देश विदेश में कैसे खेलते हैं होली?

देश विदेश में कैसे खेलते हैं होली?

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देश विदेश की होली (Holi Celebrations In India And Around World )

कोस कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी”, ऐसा ही है होली का त्यौहार, जो जगह और परंपरा के साथ बदलती है। क्या आप जानते हैं - उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक होली अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है। इसके साथ ही हमारे देश में इस त्यौहार से जुड़ी अनूठी परंपराएं भी प्रचलित हैं। इस बार साल 2024 में 25 मार्च को होली खेली जाएगी। रंगों के इस त्यौहार को पूरे भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़े हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है। आइए, आज हम आपको लेख के माध्यम से, होली के अलग-अलग रंगों और अलग-अलग परम्पराओं से रूबरू कराते हैं।

1. बरसाने की विश्व प्रसिद्ध लठमार होली (Barsane Ki Holi)

बरसाने की ये अनोखी होली सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में लोकप्रिय है। लठमार होली में स्त्रियों द्वारा पुरुषों पर लठ बरसाए जाते हैं और पुरुष एक ढ़ाल से स्वयं को बचाते हैं। हंसी-ठठोली ये भरा यह दृश्य अत्यंत ही मनमोहक लगता है। रंगो और अबीर-गुलाल से होली खेलते हुए लोग इस बेहद तरीके से होली का आनंद उठाते हैं। बरसाने की यह लठमार होली एक सप्ताह पहले से ही शुरू कर दी जाती है।

2. मथुरा-वृन्दावन की फूलों वाली होली (Mathura- Vrindavan Ki Holi)

रंगों और गुलाल वाली होली तो लगभग हम सभी ने खेली है लेकिन क्या आप जानते हैं कि मथुरा में फूलों वाली होली खेलने की भी एक अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है। मथुरा-वृन्दावन देश की एक ऐसी जगह हैं जहाँ होली के त्यौहार की एक अलग ही धूम देखने को मिलती है। बरसाने की लठ-मार होली की ही तरह मथुरा की फूलों वाली होली भी काफी लोकप्रिय है। फूलों वाली ये होली भी पूरे एक सप्ताह तक मनाई जाती है।

3. पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन की वसंत-उत्सव होली (Holi In West Bengal)

पश्चिम बंगाल के शांति-निकेतन में होली को वसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है। ये होली बंगाल की विश्व भारती यूनिवर्सिटी में बीते काफी समय से मनाई जाती है। इस अनोखी होली की शुरुआत रविंद्रनाथ टैगोर ने की थी और बंगाल की संस्कृति में इसका अत्यंत महत्व है। वसंत उत्सव में विश्वविद्यालय में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहाँ एकत्रित होते हैं।

4. पंजाब की होला-मोहल्ला होली (Holi Celebrations In Punjab)

पंजाब में होली के त्यौहार को एक अलग ढंग से मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन एक जगह पर इकठ्ठा होकर लोग तलवारबाज़ी, कुश्ती, मार्शल आर्ट्स जैसे करतबों का आयोजन करते हैं और इसमें सबसे ख़ास आकर्षण का केंद्र होता है कि ये सब रंगों और गुलाल खेलने और उड़ाने के बीच किया जाता है। खूबसूरत रंगों के बीच अपने युद्ध कौशल को दिखाने का यह त्यौहार पंजाबी समुदाय के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

5. उदयपुर की राजस्थानी शाही होली (Holi Celebrations In Udaipur)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि उदयपुर की ये होली शाही ढंग से मनाई जाने के लिए विश्व-विख्यात है। इस अनोखी, और भव्य होली में सिटी पैलेस में शाही निवास से मानेक चौ तक शाही जुलूस निकाला जाता है। इस जुलूस में घोड़े, हाथी से लेकर रॉयल बैंड शामिल होता है। साथ ही इस जश्न में राजस्थानी गीत-संगीत को भी शामिल किया जाता है।

6. गोवा की अनोखी होली (Holi Celebrations In Goa)

भारत के सभी शहरों से अगर तुलना करें तो आप पाएंगे गोआ की संस्कृति आधुनिक है। यहाँ अधिकतर पुर्तगाली और क्रिश्चयन कम्युनिटी के लोग रहते हैं जो बेहद अनूठे ढंग से होली मनाते हैं। इस होली को शिगमोत्सव के नाम से जाना जाता है जो कि लगभग दो सप्ताह तक मनाया जाता है। गोवा की इस होली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सनातन धर्म के साथ अन्य संस्कृतियों का मेल भी देखने को मिलता है।

7. ब्रज की लड्डू होली (Laddu Holi Celebrations In Braj)

ब्रज में होली का महोत्सव वसंत पंचमी से लेकर चैत्र कृष्ण रंगपंचमी तक मनाया जाता है। सबसे पहले भगवान कृष्ण की मूर्ति के साथ ही अबीर, रंग और गुलाल लगाकर होली खेलने की परंपरा है। जिसके बाद श्री कृष्ण की विशेष झांकी सजाई जाती है। होली खेलने से पहले लड्डू मार होली खेलने की परंपरा है।

8. काशी विश्वनाथ की होली (Holi Celebrations In Kashi Vishwanath)

काशी में होली के 5 दिन पहले ही रंगभरी ग्यारस के साथ होली की शुरूआत हो जाती है। प्राचीन मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ रंगभरी एकादशी के दिन ही मां पार्वती का हिमालय से गौना करा कर, अपनी नगरी काशी पहुंचे थे। 357 सालों से चली आ रही, इस परंपरा में आज भी कोई परिवर्तन नहीं आया है। काशी में आज भी मां पार्वती और बाबा विश्वनाथ की शोभायात्रा, काशी विश्वनाथ मंदिर पहुँचती है।

9. आपको हैरान कर देगी ‘मसाने की होली' (Masane Ki Holi)

वहीं होली का एक रंग ऐसा भी जो बेहद ही अनोखा है, काशी की, मसाने वाली होली, जहां काशी के वासी, रंगभरी एकादशी के अगले दिन श्मशान में होली खेलते है। धार्मिक मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ ने महाश्मशान पर दिंगबर रुप में अपने भक्तों के साथ होली खेली थी, जहाँ उनके साथ भूत, प्रेत, पिचास सहित सभी गण मौजूद थे। आज भी इस परंपरा को बाबा के भक्त बड़ी धूम धाम और मस्ती में मनाते हैं।

10. विदेशों में भी लोकप्रिय है होली (Holi Celebrations Around World)

श्री लंका, पाकिस्तान, बंगलादेश,और मॉरीशस में भारतीय परंपरा के अनुसार होली मनाई जाती है। इन देशों में प्रवासी भारतीय अपनी परंपरा से होली का पर्व मनाते हैं। गुआना और सुरिनाम तथा ट्रिनीडाड जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय हैं। गुआना के गाँवों में इस अवसर पर विशेष तरह के समारोहों का आयोजन किया जाता है। कैरिबियाई देशों में कई सारे हिंदू संगठन और सांस्कृतिक संगठन सक्रिय हैं। हालाँकि विदेशों में भी हाल के वर्षों में होली की लोकप्रियता और अधिक बढ़ी है।

भारत के अलग अलग क्षेत्रों में होली की परम्पराएं भले ही अलग-अलग हो लेकिन इन सभी का उद्देश्य एक ही है। आनंद और रंगों से भरा यह पवित्र त्यौहार हम सभी को यह संदेश देता है कि समाज में व्याप्त आपसी मतभेद को भुलाकर, प्रेम और समानता के व्यवहार का पालन करना ही मानवता का परम लक्ष्य है।

श्री मंदिर द्वारा आयोजित आने वाली पूजाएँ