
जानिए आश्विन प्रारंभ उत्तर 2025 की तिथि और महत्व। इस अवधि में धार्मिक अनुष्ठान और व्रत-त्योहारों की शुरुआत होती है, जिससे जीवन में पुण्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
आश्विन माह हिन्दू पंचांग का सातवां मास है, जो सितंबर-अक्टूबर के बीच आता है। यह माह भगवान राम और देवी दुर्गा की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्रि और दशहरा पर्व इसी माह में मनाए जाते हैं।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, साल का सातवां महीना आश्विन मास कहलाता है। आश्विन मास का नाम 'आश्विनी' नक्षत्र के कारण ही पड़ा है। 'आश्विनी' हिंदू कैलेंडर में समय की गणना में उपयोग किए जाने वाले 27 नक्षत्रों में से पहला है। हर मास की तरह इस मास में भी कई महत्वपूर्ण व्रत-त्यौहार मनाए जाते हैं, व धार्मिक अनुष्ठान भी किये जाते हैं।
आश्विन मास हिन्दू पंचांग का सातवाँ महीना है, जो भाद्रपद माह के बाद आता है। यह चंद्र मास होता है और प्रायः सितंबर–अक्टूबर के बीच पड़ता है। जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है और पितृपक्ष समाप्त होकर शरद ऋतु का आगमन होता है, तब आश्विन माह का प्रारंभ माना जाता है।
देव उपासना के साथ-साथ आश्विन मास पितृ पूजन के लिये भी विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि इस मास में भी सभी तरह के मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
आश्विन मास से सूर्य का प्रभाव धीरे धीरे कम होने लगता है, और शनि व तमस का प्रभाव बढ़ता जाता है। आश्विन मास दो भागों में बंटा हुआ है. कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है। इसमें पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। इस मास के कृष्ण पक्ष में जहां पितरों के आशीर्वाद से जीवन में चल रही समस्याएं दूर होती हैं, वहीं आश्विन शुक्ल पक्ष में मां दुर्गा के आशीर्वाद से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
जिस तरह श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित रहता है, भाद्रपद को भगवान कृष्ण का महीना माना जाता है, उसी तरह आश्विन मास माता दुर्गा को समर्पित रहता है। भारत में हर साल चार नवरात्र मनाए जाते हैं, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। शारदीय नवरात्रि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में आरंभ होता है, और विजयादशमी पर इसका समापन होता है। नवरात्रि के दौरान भक्त 9 दिनों तक व्रत रखते हैं, और विधि-विधान से दुर्गा मां की पूजा करते हैं।
मान्यता है कि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं को धन, वस्त्र, भोजन, फल, मिष्ठान आदि का दान देने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
1 सितंबर, सोमवार – ज्येष्ठ गौरी पूजा 2 सितंबर, मंगलवार – ज्येष्ठ गौरी विसर्जन 3 सितंबर, बुधवार – परिवर्तिनी एकादशी 4 सितंबर, बृहस्पतिवार – वामन जयंती, भुवनेश्वरी जयंती, कल्कि द्वादशी 5 सितंबर, शुक्रवार – ओणम, शिक्षक दिवस, शुक्र प्रदोष व्रत 6 सितंबर, शनिवार – गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी 7 सितंबर, रविवार – पूर्णिमा श्राद्ध, चंद्र ग्रहण (पूर्ण), भाद्रपद पूर्णिमा व्रत 8 सितंबर, सोमवार – पितृपक्ष प्रारंभ, प्रतिपदा श्राद्ध 9 सितंबर, मंगलवार – द्वितीया श्राद्ध 10 सितंबर, बुधवार – तृतीया श्राद्ध, चतुर्थी श्राद्ध, विघ्नराज संकष्टी 11 सितंबर, बृहस्पतिवार – पंचमी श्राद्ध, महा भरणी 12 सितंबर, शुक्रवार – षष्ठी श्राद्ध, मासिक कार्तिगई 13 सितंबर, शनिवार – सप्तमी श्राद्ध 14 सितंबर, रविवार – अष्टमी श्राद्ध, महालक्ष्मी व्रत पूर्ण, जीवित्पुत्रिका व्रत, अष्टमी रोहिणी, रोहिणी व्रत, हिंदी दिवस, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 15 सितंबर, सोमवार – नवमी श्राद्ध, विश्वेश्वरैया जयंती, अभियंता दिवस 16 सितंबर, मंगलवार – दशमी श्राद्ध 17 सितंबर, बुधवार – एकादशी श्राद्ध, विश्वकर्मा पूजा, कन्या संक्रांति, इंदिरा एकादशी 18 सितंबर, बृहस्पतिवार – द्वादशी श्राद्ध 19 सितंबर, शुक्रवार – त्रयोदशी श्राद्ध, मघा श्राद्ध, शुक्र प्रदोष व्रत 20 सितंबर, शनिवार – चतुर्दशी श्राद्ध, मासिक शिवरात्रि 21 सितंबर, रविवार – सर्वपितृ अमावस्या, दर्श अमावस्या 22 सितंबर, सोमवार – महाराजा अग्रसेन जयंती, नवरात्रि प्रारंभ (घटस्थापना), शरद सम्पात, सूर्य ग्रहण (आंशिक) 23 सितंबर, मंगलवार – चंद्र दर्शन 25 सितंबर, बृहस्पतिवार – विनायक चतुर्थी 26 सितंबर, शुक्रवार – उपांग ललिता व्रत 27 सितंबर, शनिवार – बिल्व निमंत्रण, स्कंद षष्ठी 28 सितंबर, रविवार – कल्पारंभ, अकाल बोधन 29 सितंबर, सोमवार – सरस्वती आवाहन, नवपत्रिका पूजा, आश्विन नवपद ओली प्रारंभ 30 सितंबर, मंगलवार – दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा, मासिक दुर्गाष्टमी
तो दोस्तों, ये थी आश्विन प्रारंभ 'उत्तर से संबंधित संपूर्ण जानकारी। हमारी कामना है कि इस मास में आने वाले सभी पर्व त्योहार आपके लिए खुशियां लेकर आएं, और आपकी पूजा-अर्चना सफल हो।
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