधा का नाश होता है। भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र रूप माना जाता है और उन्हें समय का देवता भी कहा जाता है। काल भैरव को काल के देवता भी कहा गया है। भैरव का अर्थ है ‘भय को हरने वाला’। धर्म शास्त्रों के अनुसार, जिस तरह भगवान काल भैरव भगवान शिव के रौद्र अवतार हैं, उसी तरह देवी काली माता दुर्गा का उग्र रूप हैं। इसलिए नवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव के साथ देवी काली की उपासना अत्यंत शुभ मानी गई है। माना जाता है कि इस शुभ दिन पर महा काल भैरव के साथ देवी काली की पूजा करने से भक्त के सारे भय खत्म हो जाते हैं, इसलिए देवी मां के आशीष पाने से पहले भगवान भैरव की पूजा करना भी अनिवार्य माना गया है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने सभी शक्तिपीठों की रक्षा की जिम्मेदारी भगवान भैरव को दी थी। इसलिए सभी शक्तिपीठ मंदिरों में काल भैरव का भी विशेष पूजन किया जाता है। काल भैरव के दर्शन के बिना देवी मंदिरों के दर्शन का पुण्य अधूरा माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के इस शुभ अवसर पर देवी काली का आशीष पाने के लिए उनके साथ काल भैरव की पूजा करना भी आवश्यक माना गया है। महा काल भैरव और मां काली सभी नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट कर भक्तों को निर्भयता का आशीष देते हैं। इसलिए श्री मंदिर द्वारा नवरात्रि के दिनों में पश्चिम बंगाल में स्थित शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर में महा काल भैरव पूजन और हवन एवं कालिका पूजन का आयोजन किया जा रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां देवी सती का दाहिने पैर की उंगली गिरी थी, जब भगवान शिव उनके शव को लेकर तांडव कर रहे थे। इस कारण, यह स्थल अत्यंत पवित्र 51 शक्तिपीठों में शामिल है। श्री मंदिर के माध्यम से जीवन में निर्भयता प्राप्ति एवं नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा के लिए इस पूजा में भाग लें और काल भैरव संग देवी काली का दिव्य आशीष पाएं।

पूजा लाभ

puja benefits
निर्भयता प्राप्ति का आशीष
भगवान काल भैरव भय को हरने वाले देवता के रूप में भी जाना जाता है और मां काली साहस और बुरी शक्तियों का विनाश करने वाली देवी हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त नवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान भैरव के साथ देवी काली की उपासना करते हैं उनके जीवन में भय पर नियंत्रण पाने की शक्ति प्राप्त होती है जिससे वो अपने जीवन की सभी बाधाओं से निर्भयता पूर्वक लड़ सकते हैं।
puja benefits
नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा के लिए
शास्त्रों में कालीघाट शक्तिपीठ मंदिर को तांत्रिक दृष्टिकोण से बड़ा महत्वपूर्ण है। मां काली की उपासना के लिए यह सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि यहां नवरात्रि के शुभ अवसर पर महा काल भैरव पूजन और हवन एवं कालिका पूजन करने से इनका संरक्षण प्राप्त होता है और देवी काली सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा का आशीर्वाद देती हैं और बुरी शक्तियों का नाश करती हैं।
puja benefits
ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति
पुराणों के अनुसार भगवान महाकाल भैरव रुद्र अवतार है और भगवान शिव की उपासना करने से कुंडली के ग्रहों के अशुभ प्रभावों से भी मुक्ति मिल सकती है। माना जाता है कि नवरात्रि के शुभ अवसर पर इस शक्तिपीठ में महा काल भैरव और मां काली की उपासना करने से भक्तों को ग्रहों के अशुभ प्रभाव से सुरक्षा का आशीष प्राप्त होता है।

पूजा प्रक्रिया

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पूजा का चयन करें:

नीचे दिए गए पूजा के विकल्पों में से किसी एक का चुनाव करें।
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पूजा के दिन अपडेट पाएं

हमारे अनुभवी पंडित पूरे विधि विधान से पूजा कराएंगे, पूजा के दिन श्री मंदिर भक्तों की पूजा सामूहिक रूप से की जाएगी। जिसका लाइव अपडेट्स आपके व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
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पूजा वीडियो एबं तीर्थ प्रसाद डिलीवरी

3-4 दिनों के अंदर अपने व्हाट्सएप नंबर पर पूजा वीडियो पाएं एवं 8-10 दिनों में तीर्थ प्रसाद प्राप्त करें।

शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल

शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल
कालीघाट मंदिर, जो कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है, हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है और अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है, जो शक्ति, ऊर्जा और विनाश की देवी मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां देवी सती का दाहिने पैर की उंगली गिरी थी, जब भगवान शिव उनके शव को लेकर तांडव कर रहे थे। इस कारण, यह स्थल अत्यंत पवित्र 51 शक्तिपीठों में शामिल है। यहां इस मंदिर में देवी काली की प्रचण्ड रूप की प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा में देवी काली भगवान शिव की छाती पर पैर रखे नजर आ रही हैं और उनके गले में नरमुंडों की माला है, उनके हाथ में कुछ कुल्हाड़ी और कुछ नरमुंड हैं, कमर में कुछ नरमुंड भी बंधे हुए हैं। उनकी जीभ बाहर निकली हुई है और जीभ से कुछ रक्त की बूंदे टपक रह हैं। गौरतलब है कि प्रतिमा में मां काली की जीभ स्वर्ण से बनी हुई है।

वर्तमान में मौजूद मंदिर का निर्माण सबॉर्नो रॉय चौधरी परिवार और बाबू कालीप्रसाद दत्तो के संरक्षण में किया गया था, जिसका निर्माण सन् 1798 में शुरू हुआ और 1809 में पूर्ण हुआ। कालीघाट मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत बड़ा है। यह मंदिर कई सैकड़ों वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा है, जो यहां आकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। कालीघाट में देवी काली की पूजा से भक्तों को डर, बुराई, और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है। इसके अलावा, यह मंदिर बंगाल के सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है और यहां के धार्मिक त्योहार, विशेषकर दुर्गा पूजा और काली पूजा, बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं।

पूजा पैकेज में क्या-क्या शामिल है?

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विद्वान पुरोहितों द्वारा भक्त के नाम-गोत्र का उच्चारण किया जाएगा।

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घर से पूजा में भाग लेने के लिए पंडित जी मंत्र और विधियां बताएंगे।

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पूरी पूजा का वीडियो आपको WhatsApp पर शेयर किया जाएगा।

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तीर्थ स्थल का प्रसाद और आशीर्वाद बॉक्स घर बैठे पाने की सुविधा।

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Ranjana Sinha sapriwar kashyap gotr

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16 April, 2026

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Panditji ne vidhi purwak Puja kiye sanklap mantr achha tarike se kiye


पवन कुमार

पवन कुमार

15 April, 2026

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मन में परमशांति का अनुभव 🙏🙏🙏🙏🙏 श्री मंदिर एप का हृदय से धन्यवाद 🙏♥️🌹


प्रतापराव जयवंतराव मोरे

प्रतापराव जयवंतराव मोरे

14 April, 2026

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श्री मंदिर सेवा ऐप और पंडितजी श्री आदित्य पाठक जी और उनके सहयोगी पंडितजी आपको बहोत प्रणाम 🙏 और धन्यवाद आपके माध्यमसे श्रीक्षेत्र गयामें त्रिपिंडी श्राद्ध प्रभुनारायण कृपा बनाए रखना 🙏🌺

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