🌿 सावन का सोमवार और एकादशी का दुर्लभ संयोग — त्रिदेवों की कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर ✨🔱
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने में की गई पूजा, ध्यान और विशेष रूप से रुद्राभिषेक, भक्तों को मानसिक शांति, मार्गदर्शन और आत्मिक स्थिरता प्रदान करता है। खासकर सोमवार के दिन भगवान शिव को जल, दूध और पवित्र द्रव्यों से अभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि यह दिन स्वयं शिव को समर्पित होता है। इस वर्ष सावन का दूसरा सोमवार एक और अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि एकादशी के साथ आ रहा है। यह दुर्लभ संयोग न केवल भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर है, बल्कि भगवान विष्णु से जुड़ी आध्यात्मिक ऊर्जा को भी जाग्रत करता है। ऐसी तिथियों पर की गई पूजा और साधना से जीवन में नई स्पष्टता, संतुलन और आंतरिक शक्ति का संचार होता है।
इसी विशेष संयोग पर त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समर्पित एक दिव्य अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। यह भारत का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां त्रिदेवों की एक साथ पूजा होती है। गोदावरी नदी के उद्गम पर स्थित यह स्थान पितृ शांति, कर्म शुद्धि और जीवन के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इस आयोजन में रुद्राभिषेक के लिए विशेष रूप से पवित्र द्रव्यों का प्रयोग किया जाएगा जैसे गंगाजल, गोदावरी जल, पंचामृत, बिल्वपत्र, भस्म और कमल पुष्प। साथ ही एक संकल्प यज्ञ भी सम्पन्न होगा, जिसमें त्रिदेवों से जुड़ी समर्पण सामग्रियाँ जैसे गोदावरी की लकड़ी, हल्दी की गांठ, दूर्वा और अक्षत अर्पित की जाएंगी।
यह अनुष्ठान उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो जीवन में इच्छाओं की पूर्ति, आर्थिक स्थिरता या मानसिक स्पष्टता की तलाश में हैं। यह पूजा जीवन को भीतर से संतुलित करने, संकल्पों को सशक्त करने और साधना को नई दिशा देने का एक सशक्त माध्यम बन सकती है। श्री मंदिर के माध्यम से आयोजित इस विशेष रुद्राभिषेक में भाग लेकर आप भी सावन के इस दुर्लभ संयोग पर त्रिदेवों की संयुक्त कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं।