कई बार जीवन में ऐसा समय आता है जब व्यक्ति पूरी कोशिश करता है, फिर भी उसका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। मन काम में नहीं लगता, फैसलों को लेकर भ्रम बना रहता है और आगे का रास्ता साफ दिखाई नहीं देता। करियर में रुकावटें आने लगती हैं और भीतर बेचैनी महसूस होती है। ऐसे समय में व्यक्ति को ऐसे सहारे की जरूरत होती है जो उसे अंदर से मजबूत बना सके।
इसी कारण सनातन परंपरा में रविवार को सूर्य देव की उपासना को विशेष महत्व दिया गया है। सूर्य देव को जीवन की ऊर्जा और आत्मबल का स्रोत माना जाता है। जब सूर्य की कृपा मिलती है, तो व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ने लगता है और विचारों में स्पष्टता आती है।
रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से यह ऊर्जा जागृत होती है। इससे मन और शरीर स्थिर होते हैं और रुके हुए कामों में आगे बढ़ने में सहायता मिलती है। लेकिन कई बार समस्या केवल आत्मबल की कमी तक सीमित नहीं रहती। राहु और केतु जैसे छाया ग्रह भ्रम, अनजाना भय और अचानक आने वाली बाधाओं को बढ़ा देते हैं। विशेष रूप से राहु के प्रभाव में मानसिक अस्थिरता और दिशा की कमी महसूस होती है।
यह रविवार इसलिए और भी खास है क्योंकि इस दिन स्वाति नक्षत्र का संयोग है। ऐसे समय में राहु-केतु शांति पूजा करना जरूरी माना जाता है, ताकि ग्रहों से उत्पन्न असंतुलन शांत हो सके। जब रविवार को सूर्य उपासना और राहु-केतु शांति पूजा एक साथ की जाती है, तो जीवन में ऊर्जा और संतुलन दोनों का संयोग बनता है। सूर्य देव आत्मविश्वास और दिशा देते हैं, वहीं राहु-केतु शांति से मन का भ्रम और बाधाएं धीरे-धीरे शांत होती हैं। इस संयुक्त साधना से व्यक्ति को भीतर से स्थिरता और सुरक्षा का अनुभव होता है।
इसी भावना के साथ जयपुर के पवित्र गलता जी मंदिर और उत्तराखंड के राहु पैठाणी मंदिर में सूर्य देव को समर्पित 11 आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ और राहु-केतु शांति पूजा का विशेष आयोजन किया जा रहा है। यदि आप भी अपने जीवन में स्पष्टता, आत्मबल और स्थिरता चाहते हैं, तो श्री मंदिर के माध्यम से इस पावन अनुष्ठान में भाग लेकर सूर्य देव की कृपा और ग्रह शांति का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।