सावन का महीना हिंदू धर्म में सबसे पवित्र महीनों में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस महीने भगवान शिव की पूजा करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। भगवान भोलेनाथ की पूजा कई प्रकार से की जाती है और उनका रुद्राभिषेक बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि रुद्राभिषेक के माध्यम से शिव को प्रसन्न करने से असंभव को संभव करने की शक्ति प्राप्त हो सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक करने से प्राप्त होने वाला आशीर्वाद पूरे वर्ष भगवान शिव की पूजा करने से प्राप्त होने वाले आशीर्वाद के बराबर होता है।
इसी तरह सावन के अंतिम सोमवार को चार प्रहर की पूजा करना अत्यधिक शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इन चार प्रहर के दौरान महा अभिषेक पूजा करने से भक्तों को अच्छा स्वास्थ्य, वैवाहिक सुख, आर्थिक समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है। ये चार प्रहर धर्म (धार्मिकता), अर्थ (धन), काम (इच्छाएं) और मोक्ष (मुक्ति) के प्रतीक हैं।
👉प्रथम प्रहर, जिसे प्रदोष काल के रूप में जाना जाता है, शाम लगभग 6:00 बजे शुरू होकर लगभग 8:00 बजे समाप्त होगा। इस दौरान भगवान शिव का भस्म और गंगाजल से विशेष अभिषेक किया जाएगा।
👉दूसरा प्रहर रात लगभग 9:00 बजे शुरू होकर लगभग 11:00 बजे समाप्त होगा। इस दौरान भगवान शिव का दूध और भांग से विशेष अभिषेक किया जाएगा।
👉तीसरा प्रहर रात लगभग 1:00 बजे शुरू होकर 3:00 बजे समाप्त होगा। इस दौरान विशेष अभिषेक के लिए गन्ने के रस और शहद का उपयोग किया जाएगा।
👉चौथे और अंतिम प्रहर की पूजा ब्रह्म मुहूर्त (हिंदू शास्त्रों के अनुसार सबसे शुभ समय) में सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे तक होगी, जिसमें भगवान शिव की यह महा अभिषेक पूजा षोडशोपचार अभिषेक के साथ संपन्न होगी, जिसमें 11 फलों के रस और पंचामृत (दूध, दही, शहद, चीनी और घी का मिश्रण) शामिल होगा।
यह 4 प्रहर महा अभिषेक पूजा भगवान शिव की नगरी काशी में, शुभ सावन के अंतिम सोमवार को आयोजित की जाएगी और इसे करने का अवसर एक वर्ष बाद फिर से आएगा। श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष पूजा में भाग लें और भगवान शिव की कृपा से शारीरिक और मानसिक कल्याण प्राप्त करें।