हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस समय की गई पूजाओं से सभी देवी-देवता जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान करते हैं। नवरात्रि के दौरान अष्टमी को देवी पूजा करने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है, जिसमें बुरी शक्तियों से सर्वोच्च सुरक्षा और दुश्मनों पर विजय के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर पृथ्वी को बुरी शक्तियों से बचाया था और दुश्मनों पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए इस दिन को दुर्गाष्टमी या महा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि की महा अष्टमी पर त्रिदेवियों की पूजा का भी बहुत महत्व है। शास्त्रों में देवी वाराही को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और इन्हें चौंसठ योगिनियों में 28 वां स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि लक्ष्मी जहां धन प्रदान करती हैं, वहीं वाराही देवी दुर्भाग्य को दूर करती हैं। इतना ही नहीं श्री वाराही देवी को दंडिनी भी कहा जाता है, जो देवी चंडिका या दुर्गा की सेनापति हैं। कहा जाता है कि वाराही देवी दिव्य श्री चक्रम के 16 वें प्रकारम में निवास करती हैं। इन्हें सप्त मातृकाओं में भी विशेष स्थान प्राप्त है। सप्त मातृका, अर्थात सात माताएं, जैसे: ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, महेंद्री और चामुंडी। इन्हें पंचमी भी कहा जाता है क्योंकि इनका नाम सप्तमातृकाओं में पांचवें स्थान पर आता है।
देवी महात्म्य के अनुसार, देवी दुर्गा अपने स्वयं के भीतर से मातृकाओं का निर्माण करती हैं जो राक्षसों के खिलाफ युद्ध में उनका नेतृत्व करती हैं। देवी वाराही का रूप श्यामवर्ण एवं उग्र माना गया है, क्योंकि इन्होनें शुंभ-निशुंभ एवं रक्तबीज जैसे दैत्यों को मारने में देवी दुर्गा की सहायता की थी। मान्यता है कि नवरात्रि के शुभ अवसर पर देवी वाराही की पूजा करने से भौतिक सुख-सुविधा, बाधाओं से मुक्ति के साथ संपत्ति से जुड़े विवादों से निजात पाया जा सकता है। यही कारण है कि प्राचीन काल में राजा अपने राज्य में धन-संपत्ति के लिए देवी वाराही की पूजा करते थे। देवी की पूजा के लिए उनके मूल मंत्र का जाप और हवन करना अत्यंत लाभकारी होता है। साथ ही ऋग्वेद में कहा गया है कि देवी लक्ष्मी और उनके स्वरूपों को प्रसन्न करने के लिए 'श्री सूक्तम हवन' करने पर जीवन से दरिद्रता एवं आर्थिक कष्ट दूर हो सकते हैं। इसलिए नवरात्रि महाअष्टमी पर, श्री मंदिर द्वारा उत्तराखंड के शक्तिपीठ श्री वाराही देवी मंदिर में 11,000 वाराही मूल मंत्र जाप, श्री सूक्तम और वाराही हवन का आयोजन किया जा रहा है। इसलिए शत्रुओं पर विजय एवं संपत्ति विवाद से मुक्ति पाने के लिए इस शुभ दिन पर होने वाले इस विशेष महानुष्ठान में भाग लें।