🪬🕉️ मानसिक उलझन, निर्णय में भ्रम और आंतरिक अस्थिरता को शांत करने हेतु- उत्तराखंड के राहु पैठानी मंदिर में आयोजित 4x18,000 राहु मूल मंत्र जाप एवं दशांश हवन अनुष्ठान से जुड़ें। ✨
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कलियुग में 4 गुना जाप करना अधिक प्रभावशाली फल देने वाला माना जाता है।

4x 18,000 राहु मूल मंत्र जाप एवं दशांश हवन

मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर निर्णय क्षमता के लिए
temple venue
राहु पैठाणी मंदिर, पौड़ी, उत्तराखंड
pooja date
8 March, Sunday, चैत्र कृष्ण पंचमी
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अक्सर जीवन में ऐसी समस्याएँ सामने आती हैं जहाँ मन बार-बार उलझन में रहता है, सही निर्णय लेने में कठिनाई होती है, अचानक भ्रम की स्थिति बनती है या बिना कारण चिंता और मानसिक दबाव महसूस होता है। कई लोग महसूस करते हैं कि मेहनत के बावजूद दिशा स्पष्ट नहीं हो पा रही या सोच बार-बार बदल रही है। ज्योतिष के अनुसार ऐसी मानसिक अस्थिरता और भ्रम की जड़ कई बार राहु के प्रभाव से जुड़ी मानी जाती है। राहु को छाया ग्रह कहा गया है, जो मन में संशय, असमंजस, अत्यधिक कल्पना और अप्रत्याशित परिस्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है। जब राहु अशांत माना जाता है, तब व्यक्ति निर्णय क्षमता में कमी, मानसिक तनाव या दिशा भ्रम का अनुभव कर सकता है।

ऐसी स्थिति में शास्त्रों में राहु शांति के लिए मूल मंत्र जाप को महत्वपूर्ण उपाय बताया गया है। दरअसल नवग्रहों के दो प्रकार के मंत्र होते हैं। मूल मंत्र और वैदिक मंत्र, इनमें मूल मंत्र का जाप अधिक प्रभावी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु के लिए 18,000 मंत्र जाप का विधान है, और अनुष्ठान की पूर्णता के लिए उसके जप का दशांश हवन किया जाता है, अर्थात 1,800 आहुतियाँ। पुराणों में भी कहा गया है- “कलौ तु चतुर्गुणं स्मृतम्॥” अर्थात कलियुग में मंत्र जाप चार गुना करने से उसका प्रभाव अधिक माना जाता है। इसी सिद्धांत के आधार पर इस विशेष अनुष्ठान में 18,000 के स्थान पर 4 गुना यानी 72,000 राहु मूल मंत्र जाप किया जाएगा, साथ ही 1,800 आहुतियों का दशांश हवन भी विधि-विधान से संपन्न होगा।

4x 18,000 राहु मूल मंत्र जाप और दशांश हवन का यह अनुष्ठान मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर निर्णय क्षमता की भावना से किया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार जब मंत्रों का जाप निर्धारित संख्या में और विधिपूर्वक हवन के साथ किया जाता है, तो उसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। यह विशेष अनुष्ठान उत्तराखंड के प्रसिद्ध राहु पैठानी मंदिर में वैदिक आचार्यों द्वारा संपन्न किया जा रहा है।

आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस पवित्र अनुष्ठान में सहभागी बन सकते हैं और इस आध्यात्मिक साधना से जुड़ सकते हैं।

राहु पैठाणी मंदिर, पौड़ी, उत्तराखंड

राहु पैठाणी मंदिर, पौड़ी, उत्तराखंड
उत्तराखंड में स्थित राहु पैठाणी मंदिर भारत के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जहां राहु की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राहु और केतु असुर स्वरभानु के शरीर के भाग हैं। समुद्र मंथन के दौरान स्वरभानु ने देवताओं की पंक्ति में बैठकर छल से अमृत पी लिया, जिसे भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया था, ताकि वह अमर न हो सके।

हालांकि, अमृत का स्वाद चखने के कारण स्वरभानु अमर हो गया। स्वरभानु के शरीर का निचला हिस्सा केतु और ऊपरी हिस्सा सिर वाला भाग राहु बन गया। यह सिर वाला हिस्सा सुदर्शन चक्र से कटने के बाद पौड़ी जिले में गिरा, जहां यह मंदिर स्थित है और यही राहु मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

यहां की मान्यता के अनुसार, राहु के कारण उत्पन्न होने वाले दोषों से मुक्ति पाने के लिए लोग इस मंदिर में पूजा करते हैं। विशेष रूप से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और राहु महादशा से राहत पाने के लिए श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते हैं।

कुछ कथाओं में कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य जी ने करवाया था, जबकि एक अन्य कथा के अनुसार पांडवों ने अपनी स्वर्गारोहिणी यात्रा के दौरान इस मंदिर का निर्माण कराया था, ताकि राहु दोष से मुक्ति मिल सके और वे भगवान शिव तथा राहु की पूजा कर सकें।

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