पितृ पक्ष द्वितीया मथुरा संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष द्वितीया मथुरा संपूर्ण पितृ शांति सेवा
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पितृ पक्ष द्वितीया मथुरा संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष द्वितीया मथुरा संपूर्ण पितृ शांति सेवा
पितृ पक्ष द्वितीया मथुरा संपूर्ण पितृ शांति सेवा

पितृ पक्ष द्वितीया मथुरा संपूर्ण पितृ शांति सेवा

हर परिवार श्राद्ध करता है, हर वंशज अपने पितरों को याद करता है - किन्तु एक प्रश्न है जो शायद ही कोई पूछता है जब आप पितरों के लिए अनुष्ठान करते हैं, कौन तय करते हैं उनकी अवस्था क्या होगी? कौन उनके कर्मों का लेखा रखते हैं? और सबसे महत्त्वपूर्ण कौन वह देवता हैं जिन्हें प्रसन्न करने से आपके पितरों की यात्रा सीधे शुभ होती है?
यम धर्मराज परम न्याय के देवता, पितृलोक के स्वामी है और वो है जो तय करते है कि आपके पितृ कहाँ-कौनसे लोक में और कौनसी दशा में रहेंगे। इसके अलावा द्वितीया न केवल द्वितीया तिथि पर दिवंगत हुए पितरों को समर्पित तिथि है बल्कि यमराज की अपनी तिथि है, और जब यह तिथि पितृपक्ष में आती है तो साल में सबसे अधिक यमदेव इसी समय जागृत होते हैं - जब आप अपने पितरों के लिए संपूर्ण मोक्ष की कामना कर सकते हो।
🏙️मथुरा सप्त मोक्षपुरियों में एक-जहाँ मोक्ष-शक्ति नित्य जागृत है
शास्त्रों में सात नगरों को मोक्षपुरी कहा गया है अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, काञ्ची, अवन्तिका और द्वारका। मथुरा भगवान श्री कृष्ण की जन्म-भूमि है-जिन्होंने गीता में मृत्यु और अमरत्व का सत्य उद्घाटित किया: "न जायते म्रियते वा कदाचित्"। इस मोक्षपुरी में किया गया प्रत्येक धर्म-कार्य उस नगर की मोक्ष-शक्ति से सिद्ध होता है। पितृ पक्ष में मथुरा में पितृ-सेवा = मोक्षपुरी की पूर्ण शक्ति संग यमुना-यम के जुड़वाँ संयोग की अनन्य कृपा।
🔱तीन स्थल तीन मार्ग एक सम्पूर्ण पितृ-शांति
यह सेवा 'सम्पूर्ण' क्यों है? क्योंकि पितृ-शांति के तीन अलग-अलग आयाम हैं और इस सेवा में तीनों एकसाथ सिद्ध होते हैं:
विश्राम घाट, मथुरा यमुना तर्पण (जल-मार्ग)
गरुड़ पुराण में स्पष्ट है: पितरों को तिल-सहित जलाञ्जलि से तर्पण "आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्त्वपोऽञ्जलिम्"]। यमुना के पावन जल में जो यमराज की जुड़वाँ बहन है, वहाँ तर्पण करना पितरों तक सीधे पहुँचने का जल-मार्ग है। विश्राम घाट की विजय-ऊर्जा उस अर्पण को और अधिक शक्तिशाली बनाती है।
श्री दीर्घ विष्णु मंदिर विष्णु अर्चना (मोक्ष-मार्ग)
गरुड़ पुराण स्वयं भगवान विष्णु ने गरुड़ को सुनाया यह पितृ-मोक्ष का परम शास्त्र विष्णु का अपना उद्घोष है। गरुड़ पुराण का अनुशासन है: "देवताओं को स्वाहा एवं पितरों को स्वधा शब्द के उच्चारण से संतुष्ट करो।" विष्णु मंदिर में पितरों के लिए अर्चना = मोक्ष के अंतिम दाता के समक्ष पितरों की मुक्ति की प्रार्थना। यह मार्ग वह है जो पितरों को तृप्ति से मोक्ष तक ले जाता है।
यमुना धर्मराज मंदिर धर्मराज अर्चना (न्याय-मार्ग)
यह इस सेवा का सबसे अनन्य और दुर्लभ आयाम है। गरुड़ पुराण में यमधर्मराज का न्यायालय इस प्रकार वर्णित है: "धर्मात्मा वंशज जो उचित अनुष्ठान करता है वह यमपुरी में धर्मराज के महान् दरबार में आदर पाता है।" यमुना, यमराज की जुड़वाँ बहन के साथ एक ही मंदिर में यमधर्मराज की उपासना = पितरों के न्यायाधीश को सीधे आह्वान। जब न्यायाधीश प्रसन्न हों, न्याय सदा अनुकूल होता है।
🙏यमुना की धारा, विष्णु की कृपा, धर्मराज का न्याय - तीन मार्ग, एक संकल्प-सम्पूर्ण पितृ-शांति। पितृ पक्ष द्वितीया पर अभी बुक करें।
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