पितृ पक्ष श्राद्ध मोक्ष नगरी काशी पितृ तर्पण
पितृ पक्ष श्राद्ध मोक्ष नगरी काशी पितृ तर्पण
पितृ पक्ष श्राद्ध मोक्ष नगरी काशी पितृ तर्पण
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पितृ पक्ष श्राद्ध मोक्ष नगरी काशी पितृ तर्पण

पितृ पक्ष श्राद्ध मोक्ष नगरी काशी पितृ तर्पण

पितृ पक्ष में हम तर्पण करते हैं, श्रद्धा से, प्रेम से। किन्तु मन में एक प्रश्न हमेशा रहता है जिसे हम किसी से पूछ नहीं पाते -हमारे पितर अभी किस अवस्था में हैं? वे कहाँ हैं? क्या वे ठीक हैं? यही अनिश्चितता - यही न जानना ही वह पीड़ा है जो हर वंशज को पितृ पक्ष में भीतर तक हिला देती है।इसीलिए सनातन धर्म ने एक ऐसा उत्तर दिया जो हर अवस्था में काम करता है - चाहे पितर जहाँ भी हों, जिस भी अवस्था में हों। वह उत्तर है, काशी और काशी में पिशाचमोचन कुंड।
🕉️ काशी - एकमात्र नगरी जहाँ मोक्ष सुनिश्चित है
सनातन धर्म की सात मोक्षपुरियों में काशी का स्थान अद्वितीय है। अन्य तीर्थ पुण्य देते हैं, काशी मोक्ष देती है। अन्य तीर्थों में भगवान विराजते हैं, काशी में भगवान शिव ने प्रतिज्ञा की है कि वे इसे कभी नहीं छोड़ेंगे - इसीलिए इसे 'अविमुक्त क्षेत्र' कहते हैं। काशी खण्ड (स्कन्द पुराण) की घोषणा है: जो भी इस नगरी में अंतिम श्वास लेता है, भगवान शिव स्वयं उसके कान में तारक मन्त्र का उच्चारण करते हैं और वह आत्मा मोक्ष को प्राप्त होती है।पितृ पक्ष में काशी में किया गया तर्पण = भगवान शिव के अविमुक्त क्षेत्र में, उनकी उपस्थिति में, आपके पितरों के लिए अर्पण।
🔱 पिशाचमोचन कुंड - काशी का सबसे शक्तिशाली पितृ-तर्पण स्थल
काशी में असंख्य घाट और तीर्थ हैं, किन्तु पिशाचमोचन कुंड का स्थान सबसे अलग है। 'पिशाच' का अर्थ है, वह शक्ति जो आत्माओं को बन्धन में रखती है। 'मोचन' का अर्थ है मुक्ति। यह कुंड वह स्थान है जहाँ भगवान शिव की मुक्ति- शक्ति अपनी सर्वोच्च अवस्था में प्रवाहित होती है।
काशी खण्ड में पिशाचमोचन कुंड के विषय में कहा गया है कि यहाँ तर्पण करने से पितर चाहे किसी भी अवस्था में हों, चाहे किसी भी लोक में हों मुक्ति को प्राप्त होते हैं। यह काशी के भीतर भी एक विशेष शक्ति-केन्द्र है, जहाँ से पितरों तक पहुँचने का मार्ग सबसे सीधा और सबसे प्रबल है।

🌟 सर्व-पितृ व्यापकता - कोई पितर छूटता नहीं
गरुड़ पुराण में गया के संकल्प-मन्त्र में यह सुन्दर वचन है: "ये मे पितृकुले जाताः कुले मातुस्तथैव च - गुरुश्वशुरबन्धूनां ये चान्ये बान्धवा मृताः ये मे कुले लुप्तपिण्डाः - ज्ञाताज्ञाताः कुले मम - तेषां पिण्डं मया दत्तमक्षय्यमुपतिष्ठताम्।"
अर्थात् पितृ-वंश में जो गए, मातृ-वंश में जो गए, गुरु के कुल में, ससुराल में, मित्र-वर्ग में जो ज्ञात हैं और जो अज्ञात हैं - सभी के लिए यह अर्पण अक्षय होकर उन तक पहुँचे।
पिशाचमोचन कुंड पर तर्पण का संकल्प इसी सर्व-व्यापक भावना से होता है - कोई पितर नहीं छूटता, कोई वंश नहीं छूटता, कोई अवस्था नहीं छूटती।
🙏 काशी में तर्पण भगवान शिव की उपस्थिति में, पिशाचमोचन कुंड पर मुक्ति-शक्ति के केन्द्र में आपके सभी पितरों के लिए - एक भी नहीं छूटेगा।- अभी बुक करें।
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