मट्टु पोंगल कब है
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मट्टु पोंगल कब है?

क्या आप जानते हैं मट्टु पोंगल 2026 कब है? जानिए इस पवित्र पर्व की तिथि, पूजा विधि, मुहूर्त और गायों की आराधना से जुड़ी पारंपरिक जानकारी – सब कुछ एक ही जगह!

मट्टु पोंगल के बारे में

मट्टु पोंगल, दक्षिण भारत के तमिलनाडु में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है। यह पोंगल उत्सव का चौथा दिन है, जिसमें किसानों द्वारा बैलों और पशुओं को सजाया, उनका सम्मान किया और कृषि समृद्धि की कामना की जाती है।

मट्टू पोंगल: कृषि और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का पर्व

मट्टू पोंगल कब है और शुभ मुहूर्त (2026 के लिए)

तमिलनाडु में, मकर संक्रान्ति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। पोंगल का त्योहार आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह चार दिनों का उत्सव होता है, जिसमें मट्टू पोंगल तीसरा दिन होता है।

वर्ष 2026 के लिए मट्टू पोंगल की तिथि:

  • तिथि: गुरुवार, 15 जनवरी 2026
  • सक्रांति मुहूर्त: 3:13 पी एम

शुभ मुहूर्त (पूजा का समय)

मट्टू पोंगल के दिन, सूर्य उदय के साथ ही मवेशियों को नहलाकर उनकी पूजा की जाती है। सुबह 09:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच का समय मवेशियों की सजावट और पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान, नए कपड़ों में तैयार होकर परिवार के सभी सदस्य मवेशियों को भोग अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं।

मट्टू पोंगल का महत्व

मट्टू पोंगल का सीधा संबंध कृषि और ग्रामीण जीवन से है। तमिल भाषा में ‘मट्टू‘ का अर्थ ‘मवेशी’ (विशेषकर बैल या सांड) होता है। यह दिन किसानों और आम लोगों द्वारा उन जानवरों को समर्पित होता है, जो पूरे वर्ष खेती में उनकी मदद करते हैं जैसे कि खेत जोतने, सिंचाई करने और परिवहन में योगदान देने वाले बैल और दूध देने वाली गायें।

इस दिन को कृषि और पशुधन के बीच के अटूट रिश्ते को सम्मान देने के रूप में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस पर्व के माध्यम से हम प्रकृति और उन सभी जीवों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनकी वजह से हमारे घर में अन्न आता है।

पौराणिक कथा

मट्टू पोंगल से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक कथा भगवान शिव के बैल नंदी (बसवा) से संबंधित है। एक बार, भगवान शिव ने नंदी को पृथ्वी पर जाकर लोगों से रोज़ तेल मालिश करने और महीने में एक बार भोजन करने का संदेश देने को कहा। लेकिन नंदी ने गलती से संदेश को उल्टा बता दिया—कि लोगों को रोज़ भोजन करना चाहिए और महीने में एक बार तेल मालिश करनी चाहिए। इस त्रुटि पर शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने नंदी को पृथ्वी पर ही रहने का श्राप दिया। शिव ने नंदी से कहा कि अब तुम्हें धरती पर रहकर किसानों की मदद करनी होगी, ताकि वे हर दिन खाने के लिए पर्याप्त अनाज उगा सकें। यही कारण है कि इस दिन मवेशियों का सम्मान किया जाता है।

मट्टू पोंगल कैसे मनाया जाता है?

मट्टू पोंगल की रस्में और उत्सव उत्साह और भक्ति से भरे होते हैं:

  • मवेशियों को नहलाना और सजाना: इस दिन सुबह जल्दी उठकर मवेशियों को साफ पानी से नहलाया जाता है। उनके सींगों को चमकीले रंगों से रंगा जाता है और उन पर तेल लगाया जाता है।
  • सजावट: मवेशियों को नए वस्त्र, घंटियाँ, फूल-मालाएँ, धान की बालियाँ और चमकीले गहनों से सजाया जाता है। गायों और बैलों के माथे पर हल्दी और कुमकुम से तिलक किया जाता है।
  • पूजा और भोग: विशेष रूप से तैयार किया गया पोंगल (गुड़, दूध और नए चावल से बनी खीर) मवेशियों को खिलाया जाता है। यह भोग अर्पित करते समय परिवार के सदस्य मवेशियों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं और उनके अच्छे स्वास्थ्य तथा लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हैं।
  • सामुदायिक उत्सव: कई ग्रामीण क्षेत्रों में, सजाए गए मवेशियों को गाँव में घुमाया जाता है। यह दिन लोक नृत्य और संगीत से भरा होता है।
  • जलिकट्टू (साँड़ को वश में करने का खेल): यद्यपि यह विवादित रहा है, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में जलिकट्टू (साँड़ों को वश में करने का पारंपरिक खेल) इस उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जो साहस और वीरता का प्रदर्शन करता है।

मट्टू पोंगल के दिन क्या करें और क्या न करें

क्या करें

  • मवेशियों का सम्मान करें: गायों और बैलों को स्वयं भोग अर्पित करें और उनकी सेवा करें।
  • पोंगल भोग तैयार करें: नए धान और गुड़ से पोंगल बनाकर सूर्य देव और मवेशियों को चढ़ाएं।
  • घरों की साफ-सफाई: घर को सजाएँ और पोंगल की रंगोली (कोलम) बनाएँ।
  • पारंपरिक वस्त्र पहनें: उत्सव को पूरी श्रद्धा और पारंपरिक वेशभूषा में मनाएँ।
  • पारिवारिक मिलन: दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर त्योहार का जश्न मनाएं।

क्या न करें

  • मवेशियों को कष्ट न दें: जानवरों को किसी भी प्रकार की हानि न पहुँचाएँ और न ही उन्हें कष्ट दें।
  • मांसाहार और मदिरा सेवन: त्योहार के इस पवित्र दिन पर मांसाहार और मदिरा सेवन से बचें।
  • पुराना सामान रखें: भोगी पोंगल (पहले दिन) में पुरानी चीजें जला दी जाती हैं, मट्टू पोंगल के दिन नई शुरुआत पर ध्यान केंद्रित करें।
  • झगड़ा या विवाद: घर या समुदाय में किसी भी तरह के झगड़े या नकारात्मकता से बचें।
  • पशुधन के प्रति कृतघ्नता: मवेशियों की भूमिका को न भूलें, यह दिन पूरी तरह से उनके प्रति आभार व्यक्त करने का है।
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Published by Sri Mandir·November 19, 2025

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