
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
दिन की धार्मिक योजना बनाते समय तिथि का समय जानना कभी-कभी पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित कर देता है। शनिवार, 24 अक्टूबर को त्रयोदशी दोपहर लगभग 1:37 बजे तक रहेगी, फिर चतुर्दशी शुरू होगी। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र भी रात में समाप्त होकर रेवती नक्षत्र में बदल जाएगा।
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24 अक्टूबर 2026 को शनिवार के दिन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि दोपहर 1:38 PM तक रहेगी। आज का पंचांग देखते समय एक खास बात यह है कि करण तिथि समाप्त होने से कुछ मिनट पहले बदल जाएगा, जबकि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र रात 8:33 PM तक रहेगा। शनिवार और त्रयोदशी के संयोग में पूजा-पाठ या धार्मिक कार्यों की योजना बना रहे हैं, तो तिथि के साथ समय का मिलान करना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी (1:38 PM तक) |
वार | शनिवार |
पूर्णिमांत मास | अश्विन |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:02 |
सूर्यास्त | 17:24 |
चंद्रोदय | 16:01 |
चंद्रास्त | 03:56 |
नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद (8:33 PM तक) |
योग | व्याघात (8:02 PM तक) |
करण | तैतिल (1:32 PM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:21 AM से 12:05 PM |
राहुकाल | 8:52 AM से 10:18 AM |
गुलिक काल | 6:02 AM से 7:27 AM |
यमघण्टकाल | 1:08 PM से 2:33 PM |
दिशाशूल | पूर्व |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | मीन |
चंद्र निवास | उत्तर |
आज शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि दोपहर 1:38 PM तक रहेगी। हिंदू परंपरा में त्रयोदशी तिथि का संबंध प्रदोष व्रत से भी है, जो सूर्यास्त के आसपास के समय में की जाने वाली शिव-उपासना के लिए जानी जाती है। हालांकि, व्रत की तिथि और प्रदोष काल की पुष्टि स्थानीय पंचांग के अनुसार करनी चाहिए।
आज शनिवार है। परंपरागत मान्यताओं में इस दिन शनिदेव की पूजा, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को महत्व दिया जाता है। यदि आप शनिवार को कोई धार्मिक नियम या पूजा करते हैं, तो अपनी परंपरा के अनुसार दिनचर्या तय कर सकते हैं।
आज अमांत और पूर्णिमांत, दोनों पद्धतियों में अश्विन मास है। हिंदू कैलेंडर में मास की गणना के लिए इन दोनों प्रणालियों का उपयोग होता है। आज दोनों में एक ही मास का नाम होने से तिथि और पर्व संबंधी जानकारी को समझना अपेक्षाकृत सरल रहता है।
पंचांग के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। ये पारंपरिक वर्ष गणना की दो अलग प्रणालियां हैं, जिनका उल्लेख धार्मिक तिथियों और पंचांग संबंधी विवरणों में किया जाता है।
आज शरद ऋतु है और सूर्य की वार्षिक गति के पारंपरिक वर्गीकरण के अनुसार दक्षिणायन चल रहा है। ऋतु और अयन की जानकारी पंचांग में समय की व्यापक स्थिति बताती है। दिन की योजना बनाते समय सुबह और शाम के मौसम, यात्रा की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना अच्छा रहेगा।
आज सूर्योदय 6:02 AM पर और सूर्यास्त 5:24 PM पर होगा। इन समयों के आधार पर सुबह की पूजा, दिन के कार्यों और शाम की धार्मिक गतिविधियों की योजना बनाई जा सकती है। सूर्यास्त से जुड़े किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
आज चंद्रोदय 4:01 PM पर होगा और चन्द्रास्त अगले दिन 3:56 AM पर होगा। चंद्रमा शाम के शुरुआती हिस्से में उदित होगा और रात के बाद अस्त होगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा मीन राशि में रहेगा, जबकि चंद्र निवास उत्तर दिशा बताया गया है।
आज उत्तर भाद्रपद नक्षत्र 8:33 PM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा। दिन के अधिकांश समय में यही नक्षत्र प्रभावी रहेगा, इसलिए किसी विशेष मुहूर्त का चयन करते समय निर्धारित समय के अनुसार नक्षत्र की स्थिति देखी जा सकती है।
व्याघात योग 8:02 PM तक रहेगा। पंचांग में योग को तिथि और नक्षत्र के साथ दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति समझने के लिए देखा जाता है। आज यह योग शाम तक रहेगा और उसके बाद इसमें परिवर्तन होगा।
तैतिल करण 1:32 PM तक है, जबकि त्रयोदशी तिथि 1:38 PM तक रहेगी। यानी करण तिथि समाप्त होने से छह मिनट पहले बदल जाएगा। दोपहर के इस छोटे अंतर को ध्यान में रखना खास तौर पर उपयोगी है, यदि किसी धार्मिक कार्य के लिए करण और तिथि दोनों का समय देखा जा रहा हो।
आज का शुभ मुहूर्त 11:21 AM से 12:05 PM तक है। किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए समय चुनते समय इस अवधि पर विचार किया जा सकता है। साथ ही, काम की प्रकृति और उससे जुड़े पारंपरिक नियमों के अनुसार उपयुक्त मुहूर्त की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 8:52 AM से 10:18 AM
गुलिक काल: 6:02 AM से 7:27 AM
यमघण्टकाल: 1:08 PM से 2:33 PM
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में इन समयों के दौरान नए शुभ कार्य आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है। जरूरी कामों के लिए अपनी परिस्थिति, उपलब्ध समय और संबंधित कार्य के नियमों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। परंपरागत रूप से यात्रा की दिशा तय करते समय इसे पंचांग का एक हिस्सा माना जाता है। यात्रा से संबंधित निर्णय में दूरी, यातायात और अन्य व्यावहारिक पहलुओं को भी प्राथमिकता देना जरूरी है।
आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा मीन राशि में रहेगा। पंचांग में चंद्र निवास उत्तर दिशा बताया गया है। इन विवरणों से दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति की जानकारी मिलती है, जिसे तिथि, नक्षत्र और योग के साथ पढ़ा जाता है।
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