💰धनतेरस - वह रात जब सारा भारत माता लक्ष्मी को घर बुलाता है। परंतु शास्त्र चेतावनी देते हैं कि "ऋणी गृहे लक्ष्मी न तिष्ठति" जिस घर में कर्ज़ का बोझ हो, वहाँ लक्ष्मी का स्थायी वास नहीं होता। यह ऋण चाहे कैसा भी हो - आर्थिक, पैतृक, दैविक या ऋषि ऋण! धनतेरस का असली संदेश है - पहले पुराना ऋण चुकाओ, तभी नए धन आगमन का द्वार खुलता है और लक्ष्मी स्थायी होकर घर में टिकती हैं।
🏡जिस घर में कर्ज़ का अँधेरा हो, उस घर में लक्ष्मी का प्रकाश कभी टिक नहीं पाता। वहाँ माता लक्ष्मी का स्थायी वास नहीं होता। इसीलिए हमारे पूर्वजों ने धनतेरस पर सबसे पहले ऋण मुक्ति का विधान रखा, उसके बाद माँ लक्ष्मी के आगमन का। इस बार ऋणमुक्ति और धन आगमन इन दोनों के लिए ही दिवाली से ठीक 2 दिन पहले बनने वाला धनतेरस शुक्र प्रदोष योग सर्वश्रेष्ठ महायोग है।
🤔क्यों है यह अवसर वर्षों में एक बार?
💎6 नवम्बर 2026 को एक दुर्लभ त्रि-योग बन रहा है धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी धन और दीपावली का द्वार), शुक्रवार (शुक्र ग्रह का दिन धन, वैभव और माता लक्ष्मी के कारक ग्रह) एवं प्रदोष (त्रयोदशी जब महादेव भक्तों की प्रत्येक याचना स्वीकारते हैं)। जब प्रदोष शुक्रवार को पड़े उसे शुक्र प्रदोष कहते हैं यह व्यापार वृद्धि और ऋण मुक्ति के लिए शास्त्रों में सर्वाधिक फलदायी प्रदोष माना गया है और यह शुक्र प्रदोष धनतेरस पर पड़ने वाला संयोग वर्षों में एक बार ही बनता है।
🏛️ ऋण मुक्तेश्वर महादेव पांडवों ने यहाँ पाई थी ऋण मुक्ति:
🏹महाभारत के अज्ञातवास में जब पांडव अनेक विपत्तियों से घिरे थे, उन्होंने श्री कृष्ण से पूछा "हमें इतने कष्ट क्यों?" भगवान ने उत्तर दिया "यह पितृ ऋण का फल है।" तत्पश्चात उनके निर्देश पर पांडवों ने ओंकार पर्वत की परिक्रमा पथ पर, नर्मदा-कावेरी संगम के पावन तट पर ऋण मुक्तेश्वर शिवलिंग की स्थापना की और विधिवत अभिषेक एवं तपस्या से पितृ ऋण से मुक्ति पाई। तब से यह शिवलिंग "ऋण मुक्तेश्वर" अर्थात् 'समस्त ऋणों से मुक्ति दिलाने वाले महादेव' के रूप में पूजित है। यहाँ ऋण मुक्ति का अर्थ केवल आर्थिक ऋण नहीं, बल्कि पितृ ऋण और कर्म ऋण तीनों से मुक्ति है। जब सभी ऋण चूकेंगे - तभी राजयोग संभव है।
🙏धनतेरस पर पहले ऋण जाए, फिर लक्ष्मी आएँ! वर्षों में एक बार आने वाले इस दुर्लभ धनतेरस एवं शुक्र प्रदोष के योग पर ऋण मुक्तेश्वर महादेव अभिषेक में सहभागी बनें और आर्थिक ऋण, पितृ ऋण एवं कर्म ऋण तीनों से मुक्ति का आशीर्वाद पाएँ।