
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
आज का पंचांग दैनिक जीवन में शुभ समय और ज्योतिषीय परिस्थितियों को समझने का पारंपरिक आधार है। आज पूजा-पाठ, यात्रा या किसी महत्वपूर्ण कार्य की योजना है, तो पंचांग की जानकारी काम आ सकती है। दिन की शुरुआत सही तैयारी और सकारात्मक सोच के साथ करना इसे बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
13 अगस्त 2026 को पंचांग की शुरुआत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हो रही है। अमावस्या के बाद शुरू होने वाला यह पक्ष धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है और आज का गुरुवार भी पूजा-पाठ तथा आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। दिन में तिथि, नक्षत्र और योग के समय बदलते रहेंगे, इसलिए किसी विशेष कार्य की योजना बनाते समय इनका ध्यान रखना उपयोगी हो सकता है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष प्रतिपदा (8:42 PM तक) |
वार | गुरुवार |
पूर्णिमांत मास | श्रावण |
अमांत मास | श्रावण |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | वर्षा |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 05:31 |
सूर्यास्त | 18:36 |
चंद्रोदय | 05:53 |
चंद्रास्त | 19:06 |
नक्षत्र | अश्लेषा (6:07 AM तक) |
योग | वरीयान (12:16 PM तक) |
करण | किंस्तुघ्न (9:53 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:38 AM से 12:30 PM |
राहुकाल | 1:42 PM से 3:20 PM |
गुलिक काल | 8:47 AM से 10:25 AM |
यमघण्टकाल | 5:31 AM से 7:09 AM |
दिशाशूल | दक्षिण |
सूर्य राशि | कर्क |
चंद्र राशि | कर्क |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 8:42 PM तक रहेगी। अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की शुरुआत होने के कारण यह तिथि नए चंद्र पक्ष का आरंभ दर्शाती है। धार्मिक परंपराओं में प्रतिपदा को नियमित पूजा, संकल्प और आने वाले दिनों की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
आज गुरुवार है, जिसे गुरु ग्रह से संबंधित दिन माना जाता है। धार्मिक कार्य, गुरु पूजन, अध्ययन और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए गुरुवार का विशेष महत्व रहता है। इसलिए आज दैनिक कार्यों के साथ पूजा-पाठ के लिए भी समय निकालना शुभ माना जा सकता है।
आज अमांत और पूर्णिमांत दोनों गणनाओं के अनुसार श्रावण मास चल रहा है। इससे आज के पंचांग में मास को लेकर किसी तरह का अंतर नहीं दिखाई देता। सावन का समय होने के कारण शिव पूजा और धार्मिक साधना का महत्व भी बना हुआ है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) तथा शक संवत 1948 (प्रभाउ) प्रभावी हैं। भारतीय पंचांग में इन संवतों के माध्यम से तिथि और वर्ष की पारंपरिक कालगणना की जाती है।
अभी वर्षा ऋतु चल रही है। सावन के इस समय में बारिश, हरियाली और धार्मिक गतिविधियों का विशेष वातावरण देखने को मिलता है। मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा या बाहरी कार्यक्रमों की योजना बनाना भी उपयोगी रहेगा।
अयन की दृष्टि से दक्षिणायन चल रहा है। पंचांग में अयन सूर्य की वार्षिक गति से जुड़े कालखंड को दर्शाता है और धार्मिक कालगणना में इसका उल्लेख किया जाता है।
आज सूर्योदय 5:31 AM पर होगा और सूर्यास्त 6:36 PM पर होगा। दिन की शुरुआत और समाप्ति के इन समयों के आधार पर पूजा, दैनिक कार्य और अन्य गतिविधियों का समय तय किया जा सकता है।
आज चंद्रोदय 5:53 AM पर तथा चंद्रास्त 7:06 PM पर होगा। सूर्य और चंद्रमा दोनों कर्क राशि में स्थित हैं। चंद्रमा का निवास उत्तर दिशा माना गया है, जो आज की पंचांग गणना का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष है।
आज अश्लेषा नक्षत्र सुबह 6:07 AM तक रहेगा। इसके बाद अगले नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। ज्योतिषीय परंपरा में अश्लेषा को गहन विचार, सूक्ष्मता और भावनात्मक पक्ष से जोड़कर देखा जाता है।
आज वरीयान योग दोपहर 12:16 PM तक रहेगा। पंचांग में योग की स्थिति को किसी दिन के कार्यों की प्रकृति समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
किंस्तुघ्न करण सुबह 9:53 AM तक रहेगा। करण तिथि का एक भाग होता है और दैनिक मुहूर्त की गणना में इसका उपयोग किया जाता है।
आज शुभ मुहूर्त 11:38 AM से 12:30 PM तक रहेगा। महत्वपूर्ण कार्यों के लिए समय चुनते हुए इस अवधि को ध्यान में रखा जा सकता है।
राहुकाल: 1:42 PM से 3:20 PM
गुलिक काल: 8:47 AM से 10:25 AM
यमघण्टकाल: 5:31 AM से 7:09 AM
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन अशुभ समयों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
आज दिशाशूल दक्षिण दिशा में है। यदि आज दक्षिण दिशा की यात्रा करनी हो, तो यात्रा से पहले पंचांग में बताए गए पारंपरिक उपायों का ध्यान रखा जा सकता है।
आज सूर्य और चंद्रमा दोनों कर्क राशि में स्थित हैं। चंद्र राशि और चंद्र निवास के साथ इन ग्रह स्थितियों को दिन की ज्योतिषीय गणना में महत्वपूर्ण माना जाता है।
13 अगस्त का पंचांग एक ऐसे दिन की जानकारी देता है जिसमें शुक्ल पक्ष की शुरुआत और सावन मास की धार्मिक पृष्ठभूमि दोनों साथ दिखाई देती हैं। इसलिए आज का दिन केवल समय देखने तक सीमित नहीं है; पूजा, संकल्प और आने वाले दिनों की तैयारी के लिए भी इसे व्यवस्थित ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। खासकर यदि कोई धार्मिक कार्य या महत्वपूर्ण गतिविधि तय करनी हो, तो शुभ मुहूर्त के साथ राहुकाल और दिशाशूल का भी ध्यान रखना बेहतर रहेगा।
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