
श्री कृष्ण की बंसी की ध्वनि में खो जाएं, 'घनश्याम तेरी बंसी' भजन पढ़ें!
ये भजन भगवान श्री कृष्ण के मधुर बांसुरी वादन और उनकी प्रेममयी लीला का वर्णन करता है। इसे गाने और सुनने से भक्तों के मन में कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना जागृत होती है। यह भजन आत्मिक शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। कृष्ण की भक्ति से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आनंद मिलता है, साथ ही मानसिक तनाव भी दूर होता है।
घनश्याम तेरी बंसी,
पागल कर जाती है,
मुस्कान तेरी मोहन,
घायल कर जाती है ॥
घनश्याम तेरी बंसी,
पागल कर जाती है,
मुस्कान तेरी मोहन,
घायल कर जाती है ॥
सोने की होती तो,
क्या करते तुम मोहन,
ये बांस की होकर भी,
दुनिया को नचाती है ॥
घनश्याम तेरी बंसी,
पागल कर जाती है,
मुस्कान तेरी मोहन,
घायल कर जाती है ॥
तुम गोरे होते तो,
क्या कर जाते मोहन,
जब काले रंग पर ही,
दुनिया मर जाती है ॥
घनश्याम तेरी बंसी,
पागल कर जाती है,
मुस्कान तेरी मोहन,
घायल कर जाती है ॥
दुख दर्दों को सहना,
बंसी ने सिखाया है,
इसके छेद है सीने मे,
फ़िर भी मुस्काती है ॥
घनश्याम तेरी बंसी,
पागल कर जाती है,
मुस्कान तेरी मोहन,
घायल कर जाती है ॥
कभी रास रचाते हो,
कभी बंसी बजाते हो,
कभी माखन खाने की,
मन में आ जाती है ॥
घनश्याम तेरी बंसी,
पागल कर जाती है,
मुस्कान तेरी मोहन,
घायल कर जाती है ॥
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