🌿 दुर्लभ अधिक मास पूर्णिमा: पितृ पक्ष के समान पितृ शांति के लिए अत्यंत पवित्र समय
सनातन धर्म में पितृ पक्ष को पितरों के लिए पूजा, तर्पण और श्राद्ध करने का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसी प्रकार लगभग 8 वर्षों बाद आने वाली दुर्लभ अधिक मास पूर्णिमा को भी पितृ शांति, पितरों के आशीर्वाद और पितृ कर्मों से राहत के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग में समय-समय पर आने वाला एक अतिरिक्त पवित्र महीना है, जो चंद्र और सूर्य गणना के संतुलन के लिए आता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु ने इस मास को अपनी दिव्य कृपा से पवित्र बनाया है। इसलिए यह समय पूजा-पाठ, दान, मंत्र जाप और पितरों के लिए किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि अधिक मास में किए गए पितृ शांति अनुष्ठान विशेष फलदायी होते हैं और उनका प्रभाव पितृ पक्ष के समान माना जाता है।
🌿 पितरों की शांति हेतु गया त्रिपिंडी श्राद्ध और पितृ शांति अनुष्ठान
इस दुर्लभ अधिक मास पूर्णिमा पर गया में त्रिपिंडी श्राद्ध, पिंडदान, तिल तर्पणम् और कौवा सेवा सहित पितृ शांति महापूजा का आयोजन किया जा रहा है। यह पवित्र अनुष्ठान पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए किया जाता है। सनातन परंपरा में त्रिपिंडी श्राद्ध को पितृ कर्मों की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, विशेष रूप से उन पितरों के लिए जिनकी इच्छाएं अधूरी रह गई हों या जिनकी आत्मा को शांति प्राप्त न हुई हो। वहीं पिंडदान और तिल तर्पणम् को पितरों की आत्मा की शांति और संतुष्टि का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। कौवा सेवा का भी विशेष महत्व है क्योंकि सनातन धर्म में कौवे को पितृ ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए ये अनुष्ठान पितृ दोष और पारिवारिक बाधाओं को कम करने में सहायक होते हैं तथा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग खोलते हैं।
🌿 पितृ कर्मों के लिए गया क्यों माना जाता है इतना पवित्र?
गया को सनातन धर्म में पितृ कर्मों के लिए सबसे पवित्र और प्रभावशाली तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि गया में किए गए पिंडदान और तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचते हैं और उन्हें दिव्य शांति प्रदान करते हैं। पितृ पूजा और श्राद्ध से जुड़े अपने विशेष महत्व के कारण देशभर से श्रद्धालु गया पहुंचकर अपने पितरों के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करते हैं।
मान्यता है कि अधिक मास पूर्णिमा जैसे अत्यंत पवित्र समय में गया में किए गए पितृ अनुष्ठान और भी अधिक प्रभावशाली माने जाते हैं तथा पितृ कर्मों से राहत और पितरों के आशीर्वाद की प्राप्ति में सहायक होते हैं।
🌿 पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने और पितृ कर्मों से राहत पाने का दुर्लभ अवसर
लगभग 8 वर्षों बाद आने वाली यह दुर्लभ अधिक मास पूर्णिमा अपने पितरों को स्मरण करने, उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का अत्यंत शुभ अवसर मानी जाती है। मान्यता है कि इस पितृ शांति महापूजा में भाग लेने से पितृ कर्मों से राहत मिलती है, परिवार की बाधाएं कम होती हैं और जीवन में मानसिक शांति, संतुलन और सकारात्मकता आती है।
🙏 श्री मंदिर द्वारा आयोजित इस पवित्र अनुष्ठान के माध्यम से श्रद्धालु अपने पितरों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और जीवन में सुख-शांति तथा पितरों की कृपा प्राप्त करने का आशीर्वाद मांग सकते हैं।