सावन शिवरात्रि के सबसे भव्य शिव अनुष्ठान में भाग लें - एक द्वीप जिसके नाम में ॐ है ओंकारेश्वर, इस ॐ के हृदय में स्थित गौरी सोमवार में ॐ लिखित 108 बिल्वपत्र अर्पित करें। साथ ही 21लीटर जल से शिवजी का दिव्य महा जलाभिषेक करें - 21 रुद्र स्वरूपों का एकसाथ आह्वान करें।
सावन शिवरात्रि = महाशिवरात्रि के बाद वर्ष की सर्वाधिक शक्तिशाली शिवरात्रि।क्योंकि सावन = शिव का मास + शिवरात्रि = शिव की रात्रि। दोनों एक साथ = चरमोत्कर्ष। सावन ही वह माह है जब संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के लिए महादेव ने हलाहल विष का पान किया।जिसके बाद समस्त देवी-देवताओं एवं ऋषियों ने जलाभिषेक कर उनकी पीड़ा को शांत किया!
ऐसे में जब आपके नाम संकल्प से 21L जल से निरंतर शिवजी का अखंड महाभिषेक होता है और गौरी सोमनाथ के बड़े से शिवलिंग पर 108 ॐ लिखित बिल्वपत्र अर्पित होते हैं तो जीवन के हर कष्ट, बाधा, दोष एवं पापों का नाश हो सकता है।
🔱21 लीटर जलाभिषेक: यह संख्या क्यों?
वैदिक शास्त्रों के अनुसार, भगवान रुद्र के 21 स्वरूप माने गए हैं, जिन्हें 'एकविंशति रुद्र' कहा जाता है: 11 एकादश रुद्र: (जैसा कि 'श्री रुद्रम्' में वर्णित हैं) 10 अतिरिक्त रुद्र स्वरूप: (जिनका वर्णन 'शतपथ ब्राह्मण' में मिलता है)
जब 21 लीटर जल का अभिषेक किया जाता है, तो इसके पीछे का विधान अत्यंत गहरा है: यह रुद्र के एक विशिष्ट स्वरूप का साक्षात् आह्वान है। बिना अवकाश के आह्वान: 21 लोटे जल जब एक अखंड धारा में गिरता है, तो रुद्र के सभी 21 स्वरूपों की दिव्य ऊर्जा एक साथ जागृत होती है।
108 ॐ लिखित बिल्वपत्र से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं!
शिव पुराण का पावन वचन: "बिल्वपत्रस्य एकं दानं भुक्तिं मोक्षं प्रयच्छति।"
एक बेलपत्र अर्पित करने का फल भुक्ति (सांसारिक सुख) और मोक्ष (परम मुक्ति), दोनों एक साथ प्राप्त होना है। अर्पण की अन्य कोई भी सामग्री यह दोहरा फल एक साथ नहीं देती और ॐ मूलतः ध्वनि रूप में है, जो काल-सापेक्ष (समय के साथ समाप्त होने वाली) होती है। लेकिन जब बेलपत्र पर ॐ लिखा जाता है, तो वह 'साकार मंत्र' बन जाता है। जब 108 बेलपत्रों पर ॐ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है, तो वह एक साथ 108 साकार-मंत्रों का समर्पण है। यह 108 बार भुक्ति प्राप्त करने का एक महा-आवेदन है।
सावन शिवरात्रि शिवजी की सबसे बड़ी रात्रि में से एक हैं - इस दिन इतने भव्य सेवा में भाग लेने का मौक़ा व्यर्थ न करें - प्रभु को अपने नाम से जलाभिषेक एवं बिल्वपत्र अर्पण कर संपन्न करें।