
श्रीकृष्ण से अपने प्रश्नों का उत्तर पाएं, 'जरा इतना बता दे कान्हा' भजन के शब्द पढ़ें और भक्ति का अनुभव करें!
ये भजन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके दिव्य प्रेम को समर्पित है। यह भजन कान्हा से उनके लीला चरित्र, स्नेह, और कृपा के बारे में प्रश्न करता है, जिससे भक्ति का प्रवाह होता है। इस भजन को सुनने या गाने से मन को शांति, सुकून और आध्यात्मिक आनंद मिलता है। यह भजन भक्तों को श्रीकृष्ण के साथ एक विशेष आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने में सहायता करता है।
जरा इतना बता दे कान्हा,
कि तेरा रंग काला क्यों ।
श्लोक
श्याम का काला बदन,
और श्याम घटा से काला,
शाम होते ही,
गजब कर गया मुरली वाला ॥
जरा इतना बता दे कान्हा,
कि तेरा रंग काला क्यों,
तु काला होकर भी जग से,
इतना निराला क्यों ॥
मैंने काली रात में जन्म लिया,
और काली गाय का दूध पीया,
कजरे का रंग भी काला,
कमली का रंग भी काला,
इसी लिए मै काला ॥
सखी रोज़ ही घर में बुलाती है,
और माखन बहुत खिलाती है,
सखिओं का दिल भी काला,
इसी लिए मै काला ॥
मैंने काले नाग पर नाच किया,
और काले नाग को नाथ लिया,
नागों का रंग भी काला,
यमुना का रंग भी काला,
इसी लिए मै काला ॥
सावन में बिजली कड़कती है,
बादल भी बहुत बरसतें है,
बादल का रंग भी काला,
बिजली का रंग भी काला,
इसी लिए मै काला ॥
सखी नयनों में कजरा लगाती है,
और नयनों में मुझे बिठाती है,
कजरे का रंग भी काला,
नयनों का रंग भी काला,
इसी लिए मै काला ॥
जरा इतना बता दें कान्हा,
कि तेरा रंग काला क्यों,
तु काला होकर भी जग से,
इतना निराला क्यों ॥
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