ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे योग बनते हैं जिनका प्रभाव जीवन पर गहरा पड़ता है। उन्हीं में से एक है अंगारक योग। अंगारक योग कुंडली में मंगल और राहु की युति से बनने वाला एक अशुभ और नकारात्मक योग है, जिसे 'अंगारक दोष' भी कहते हैं। यह मंगल की अग्नि को राहु की वायु से भड़काकर क्रोध, दुर्घटना, विवाद, सर्जरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं पैदा करता है।
राहु और मंगल, इन दोनों ग्रहों की ऊर्जा बहुत तेज मानी जाती है, इसलिए जब इनका प्रभाव असंतुलित हो जाता है तो व्यक्ति को अचानक परेशानियाँ, मानसिक तनाव, विवाद या कानूनी उलझनों का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण मंगलवार के दिन राहु नक्षत्र का संयोग होने पर अंगारक दोष से बचाव के उपाय करना बहुत ही महत्वपूर्ण और फलदायी माना जाता है। इस मंगलावर राहु का नक्षत्र - शतभिषा नक्षत्र है। अतः इस दौरान विशेष पूजा विधि के जरिए आप अचनाक होने वाली दुर्घटनाओं और परेशानियों से बच सकते हैं।
मंगलवार का संबंध मंगल देव से है, जो साहस, शक्ति और रक्षा के प्रतीक माने जाते हैं। वहीं राहु को कर्मों के परिणाम और अचानक होने वाली परिस्थितियों से जोड़ा जाता है। जब इन दोनों ग्रहों की शांति के लिए एक साथ मंत्र जाप किया जाता है, तो जीवन में संतुलन और सुरक्षा का भाव बढ़ता है। इस अंगारक योग के विशेष अवसर पर 18,000 राहु मूल मंत्र जाप और 7,000 मंगल मूल मंत्र का जाप किया जाएगा। वैदिक मंत्रों की शक्ति मन और वातावरण दोनों को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। जब इतने बड़े स्तर पर मंत्रों का जाप किया जाता है, तो माना जाता है कि ग्रहों के कठिन प्रभाव धीरे-धीरे शांत होने लगते हैं।
अंगारक योग विशेष इस पूजा का उद्देश्य केवल ग्रह शांति ही नहीं है, बल्कि जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का भाव बढ़ाना भी है। जब भक्त पूरे विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है और मंत्र जाप करवाता है, तो उसके मन में आशा और आत्मविश्वास बढ़ता है। यही सकारात्मक ऊर्जा आगे चलकर जीवन के कई रास्तों को आसान बना देती है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस पूजा में राहु और मंगल दोनों की कृपा पाने की प्रार्थना की जाएगी ताकि जीवन में आने वाली अनचाही बाधाएँ कम हों और व्यक्ति अपने कार्यों में आगे बढ़ सके। जो लोग अचानक होने वाली परेशानियों, विवादों या कानूनी मामलों से चिंतित रहते हैं, उनके लिए यह पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।