🚩उस पावन भूमि पर अपना चढ़ावा अर्पित करें- जहाँ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मकांड से अधिक भक्तों के प्रेम और भक्ति से अर्पित भोजन को स्वीकार किया था। श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर बालकृष्ण के श्री भतरौंड बिहारी जी के स्वरूप को अपने नाम से अर्पण दें।
⏳द्वापर युग में श्री कृष्ण और बलराम अपने सखाओं के साथ इसी अशोक वन में गोचारण कर रहे थे। सखाओं को भूख लगी। समीप ही विद्वान ब्राह्मण 'अंगिरस यज्ञ' संपन्न कर रहे थे। कृष्ण ने सखाओं को भेजा - उनसे भोजन माँगने।किन्तु वे वेद-पारंगत ब्राह्मण यज्ञ-नियम की आड़ में मौन रहे। उन्होंने परब्रह्म कृष्ण को एक साधारण ग्वाले की तरह अस्वीकार कर दिया।
🦚तब कृष्ण ने कहा "उनकी पत्नियों के पास जाओ।" सखाओं ने जैसे ही उन गृहिणियों के द्वार पर कृष्ण-बलराम का नाम लिया वे व्याकुल हो उठीं। विविध पकवानों से भरी थालियाँ लेकर वे ऐसे दौड़ीं और इसी भतरौंड की भूमि पर कृष्ण ने वह प्रेम-भरा दाल-भात और दही-भात सखाओं सहित हर्षपूर्वक स्वीकार किया और उद्घोषणा की: "आज से यह स्थान भतरौंड बिहारी के नाम से जाना जाएगा।"
🛕कृष्ण ने यहाँ वह सत्य भी घोषित किया जो आज भी अमर है:
📜श्रीमद्भागवत 10.23.33 में श्री कृष्ण ने यज्ञ-पत्नियों से कहा "श्रवणाद् दर्शनाद् ध्यानान् मयि भावोऽनुकीर्तनात्" श्रवण, दर्शन, ध्यान और कीर्तन से मुझसे प्रेम उत्पन्न होता है, विधि-विधान से नहीं, यज्ञ-सामग्री से नहीं, केवल शुद्ध भाव से। विद्वान ब्राह्मणों का महायज्ञ ठुकराया - यज्ञ-पत्नियों की सरल थाल स्वीकार की। जन्माष्टमी पर इस भूमि पर चढ़ावा देना - उसी स्वीकृति का भागीदार बनना है, जिसे स्वयं कृष्ण ने स्वीकारा था।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे वृन्दावन के इस छुपे हुए धाम में सेवा:
वृन्दावन के इस छुपे हुए धाम भतरौंड तक पहुँचना प्रत्येक भक्त के लिए सम्भव नहीं। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम से श्री भतरौंड बिहारी जी के चरणों में वैदिक पुरोहितों द्वारा चढ़ावा अर्पित करवा सकते हैं। जन्माष्टमी के सिद्ध मुहूर्त में यह सेवा सम्पन्न की जाएगी - जिसका वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🌟अपने जन्मोत्सव पर श्री कृष्ण अपने हर भक्त की सेवा को ठीक वैसे ही स्वीकार करते हैं - जैसे उन्होंने यज्ञ पत्नियों की सेवा को स्वीकारा था। ऐसे में बिना समय व्यर्थ किए अपनी भक्ति को श्री चरणों में अर्पित करें - अभी चढ़वा एहटू अपना नाम, दर्ज करें।