✨आषाढ़ अमावस्या - वह दिन जब पितृलोक का द्वार सबसे व्यापक रूप से खुलता है और पितृ अपने वंशजों पर मुक्ति और तृप्ति के लिए निर्भर रहते है।
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने गरुड़ से कहा - अमावस्या वह तिथि है जब पितृ अपने वंशजों के निकट होती हैं और उनके द्वारा दिया गया जल-तिल-अर्पण सीधे उन्हें तृप्त करता है। इस दिन किया गया तर्पण सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है।
🤔 4 तीर्थ एकसाथ - पितरों को हर लोक में तृप्ति पहुँचाने का शास्त्रीय मार्ग:
वैदिक ब्रह्माण्ड-विज्ञान के अनुसार - पितरों की आत्माएँ एक लोक में नहीं रहतीं। वे अपने कर्मों के अनुसार पृथ्वी लोक, पितृ लोक और अन्य सूक्ष्म लोकों में वितरित होती हैं। एक ही तीर्थ पर तर्पण एक लोक तक पहुँचता है।
किन्तु जब तीर्थराज प्रयागराज (जहाँ स्कंद पुराण के अनुसार 14 लोकों में तर्पण पहुँचता है ), काशी (जहाँ शिव स्वयं पितरों को तारक मंत्र देते हैं), हरिद्वार (देवताओं का द्वार -स्वर्गद्वार) एवं शिप्रा, उज्जैन (महाकाल की नगरी) में जब एकसाथ तर्पण होता है - तब पितरों तक सेवा पहुँचने का सम्पूर्ण मार्ग खुल जाता है।
🌊पितृ दोष - वह अदृश्य बाधा जो पीढ़ियों को प्रभावित करती है:
गरुड़ पुराण और अग्नि पुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है - जब परिवार में धन आता है पर टिकता नहीं, विवाह में बार-बार देरी होती है, संतान नहीं होती, पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ही रोग दोहराता है, करियर में अकारण बाधाएँ आती हैं, तो इसके पीछे पितृ दोष हो सकता है। पितरों के तृप्त होने पर वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं - और तभी धन, स्वास्थ्य, विवाह, संतान और करियर सभी में बाधाएँ हटती हैं।
🛕श्री मंदिर ऐप से घर बैठे - एक दिन 4 पवित्र तीर्थों पर पितृ तर्पण:
एक ही दिन काशी, हरिद्वार, प्रयागराज और उज्जैन चारों स्थानों पर स्वयं जाकर तर्पण करना किसी भी व्यक्ति के लिए असम्भव है। किन्तु श्री मंदिर ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपने नाम-गोत्र और पितरों के नाम से चारों पवित्र तीर्थों पर आषाढ़ अमावस्या के पितृ सिद्धि काल में एकसाथ तर्पण करवा सकते हैं। चारों तीर्थों के प्रमाणित वैदिक पुरोहित सम्पूर्ण विधि-विधान से तर्पण सम्पन्न कराएंगे। वीडियो प्रमाण 24-48 घंटों में प्राप्त होगा।
🙏आपके पितर आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि आप उन्हें स्मरण करें। आषाढ़ अमावस्या पर - 4 पवित्र जलधाराओं में - उन्हें तृप्ति दें। अभी संकल्प करें।