पितृ पक्ष की 6 श्रेष्ठ तिथियों प्रतिपदा, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी एवं महालया अमावस्या पर 6 महा मोक्षतीर्थों की भूमि पर आपके पितरों के लिए दीपदान! हर दीप आपके पितरों के लिए मोक्ष-पथ पर प्रकाश-स्तम्भ है।
यह दीपदान क्यों? - यहीं पितरों के लिए उनके मोक्ष मार्ग में प्रकाश है
गरुड़ पुराण हमें वह सत्य बताता है जो अधिकांश लोग नहीं जानते - मृत्यु के पश्चात् आत्मा अन्धकार में भटकती है। वह पथ जो पितरों को पितृलोक से मोक्ष की ओर जाता है, वह जलती रेत पर, उपद्रवी हवाओं के बीच, सूर्य की तपिश में बिना जल के गुज़रता है। किन्तु जब उनका कोई वंशज उनके नाम से दीप जलाता है. गरुड़ पुराण का वचन है - 'उस पतित आत्मा को आशा मिलती है कि उसे भुलाया नहीं गया।' महाभारत का वह प्राचीन प्रमाण है, जब पांडवों और द्रौपदी ने कुरुक्षेत्र के शहीदों के लिए 'आकाश-दीप' जलाए - यही दीपदान परम्परा का सर्वप्रथम उल्लेख है।
6 तिथि - 6 मोक्ष तीर्थ: 6 कारण जो इस संकल्प को अतुलनीय बनाते हैं
प्रतिपदा को त्रिवेणी क्योंकि पितर अभी-अभी पृथ्वी पर आए हैं और तीर्थराज का पहला दीप उनका स्वागत करता है। अष्टमी को गोकर्ण - क्योंकि जब चाँद आधा हो जाता है, शिव के आत्मलिंग की भूमि पर जलता दीप उस आधे अंधेरे में मार्ग दिखाता है। नवमी को बिन्दु सरोवर, क्योंकि नवमी = मातृ नवमी और माँ के लिए एक अलग दीप जलाना = संसार का सबसे गहरा प्रेम-अर्पण।
दशमी को रामेश्वरम् क्योंकि राम ने स्वयं इस भूमि पर श्राद्ध किया था, उनकी पितृ-भक्ति की ज्योति आज भी यहाँ जलती है। एकादशी को हरिद्वार, क्योंकि यह विष्णु का वार है और हरिद्वार = हरि का द्वार - यहाँ जलता दीप देवलोक से उतरती गंगा के साथ पितृलोक तक पहुँचता है। अमावस्या को फल्गु, गया - क्योंकि यह सबसे अंधेरी रात है, और गरुड़ पुराण का वचन है, 'फल्गु नदी में एक पिंड-दान सात पीढ़ियों को मोक्ष देता है।' वह नदी जो स्वयं विष्णु का स्वरूप है - उस पर अमावस्या का दीप = पूरे पितृ पक्ष का अंतिम और सर्वाधिक आवश्यक प्रकाश।
घर बैठे करें 6 मोक्ष तीर्थ सर्वपितृ दीपदान संकल्प - श्री मंदिर के माध्यम से!
प्रयागराज से गोकर्ण से गुजरात से रामेश्वरम् से हरिद्वार से गया - 6 अलग-अलग राज्यों में, 6 अलग-अलग दिनों पर यह यात्रा किसी भी परिवार के लिए सम्भव नहीं है। श्री मंदिर के माध्यम से आप - संसार में कहीं से भी एक बार संकल्प लेकर इन 6 तीर्थों पर 6 तिथियों पर दीप जलवा सकते हैं। प्रत्येक तीर्थ के प्रमाणित वैदिक पुरोहित आपके नाम का संकल्प लेकर निर्धारित तिथि पर आपके पितरों के लिए दीपदान सम्पन्न कराएंगे। प्रत्येक दीपदान का वीडियो प्रमाण 24 से 48 घंटों में आप तक पहुँचाया जाएगा।