पितृ पक्ष मोक्ष पुरी हरिद्वार 101 किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष मोक्ष पुरी हरिद्वार 101 किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष मोक्ष पुरी हरिद्वार 101 किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष मोक्ष पुरी हरिद्वार 101 किलो खिचड़ी भोजन सेवा
पितृ पक्ष मोक्ष पुरी हरिद्वार 101 किलो खिचड़ी भोजन सेवा
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पितृ पक्ष मोक्ष पुरी हरिद्वार 101 किलो खिचड़ी भोजन सेवा

पितृ पक्ष मोक्ष पुरी हरिद्वार 101 किलो खिचड़ी भोजन सेवा

हरिद्वार में, जहाँ माँ गंगा ने पहली बार धरती को स्पर्श किया और एक पुत्र की अटूट भक्ति से 60,000 आत्माओं को मुक्ति मिली, वहाँ 101 किलो खिचड़ी महा सेवा की जाएगी।
पितृ पक्ष केवल किसी के चले जाने का स्मरण नहीं है। यह उस रिश्ते के निरंतर बने रहने का अवसर है। आपके पूर्वज देह त्यागने के बाद भी आपके अपने ही रहते हैं। आपके जीवन में बहते आशीर्वाद, आपके सामने खुलते रास्ते और वह सुरक्षा, जिसे आपने शायद कभी जाने बिना महसूस किया है, इन सबके पीछे उनका स्नेह और आशीर्वाद माना जाता है। ये 16 दिन आपको उनकी ओर उसी तरह मुड़ने का अवसर देते हैं, जैसे वे हमेशा आपकी ओर मुड़ते थे, और उनके नाम से किसी पवित्र भूमि पर अर्पण करने का अवसर प्रदान करते हैं।

पितृ पक्ष क्यों मनाया जाता है: अतृप्त भूख की कथा
कर्ण ने संसार को सोना, आभूषण और भूमि का दान दिया, लेकिन अपने पूर्वजों को कभी अन्न और जल अर्पित नहीं किया। जब वे स्वर्ग पहुँचे, तो इंद्र ने उनके सामने भव्य भोजन परोसा। थाली में रखा सब कुछ सोने का था और पात्रों में रखा सब कुछ चाँदी का, लेकिन उसमें खाने योग्य कुछ भी नहीं था। इंद्र ने कर्ण से कहा कि उन्होंने सभी को दिया, लेकिन अपने पूर्वजों को नहीं। तब इंद्र ने कर्ण को 16 दिनों के लिए पृथ्वी पर लौटकर वह अर्पित करने का अवसर दिया, जिसे वे भूल गए थे। यही 16 दिन आगे चलकर पितृ पक्ष कहलाए, हर वर्ष आने वाले वे 16 दिन, जब धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ लोक के द्वार खुलते हैं और वंशजों को वह अर्पित करने का अवसर मिलता है, जो कर्ण नहीं कर पाए थे।

101 किलो खिचड़ी क्यों?
मनुस्मृति के अनुसार, पूर्वजों तक भोजन अपने मूल रूप में नहीं, बल्कि उसके सूक्ष्म सार- काव्य के रूप में पहुँचता है, जो भोजन ग्रहण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के माध्यम से अर्पित होता है। आपके पूर्वजों के नाम से 101 लोगों को प्रसाद ग्रहण कराना, एक ही महा सेवा के माध्यम से काव्य के 101 माध्यमों को पितृ लोक तक पहुँचाने का प्रतीक है। खिचड़ी सात्त्विक और संपूर्ण अर्पण मानी जाती है, वही अन्न, जो कर्ण को अपने पूर्वजों को अर्पित करना चाहिए था और जिसे यह सेवा आपके पूर्वजों के नाम से अर्पित करती है।

हरिद्वार में यह महा सेवा क्यों करें?
राजा भगीरथ ने हजारों वर्षों तक तपस्या की। उनके पूर्वजों तक माँ गंगा को पहुँचाने की उनकी भक्ति इतनी अटूट थी कि वे उन्हें मुक्ति दिलाए बिना रुकने को तैयार नहीं थे। उनकी इसी भक्ति के फलस्वरूप माँ गंगा इस पावन भूमि पर अवतरित हुईं। हरिद्वार वह भूमि है जहाँ एक वंशज का संकल्प और दिव्य कृपा एक साथ आए और 60,000 आत्माओं को मुक्ति प्राप्त हुई। पितृ पक्ष में यहाँ की गई सेवा उसी पावन धरती पर अर्पित होती है, जो सदियों से अर्पण को उसके सही स्थान तक पहुँचाने की साक्षी रही है।

श्री मंदिर ऐप के माध्यम से पितृ पक्ष के दौरान हरिद्वार में आपके नाम से संपूर्ण 101 किलो खिचड़ी अन्न सेवा संपन्न की जाएगी। सेवा का वीडियो आपको 24–48 घंटों के भीतर प्राप्त होगा।
यह बुकिंग एक सामूहिक सेवा का हिस्सा है, जो इसमें सहभागी प्रत्येक व्यक्ति के योगदान से सार्थक बनती है। यह किसी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत अर्पण नहीं, बल्कि एक बड़े और पवित्र उद्देश्य के लिए किया गया साझा योगदान है। इसी सामूहिक अर्पण के माध्यम से हम इस पावन पहल को आगे बढ़ा सकते हैं और अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुँचा सकते हैं।
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