🌿 सावन के तीन सोमवार पर होने जा रहा है ओंकारेश्वर एवं घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग में विशेष रुद्राभिषेक
🔱 आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक बाधाओं से राहत के लिए एक पवित्र शिव साधना का अवसर
सनातन परंपरा में भगवान शिव को सृष्टि के संहारक नहीं, बल्कि संतुलन और करुणा के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उन्हें “भोलेनाथ” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे सरल श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों के संकट हर लेते हैं। रुद्राभिषेक, भगवान शिव को प्रसन्न करने की सबसे प्रभावशाली विधियों में से एक माना गया है। वेदों और पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है, जहाँ जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पवित्र द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक कर उन्हें शांत और कृपालु बनाया जाता है।
विशेषकर सावन के महीने और सावन के सोमवारों को भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ समय माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में की गई शिव पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। इस समय में रुद्राभिषेक करने से जीवन की कठिनाइयाँ धीरे-धीरे शांत होती हैं और व्यक्ति को मानसिक स्थिरता, आर्थिक संतुलन और आत्मिक शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी दिव्य कृपा की प्राप्ति के लिए श्री मंदिर द्वारा सावन के अगले 3 सोमवार को दो पवित्र ज्योतिर्लिंगों – ओंकारेश्वर और घृष्णेश्वर – पर विशेष रुद्राभिषेक अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है।
🔱 क्यों महत्वपूर्ण हैं ये दोनों ज्योतिर्लिंग? 🔱
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्यप्रदेश) – नर्मदा तट पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग "ॐ" के आकार वाले पर्वत पर विराजमान है। स्कंद पुराण में वर्णित है कि यहाँ रुद्र रूप शिव का ध्यान करने मात्र से जीवन की शारीरिक, मानसिक और सांसारिक पीड़ाएँ शांत होती हैं।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र) – यह बारहवाँ और अंतिम ज्योतिर्लिंग है, जो शिव और शक्ति की संयुक्त ऊर्जा का स्थान माना जाता है। यह स्थल विशेष रूप से पारिवारिक कलह, रोग, असफलता और जीवन में बार-बार आने वाली रुकावटों से मुक्ति के लिए पूजित है।
इस सावन, आप भी इन पवित्र स्थलों पर होने वाले सोमवार के रुद्राभिषेक अनुष्ठान में सहभागी बनें और भगवान शिव की कृपा से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, आर्थिक स्थिरता और आंतरिक संतुलन का अनुभव करें।