
यहां पढ़ें आज का पंचांग, जिसमें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल और सूर्योदय-सूर्यास्त की जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
पूर्णिमा की उजली रात के बाद अब चंद्रमा का घटता पक्ष शुरू हो चुका है। 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा सुबह तक रहेगी और फिर द्वितीया तिथि आरंभ होगी। यह बदलाव हिंदू चंद्र कैलेंडर के नए चरण की ओर संकेत करता है। तिथि, नक्षत्र और शुभ समय के मेल को समझकर दिन की शुरुआत अधिक व्यवस्थित ढंग से की जा सकती है।
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27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 7:02 AM तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ होगी। आज पंचांग में मास की गणना भी ध्यान देने योग्य है: अमांत पद्धति में अश्विन मास है, जबकि पूर्णिमांत पद्धति में कार्तिक मास शुरू हो चुका है। ऐसे में तिथि, मास और दिन के शुभ-अशुभ समय को साथ देखकर आज की धार्मिक गतिविधियों की योजना बनाना उपयोगी रहेगा।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (7:02 AM तक) |
वार | मंगलवार |
पूर्णिमांत मास | कार्तिक |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
शक संवत | 1948 (प्रभाउ) |
ऋतु | शरद |
अयन | दक्षिणायन |
सूर्योदय | 06:03 |
सूर्यास्त | 17:22 |
चंद्रोदय | 18:03 |
चंद्रास्त | 07:05 |
नक्षत्र | भरणी (3:40 PM तक) |
योग | सिद्धि (10:54 AM तक) |
करण | कौलव (7:01 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:21 AM से 12:05 PM |
राहुकाल | 2:32 PM से 3:57 PM |
गुलिक काल | 11:43 AM से 1:07 PM |
यमघण्टकाल | 8:53 AM से 10:18 AM |
दिशाशूल | उत्तर |
सूर्य राशि | तुला |
चंद्र राशि | मेष |
चंद्र निवास | पूर्व |
आज कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 7:02 AM तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि शुरू होगी। धार्मिक कार्यों में तिथि का महत्व होने के कारण व्रत, पूजा या किसी अनुष्ठान का समय तय करते समय यह देखना जरूरी है कि संबंधित परंपरा में किस तिथि को मान्यता दी गई है।
आज मंगलवार है, जिसे परंपरागत रूप से हनुमानजी और मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ, पूजा या सेवा जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दिन की शुरुआत प्रार्थना या किसी अच्छे संकल्प के साथ की जा सकती है।
आज पंचांग में मास के दो अलग नाम मिलते हैं। अमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास और पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास चल रहा है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दोनों प्रणालियों में चंद्र मास की गणना का आधार अलग है। पूर्णिमांत प्रणाली में पूर्णिमा के बाद नया मास शुरू होता है, जबकि अमांत प्रणाली में अमावस्या के बाद मास बदलता है।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) है। इन संवतों का उल्लेख पारंपरिक वर्ष गणना को दर्शाता है। पर्व या व्रत की तिथि समझते समय मास के साथ संवत और तिथि का विवरण देखना उपयोगी रहता है।
आज शरद ऋतु है और दक्षिणायन चल रहा है। पंचांग में ऋतु वर्ष के मौसमी चरण की जानकारी देती है, जबकि अयन सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित पारंपरिक गणना का हिस्सा है। दिनचर्या, यात्रा या बाहर के कामों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम और दिन के उजाले की अवधि को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
आज सूर्योदय 6:03 AM पर और सूर्यास्त 5:22 PM पर होगा। सुबह की पूजा, दिन की शुरुआत और शाम की धार्मिक गतिविधियों के लिए इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।
आज चंद्रोदय 6:03 PM पर होगा और चन्द्रास्त अगले दिन 7:05 AM पर होगा। यानी चंद्रमा शाम को उदित होकर अगली सुबह अस्त होगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा मेष राशि में रहेगा और चंद्र निवास पूर्व दिशा में बताया गया है।
आज भरणी नक्षत्र 3:40 PM तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र बदल जाएगा। किसी धार्मिक या ज्योतिषीय कार्य के लिए मुहूर्त देखते समय नक्षत्र की अवधि को ध्यान में रखना उपयोगी होता है, खासकर जब कार्य का समय दोपहर या शाम के आसपास हो।
सिद्धि योग 10:54 AM तक रहेगा। इसके बाद योग में परिवर्तन होगा। पंचांग में योग को तिथि और नक्षत्र के साथ पढ़ा जाता है, ताकि दिन के अलग-अलग समय की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति समझी जा सके।
आज कौलव करण 7:01 AM तक रहेगा, जबकि प्रतिपदा तिथि 7:02 AM तक है। यानी करण तिथि समाप्त होने से एक मिनट पहले बदल जाएगा। सुबह के शुरुआती समय में यह छोटा अंतर ध्यान देने योग्य है, यदि किसी धार्मिक कार्य का समय करण के आधार पर निर्धारित किया जा रहा हो।
आज का शुभ मुहूर्त 11:21 AM से 12:05 PM तक है। किसी महत्वपूर्ण कार्य या धार्मिक आयोजन के लिए समय तय करते समय इस अवधि पर विचार किया जा सकता है। विशेष पूजा या संस्कार के लिए संबंधित परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 2:32 PM से 3:57 PM
गुलिक काल: 11:43 AM से 1:07 PM
यमघण्टकाल: 8:53 AM से 10:18 AM
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए परिस्थिति और सुविधा के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। परंपरागत पंचांग में यात्रा की दिशा पर विचार करते समय इसे देखा जाता है। यदि यात्रा की योजना है, तो इस जानकारी के साथ-साथ दूरी, यातायात और मौसम जैसी व्यावहारिक परिस्थितियों पर भी ध्यान दें।
आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा मेष राशि में रहेगा। पंचांग के अनुसार चंद्र निवास पूर्व दिशा में है। सूर्य और चंद्रमा की राशियों के साथ तिथि, नक्षत्र तथा योग का विवरण दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति समझने में मदद करता है।
27 अक्टूबर के पंचांग में प्रतिपदा तिथि और कौलव करण सुबह-सुबह समाप्त हो रहे हैं, जबकि सिद्धि योग भी पूर्वाह्न में बदल जाएगा। इसके विपरीत भरणी नक्षत्र दोपहर बाद तक रहेगा। इसलिए सुबह किए जाने वाले धार्मिक कार्यों और दिन के बाद के हिस्से में होने वाले आयोजनों के लिए एक ही समय-सारणी पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित तिथि, करण और नक्षत्र की स्थिति अलग-अलग देखना अधिक उपयोगी होगा।
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