गंगा, संगम, काशी और गया - सब धामों में पहुँचेगी आपकी सेवा और लौटेगी सौभाग्य बनकर! वैशाख पूर्णिमा पर शर्बत एवं ब्राह्मण अन्न सेवा कर पितृ शांति एवं सुख-समृद्धि का आशीष पाएं।
📙 स्कंद पुराण के अनुसार, वैशाख मास के अधिष्ठाता स्वयं भगवान मधुसूदन हैं। इस भीषण गर्मी में जब सूर्य अपने प्रचंड वेग पर होता है, तब प्यासे को शीतल जल और भूखे को अन्न खिलाना केवल मानवता नहीं, बल्कि साक्षात् विष्णु की सेवा है। शास्त्रों का मत है कि वैशाख पूर्णिमा पर की गई सेवा एक सामान्य पुण्य नहीं, बल्कि राजसूय यज्ञ के समान चक्रवर्ती फल प्रदान करती है।
🌊 4 महा-तीर्थ: जहाँ हर सेवा से प्राप्त होती है हरि की अमोघ कृपा
🔸 गंगा घाट: मोक्षदायिनी माँ गंगा के घाट पर की गई शीतल शरबत सेवा आपके जन्मों के संताप को शांत करती है।
🔸 अस्सी घाट: महादेव की नगरी में मधुसूदन के निमित्त अन्न सेवा अकाल मृत्यु के भय को मिटाती है।
🔸 त्रिवेणी संगम: तीर्थराज के संगम पर की गई सेवा कुंडली के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की शक्ति रखती है।
🔸 धर्मारण्य वेदी: वायु पुराण के अनुसार, गया में विष्णुजी के सानिध्य में ब्राह्मण को खिलाया गया अन्न सीधे पितरों के मुख तक पहुँचता है। यह पितृ-ऋण से मुक्ति का महा-द्वार है।
वैशाख की यह पूर्णिमा आपके पास अवसर बनकर आई है। गंगा के इन पावन घाटों पर आपकी ओर से वितरण किया गया शरबत और ब्राह्मणों को कराया गया भोजन, आपके कुल के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
⚡अवसर सीमित है! गंगा की लहरों और गया की पावन वेदी पर अपने नाम से सेवा बुक करें। याद रखें, जो मधुसूदन को शीतल अर्पण करता है, उसका जीवन स्वयं प्रभु सुखद बना देते हैं।
⚠️ इस सेवा में आप जो भी बुक करते हैं, वह केवल आपकी सेवा नहीं होती - आपकी भागीदारी हमें इस पुण्य कार्य को और अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करती है। यह योगदान किसी एक की नहीं, बल्कि एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है।







"हम एक लाभकारी (For-Profit) तकनीकी कंपनी हैं, जो मंदिरों एवं/या पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं (जैसे NGOs, सेक्शन 8 कंपनियाँ एवं ट्रस्ट्स) के लिए स्वैच्छिक दान के संग्रह और वितरण की प्रक्रिया को सुगम बनाती है। हम अपनी सेवाओं के लिए एक मामूली सेवा/प्रोसेसिंग शुल्क (यदि लागू हो) लेते हैं, और सभी लेन-देन पूर्णतः सुरक्षित एवं पारदर्शी होते हैं। हमारी भूमिका केवल दानकर्ताओं और दान प्राप्त करने वाली संस्थाओं के बीच सुरक्षित एवं पारदर्शी लेन-देन को सक्षम बनाने तक सीमित है। हम FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के अंतर्गत अनुमति के बिना किसी भी विदेशी अंशदान को न तो आमंत्रित करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं।"
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