🕉️ 108 नींबू माला अर्पण द्वारा माँ काली की प्रचंड शत्रु संहार शक्ति का आह्वान करें, ताकि नकारात्मकता, बुरी नजर और अदृश्य खतरों से संरक्षण की अनुभूति हो सके 🕉️
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माँ काली "शत्रु-संहार" 108 नींबू-माला अर्पण

माँ काली पूजा और 108 दिव्य नींबू माला अर्पण

बुरी नज़र और नकारात्मकता से सुरक्षा
temple venue
शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली, कुरुक्षेत्र, हरियाणा
pooja date
25 January, Sunday, माघ शुक्ल सप्तमी
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🔱 गुप्त नवरात्रि को छिपी हुई साधना और अंदर की शक्ति को जाग्रत करने का पावन समय माना जाता है। इस दौरान भक्त अदृश्य नकारात्मकता, बार-बार आने वाली परेशानियों और छिपे विरोध से रक्षा के लिए पूजा करते हैं। सनातन परंपरा के अनुसार, यह वह समय है जब देवी की शक्तिशाली स्वरूपों की उपासना की जाती है, जो चुपचाप लेकिन प्रभावी रूप से भय, नकारात्मकता और मन की अस्थिरता को दूर करती हैं। गुप्त नवरात्रि का हर दिन भक्तों को साहस, सुरक्षा और मन की शांति की ओर आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है।

🔱 हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह पूजा काल उन शक्तियों को बुलाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, जो नकारात्मकता का सीधे सामना कर उसे शांत करती हैं। गुप्त नवरात्रि की सप्तमी के दिन भक्त देवी माँ के उग्र रूपों की उपासना करते हैं। इस दिन माँ काली की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जिन्हें शत्रु बाधा को समाप्त करने वाली शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी कृपा से बुरी शक्तियाँ शांत होती हैं, बुरी नजर से रक्षा होती है और मन को साहस व स्थिरता मिलती है।

🔱 108 दिव्य नींबू माला अर्पण के साथ काली पूजा इसी सुरक्षा शक्ति को जाग्रत करने के लिए की जाती है। इस पूजा में माँ काली को 108 पवित्र नींबू अर्पित किए जाते हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा, जलन और बुरी सोच को अपने भीतर समाहित करने का प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि यह पवित्र अर्पण भक्त, उनके परिवार और घर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है। इसलिए यह पूजा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है, जो पूरी कोशिश के बाद भी लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

🙏 श्री मंदिर के माध्यम से भक्त गुप्त नवरात्रि सप्तमी पर अपना संकल्प रखते हैं और माँ काली से साहस, स्पष्ट सोच और सुरक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं। यह पावन पूजा मन को मजबूत बनाती है, भय को शांत करती है और भक्तों को माँ काली की करुणामयी और शक्तिशाली कृपा के साथ आगे बढ़ने की शक्ति देती है।

शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली, कुरुक्षेत्र, हरियाणा

शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली, कुरुक्षेत्र, हरियाणा
शक्तिपीठ भद्रकाली मंदिर, कुरुक्षेत्र, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसे सावित्री पीठ, देवी पीठ, कालिका पीठ और आदि पीठ के नाम से भी जाना जाता है। यह 52 पवित्र शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ माता सती के अंगों के टुकड़े उनके आत्मदाह के बाद गिरे थे। शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर शोक में व्याकुल होकर ब्रह्मांड भर में घूम रहे थे, तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े किए। ऐसा माना जाता है कि माता सती का दाहिना टखना इसी स्थान पर गिरा था, जिस कारण यह स्थान शक्तिपूजा का अत्यंत शक्तिशाली केंद्र बन गया।

यह मंदिर महाभारत काल से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ यहां आकर माँ भद्रकाली की पूजा की थी और विजय की कामना की थी। जब उनकी मनोकामना पूर्ण हुई, तो उन्होंने कृतज्ञता स्वरूप माँ को अपने अश्व समर्पित किए। यह परंपरा आज भी जीवित है, जहाँ श्रद्धालु अपनी इच्छाएं पूरी होने पर चाँदी, मिट्टी या अन्य धातुओं से बने घोड़े अर्पित करते हैं। यह मंदिर इस बात के लिए भी प्रसिद्ध है कि यहीं भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार संपन्न हुआ था।

किंवदंतियों और आध्यात्मिक ऊर्जा वाला यह शक्तिपीठ माँ की कृपा, कानूनी राहत और मनोकामना पूर्ति की सही दिशा के लिए अत्यंत पूजनीय माना गया है।

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