🔱 गुप्त नवरात्रि को छिपी हुई साधना और अंदर की शक्ति को जाग्रत करने का पावन समय माना जाता है। इस दौरान भक्त अदृश्य नकारात्मकता, बार-बार आने वाली परेशानियों और छिपे विरोध से रक्षा के लिए पूजा करते हैं। सनातन परंपरा के अनुसार, यह वह समय है जब देवी की शक्तिशाली स्वरूपों की उपासना की जाती है, जो चुपचाप लेकिन प्रभावी रूप से भय, नकारात्मकता और मन की अस्थिरता को दूर करती हैं। गुप्त नवरात्रि का हर दिन भक्तों को साहस, सुरक्षा और मन की शांति की ओर आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है।
🔱 हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह पूजा काल उन शक्तियों को बुलाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, जो नकारात्मकता का सीधे सामना कर उसे शांत करती हैं। गुप्त नवरात्रि की सप्तमी के दिन भक्त देवी माँ के उग्र रूपों की उपासना करते हैं। इस दिन माँ काली की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जिन्हें शत्रु बाधा को समाप्त करने वाली शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी कृपा से बुरी शक्तियाँ शांत होती हैं, बुरी नजर से रक्षा होती है और मन को साहस व स्थिरता मिलती है।
🔱 108 दिव्य नींबू माला अर्पण के साथ काली पूजा इसी सुरक्षा शक्ति को जाग्रत करने के लिए की जाती है। इस पूजा में माँ काली को 108 पवित्र नींबू अर्पित किए जाते हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा, जलन और बुरी सोच को अपने भीतर समाहित करने का प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि यह पवित्र अर्पण भक्त, उनके परिवार और घर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है। इसलिए यह पूजा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है, जो पूरी कोशिश के बाद भी लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
🙏 श्री मंदिर के माध्यम से भक्त गुप्त नवरात्रि सप्तमी पर अपना संकल्प रखते हैं और माँ काली से साहस, स्पष्ट सोच और सुरक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं। यह पावन पूजा मन को मजबूत बनाती है, भय को शांत करती है और भक्तों को माँ काली की करुणामयी और शक्तिशाली कृपा के साथ आगे बढ़ने की शक्ति देती है।