पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा

पितृ पक्ष सप्तमी मोक्षपुरी अयोध्या संपूर्ण पितृ शांति सेवा

सप्त मोक्ष पुरियों में शामिल अयोध्या कोई साधारण पितृ भूमि नहीं है - यह वह भूमि है जिसे पितृ देव विष्णु ने स्वयं अपने राम अवतार में इसे कर्मभूमि चुनी। यहाँ के सरयू ने राम के जन्म से लेकर उनकी पितृ भक्ति देखी और श्री राम की पृथ्वी से स्वर्ग तक की अंतिम यात्रा जल समाधि देखी। जो स्थान ऐसी पितृ भक्ति की साक्षी रही है - वहाँ अपने पितरों के लिए श्राद्ध कार्य करने का अर्थ है - उनके लिए स्वयं विष्णु एवं श्री राम कृपा से वैकुण्ठ के द्वार खोलना।
🏙️ मोक्षपुरी अयोध्या - सात मोक्ष-नगरियों में सर्वप्रथम:
हिन्दू पुराणों में प्रसिद्ध श्लोक: "अयोध्या-मथुरामायाकाशीकांचीत्वन्तिका, पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिकाः।" सात मोक्ष-नगरियों में अयोध्या का नाम सर्वप्रथम है, अथर्ववेद में अयोध्या को 'ईश्वर का नगर' कहा गया है। स्कंद पुराण, अयोध्या महात्म्य: "जैसे काशी गंगा से पवित्र है, वैसे अयोध्या सरयू से। जो सरयू में स्नान करे - वह जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त।" पद्म पुराण: "सरयू-स्नान = 100 अश्वमेध यज्ञों का पुण्य।" जब यह नगरी स्वयं मोक्षदायिका है, यहाँ किया पितृ कर्म मोक्षपुरी की शक्ति से शताधिक गुना फलदायी होता है।
🏯प्राचीन राजद्वार मंदिर - वह द्वार जो राम का राजमहल है:
राम की अपनी गृहभूमि में पितृ-कर्म का संकल्प - जिस द्वार से राम स्वयं आते-जाते थे, उस द्वार पर खड़े होकर राम से पितरों की मुक्ति माँगना - राम सुनते हैं।"
🌊 सरयू - मनसपुत्री: ब्रह्मा के मन से उत्पन्न, विष्णु-कृपा से सिंचित:
विष्णु पुराण में वर्णित है - सरयू नदी की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के उस मन से हुई जब वे भगवान विष्णु का ध्यान कर रहे थे। 'मनसपुत्री' = ब्रह्मा के दिव्य ध्यान से उत्पन्न। यही कारण है कि सरयू स्वयंभू तीर्थ है, उसमें विष्णु-कृपा प्रवाहित होती है। इसी में राम ने अंतिम जल-समाधि भी ली। ऐसे में उस दिव्य नदी में जो चेतना प्रकट हुई - वह आज भी विद्यमान है। उसी नदी में आपके पितरों का तर्पण करें = उन्हें साक्षात वैकुण्ठ में स्थान दिलाएं।
🙏 पितृ पक्ष सप्तमी पर सात मोक्षपुरियों की प्रथम नगरी में राम की पितृ-भक्ति की भूमि पर। अपने पितरों के लिए संपूर्ण पितृ शांति सेवा करें - अभी भाग लें!
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
srimandir devotees
अब तक1,50,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा संचालित चढ़ावा सेवा में भाग ले चुके है।
अपनी सेवा चुनें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook