पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा
पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा

पितृ पक्ष श्राद्ध 6 महातिथि पितृ आशीर्वाद गया जी पंचबली सेवा

आपके पितरों की यात्रा केवल एक लोक तक सीमित नहीं मानी जाती। यह पाँचों लोकों से होकर गुजरती है और यदि सेवा केवल एक लोक तक पहुँचे, तो बाकी चार की ज़रूरतें अधूरी रह जाती हैं। पंचबली इसी पूर्णता के लिए की जाने वाली विशेष सेवा है। पितृ पक्ष की 6 महत्वपूर्ण तिथियों पर आपके नाम से गया जी में गो, श्वान, काक, देव और पिपीलिका की सेवा की जाएगी।
पंचबली गया श्राद्ध की पूरी 57 चरणों वाली विधि का 55वाँ चरण है। इसे इस स्थान पर इसलिए रखा गया है क्योंकि यह श्राद्ध को पूर्णता देने वाली सेवा मानी जाती है, जिसमें किसी भी पक्ष या किसी भी जीव की सेवा को अधूरा नहीं छोड़ा जाता।

🔱 पाँच बलियाँ - पाँच लोक, पाँच माध्यम
गोबली - गौ सेवा
कामधेनु को दिव्य माता माना जाता है, जिनमें सभी 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। गोबली केवल गौ सेवा नहीं है, बल्कि ऐसी सेवा है जिसका भाव उन सभी दिव्य शक्तियों तक पहुँचता है, जो पितरों की यात्रा से जुड़ी मानी जाती हैं।
श्वानबली - कुत्ते की सेवा
गरुड़ पुराण में यम के द्वार पर कुत्तों को पितृ लोक की ओर जाने वाले मार्ग का रक्षक बताया गया है। श्वानबली इन रक्षकों के प्रति सेवा का भाव रखती है, ताकि गरुड़ पुराण में वर्णित पितरों की यात्रा उनके सहयोग और सुरक्षा के साथ पूरी हो।
काकबली - कौवा सेवा
कौवे को पितृ-दूत, यानी पितरों का सीधा संदेशवाहक माना जाता है। परंपरा के अनुसार, जब कौवा काकबली को स्वीकार करता है, तो इसे पितरों तक सेवा पहुँचने का संकेत माना जाता है। श्राद्ध में इसे पितरों तक सेवा पहुँचने की सबसे सीधी पुष्टि के रूप में देखा जाता है।
देवादिबली - देव सेवा
पितरों की मुक्ति की यात्रा के अलग-अलग चरणों से देवताओं को जुड़ा माना जाता है। देवादिबली में सभी देव शक्तियों के प्रति एक साथ सेवा का भाव रखा जाता है, ताकि पितरों की आगे की यात्रा में उनका आशीर्वाद और सहयोग बना रहे।
पिपीलिकादिबली - चींटी सेवा
चींटी सृष्टि के सबसे छोटे और आसानी से अनदेखे रह जाने वाले जीवों में से एक है। पिपीलिकादिबली जीव-दया के भाव पर आधारित है, यानी हर जीव के प्रति करुणा रखना। यह सेवा इस भाव को पूरा करती है कि सृष्टि का कोई भी जीव, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, अनदेखा न रहे।

🔱 6 तिथियाँ - हर तिथि क्यों विशेष है?
प्रतिपदा | 27 सितंबर 2026
कृष्ण पक्ष की पहली तिथि, जब मान्यता के अनुसार पितृ चंद्रलोक से अवतरण पूर्ण कर मर्त्य लोक की ओर अपनी यात्रा जारी रखते हैं। गया जी में प्रतिपदा पर की गई ब्राह्मण सेवा इस 15 दिवसीय यात्रा के आरंभ में पितरों की यात्रा के पथ पर रखा गया प्रथम अर्पण मानी जाती है।
अष्टमी | 3 अक्टूबर 2026
अष्टमी पितृ पक्ष के मध्य का पड़ाव है, जब पितरों की यात्रा लगभग आधी पूर्ण मानी जाती है। इस पड़ाव पर गया जी में की गई ब्राह्मण सेवा उस समय पितरों तक पोषण पहुँचाने के संकल्प का प्रतीक है, जब उनकी 15 दिवसीय यात्रा अपने मध्य और निरंतर चरण में होती है।
नवमी | 4 अक्टूबर 2026
मातृ नवमी - वंश की मातृ शक्ति, विशेष रूप से माताओं और मातामहियों के स्मरण के लिए समर्पित तिथि। गया जी में नवमी पर की गई ब्राह्मण सेवा मातृ पक्ष के उन पूर्वजों के लिए विशेष रूप से समर्पित की जाती है, जिनका स्मरण इस विशेष तिथि पर किया जाता है।
दशमी | 5 अक्टूबर 2026
गरुड़ पुराण में दशमी तक पितरों की यात्रा में आने वाले कष्टों का वर्णन मिलता है। इस दिन गया जी में की गई ब्राह्मण सेवा उस पड़ाव पर पितरों तक पोषण और राहत पहुँचाने के संकल्प के रूप में की जाती है, जब शास्त्रीय परंपरा के अनुसार उनकी यात्रा कठिन चरण से गुजरती है।
एकादशी | 6 अक्टूबर 2026
एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित तिथि मानी जाती है और इस दिन किए गए प्रत्येक धार्मिक कर्म में मोक्ष की विशेष भावना जुड़ी होती है। गया जी में एकादशी पर ब्राह्मण सेवा भगवान विष्णु की पावन तिथि और भगवान विष्णु से जुड़े इस पवित्र क्षेत्र, दोनों के संयोग को एक साथ लाती है, जिससे पितरों की मुक्ति के लिए यह सेवा विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है।
सर्वपितृ अमावस्या | 10 अक्टूबर 2026
पितृ पक्ष की पूर्णता की तिथि - वह दिन जब सभी पितरों का, उनकी मृत्यु तिथि चाहे जो भी हो, विशेष रूप से स्मरण और सम्मान किया जाता है। गया जी में सर्वपितृ अमावस्या पर की गई ब्राह्मण सेवा इस संकल्प की अंतिम और पूर्ण सेवा के रूप में संपन्न की जाती है, उस पावन भूमि पर जहाँ भगवान विष्णु की मोक्षदायिनी कृपा को सभी पितरों के लिए चिरस्थायी माना गया है।

श्री मंदिर ऐप के माध्यम से 6 तिथियों पर गया मोक्ष तीर्थ पर पंचबली सेवा की जाएगी। हर सेवा का वीडियो 24 से 48 घंटे के भीतर मिलेगा।
यह बुकिंग एक सामूहिक सेवा का संकल्प है, जिसे इसमें भाग लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता सार्थक बनाती है। यह किसी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत अर्पण न होकर एक साझा योगदान है, जो एक उच्च उद्देश्य के लिए एक साथ आता है। इस सामूहिक सहभागिता के माध्यम से हम इस पवित्र पहल को आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में सक्षम होते हैं।
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