सनातन परंपरा में हनुमान जी को भगवान राम की भक्ति का साक्षात स्वरूप माना गया है। राम नाम उन्हें अत्यंत प्रिय है, इसलिए राम नाम से अंकित और जपा हुआ पीपल का हार अर्पित करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। पीपल वृक्ष को दिव्य ऊर्जा का स्रोत माना गया है। जब चंदन से लिखे 1008 राम नामों से युक्त पीपल की माला श्रद्धा से अर्पित की जाती है, तो यह हनुमान जी को अत्यंत प्रिय होती है।
शनिवार का दिन हनुमान उपासना के लिए विशेष माना गया है। उज्जैन स्थित श्री मायापति हनुमान मंदिर में इस दिन राम नाम अंकित पीपल माला अर्पित करने की परंपरा शनि दोष, भय और नकारात्मक प्रभावों को शांत करने की भावना से जुड़ी है। विद्वानों के अनुसार यह साधना आत्मबल, साहस और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, रोग और जीवन की रुकावटों से राहत की कामना से भक्त इस पूजा में सम्मिलित होते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार जब लंका में शनि देव बंधन में थे, तब हनुमान जी ने उन्हें मुक्त कराया था। उसी समय शनि देव ने वचन दिया कि जो भी हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि के कष्ट कम होंगे। यही कारण है कि शनिवार के दिन 1008 राम नाम से अंकित पीपल माला अर्पित करना अत्यंत प्रभावशाली साधना माना जाता है। पीपल में देवताओं का वास माना गया है, इसलिए इसकी माला और राम नाम का संयुक्त प्रभाव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माना जाता है।
मान्यता है कि इस विशेष अर्पण से शनि दोष के नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। मन का भय, मानसिक दबाव, कार्यों में बाधा और जीवन की कठिन परिस्थितियाँ शांत होने लगती हैं। जिन लोगों को बिना कारण डर, नकारात्मक विचार, अस्थिरता या बार-बार रुकावट का अनुभव होता है, उनके लिए यह साधना विशेष लाभकारी मानी जाती है।
श्रद्धा और नियमपूर्वक शनिवार के दिन किया गया यह अर्पण हनुमान जी की विशेष कृपा दिलाने वाला माना जाता है। वे भक्तों को शनि के कठोर प्रभावों से रक्षा प्रदान करते हैं। राम नाम की शक्ति और पीपल की पवित्रता का संगम साधक को निर्भय, स्थिर और दोषों से मुक्त जीवन की ओर प्रेरित करता है। उज्जैन के श्री मायापति हनुमान मंदिर की दिव्य ऊर्जा इस अनुष्ठान को और भी प्रभावशाली बनाती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस महापूजा में सम्मिलित होकर आप शनि दोष और भय से राहत की आध्यात्मिक दिशा प्राप्त कर सकते हैं।