तीसरा श्राद्ध 2026 कब है?
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तीसरा श्राद्ध 2026 कब है?

तीसरा श्राद्ध 2026 कब है? यहां जानें इसकी सही तिथि, पूजा विधि और महत्व। पितरों की कृपा और जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए श्राद्ध करने का महत्व।

तीसरे श्राद्ध के बारे में

तीसरे श्राद्ध का आयोजन पितृपक्ष के तीसरे दिन किया जाता है। यह श्राद्ध उन पितरों के लिए होता है जिनकी मृत्यु भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुई हो। इस दिन परिवारजन तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन कराते हैं।

तीसरा श्राद्ध क्या होता है?

आश्विन मास की तृतीया तिथि को किए जाने वाले श्राद्ध को तृतीया श्राद्ध कहते हैं। ये श्राद्ध बोधगया के धर्मारण्य, मातंगवापी व सरस्वती वेदी पर करना उपयुक्त माना गया है। मान्यता है कि बोधगया में तृतीया श्राद्ध करने के बाद मतंगेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करना चाहिए। हालांकि यदि आपका यहां जाना संभव नहीं है तो आप अपने घर पर भी विधि-विधान से तृतीया श्राद्ध कर सकते हैं, और मन में ही मतंगेश्वर महादेव का स्मरण कर सकते हैं।

तृतीया श्राद्ध कब है?

  • तृतीया श्राद्ध 29 सितंबर, 2026 (मंगलवार) को किया जाएगा
  • कुतुप मुहूर्त - सुबह 11:47 से दोपहर 12:35 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त - दोपहर 12:35 से 01:23 बजे तक
  • अपराह्न काल - दोपहर 01:23 से 03:46 बजे तक

तृतीया श्राद्ध कैसे करें?

  • श्राद्ध करने वाले जातक सबसे पहले नित्यकर्म करके स्नान करें, और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद किसी विद्वान पंडित के मार्गदर्शन में तर्पण पिंडदान आदि कर्म करें।
  • श्राद्ध कर्म करने के लिए दोपहर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
  • श्राद्ध कर्म गंगा तट पर कारण विशेष फलदायक माना जाता है, हालांकि यदि वहां जाना संभव न हो तो आप घर पर भी यह अनुष्ठान कर सकते हैं।
  • पितरों को गंगाजल, जौ, तुलसी व शहद मिश्रित जल देने के बाद उनके नाम से दीपक जलाएं।
  • इसके बाद पिता से लेकर (यदि पिता स्वर्गवासी हों) जितने पितरों के नाम याद हैं, उन सभी का स्मरण करें, और उन्हें अन्य जल अर्पित करें।
  • तृतीया श्राद्ध पर गाय, कौवा, चींटी आदि के लिए भोजन का एक अंश निकालने के बाद तीन ब्राह्मणों को भी भोजन कराएं।
  • इन जीवों को भोजन देते समय अपने पितरों का स्मरण करें, और मन में ही उनसे भोजन ग्रहण करने के लिए प्रार्थना करें।
  • श्राद्ध कर्म संपन्न करने के बाद ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिणा दें। यदि इस दिन आप किसी गरीब की भी सहायता कर सकें, तो इससे आपके पितरों को विशेष प्रसन्नता होगी।

तृतीया श्राद्ध का महत्व

जिन पूर्वजों की मृत्यु तृतीया तिथि पर हुई है, तृतीया श्राद्ध उनके लिए विशेष महत्वपूर्ण है। तृतीया श्राद्ध अभिजित, कुतुप या रौहिण मुहूर्त में करना उपयुक्त माना जाता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध, पिंडदान व तर्पण से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि श्राद्ध करने वाले परिवार में भी सुख-समृद्धि, उत्तम संतान की प्राप्ति, पारिवारिक सामंजस्य और नौकरी-व्यापार में तरक्की बनी रहती है

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Published by Sri Mandir·September 2, 2026

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