पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 4 मोक्ष तीर्थ पितृ तृप्ति तर्पण
पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 4 मोक्ष तीर्थ पितृ तृप्ति तर्पण
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पितृ पक्ष श्राद्ध पूर्णिमा 4 मोक्ष तीर्थ पितृ तृप्ति तर्पण

गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु कहते हैं: "पितृ पक्ष में जल-तर्पण के बिना पितर तृषित रहते हैं। और पितरों की तृप्ति से ही सन्तान का जीवन सुखमय होता है।" तर्पण शब्द में ही उत्तर निहित है - इसका अर्थ है तृप्त करना, प्यास बुझाना। प्रत्येक पितृ पक्ष में आपके पितर प्रतीक्षा करते हैं - किसी विस्तृत अनुष्ठान की नहीं - केवल एक सरल तर्पण की। उनके नाम से। किसी पवित्र तट पर। उस वंशज के हाथों से जो उन्हें याद करता है।
🌕 पूर्णिमा - पितृ पक्ष का प्रथम और सर्वाधिक प्रकाशमान द्वार
पितृ पक्ष पूर्णिमा वह क्षण है जब पूर्ण चन्द्रमा की अधिकतम शक्ति से पितृ-लोक और भू-लोक के बीच का पर्दा सबसे पतला होता है। गरुड़ पुराण कहता है: "दिने दिने ये प्रतिगृह्णन्ते अर्चां।" पितर प्रतिदिन की अर्चना को ग्रहण करते हैं। पूर्णिमा पर तर्पण = सम्पूर्ण चन्द्र-शक्ति के साथ पितृ-लोक की दूरी सबसे कम होने के क्षण में जलाञ्जलि देना।
🛕4 जागृत पितृ मोक्ष-तीर्थ
गया वह भूमि है जहाँ भगवान विष्णु के चरण-चिह्न हैं। गरुड़ पुराण की घोषणा: यहाँ कुल की इक्कीस पुरुषपर्यन्त पीढ़ियों का उद्धार होता है। गया में तर्पण = नरक-स्थ पितर स्वर्ग पाते हैं, स्वर्ग-स्थ मोक्ष पाते हैं। यहाँ तर्पण का फल अक्षय होता है।
हरिद्वार हरि का द्वार, सप्त मोक्षपुरियों में एक जहाँ गंगा हिमालय की दिव्य ऊँचाइयों से मैदान में उतरती है। यह वह संक्रमण-बिन्दु है जहाँ दिव्य और भौतिक का मिलन होता है। यहाँ तर्पण = देवी गंगा की उस धारा में जो स्वयं भागीरथी है - जो पितरों की मुक्ति के लिए पृथ्वी पर आई।
काशी अविमुक्त क्षेत्र है, जहाँ भगवान शिव ने कभी न छोड़ने की प्रतिज्ञा की। काशी खण्ड में वर्णन है: जो इस नगरी में मृत्यु पाता है, शिव स्वयं उसके कान में तारक मन्त्र फूँकते हैं। काशी में तर्पण = शिव की साक्षी में, मोक्षपुरी की शक्ति से पितरों को शिव की कृपा का स्पर्श।
त्रिवेणी संगम गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का महा-मिलन। यहाँ तर्पण करते समय तीन-तीन जलाञ्जलियाँ दी जाती हैं और यहाँ वे तीनों नदियाँ एकसाथ उस अर्पण को वहन करती हैं। तीन पवित्र धाराएँ- तीन दिशाओं से एक ही संकल्प को पितरों तक पहुँचाती हैं।
🛕घर बैठे करें - श्री मंदिर के माध्यम से
पूर्णिमा पर गया, हरिद्वार, काशी और त्रिवेणी संगम - चारों पर एक ही दिन स्वयं जाकर तर्पण करवाना किसी भी परिवार के लिए सम्भव नहीं है। किन्तु श्री मंदिर के माध्यम से संसार में कहीं से भी आप अपने पितरों के नाम का संकल्प लेकर चारों मोक्ष-तीर्थों पर तिल-जल-कुश सहित विधि-विधान से तर्पण सम्पन्न करवा सकते हैं। प्रत्येक तीर्थ का वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में आपके फोन पर प्राप्त होगा।
16 पवित्र तीर्थ। 16 पवित्र तिथियाँ। केवल श्री मंदिर के साथ!

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