
आइए जानते हैं शिवलिंग किस दिन खरीदना शुभ माना जाता है और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएँ क्या कहती हैं।
शिवलिंग खरीदना धार्मिक आस्था और पूजा से जुड़ा अत्यंत पवित्र विषय माना जाता है। मान्यता है कि शुभ दिन और सही मुहूर्त में खरीदा गया शिवलिंग घर में शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान शिव की कृपा का प्रतीक होता है। इस लेख में जानिए शिवलिंग किस दिन खरीदना चाहिए?
सोमवार और शुक्रवार क्यों माने जाते हैं शुभ
शिवलिंग खरीदने के लिए सोमवार और शुक्रवार को अच्छा माना जाता है। सोमवार भगवान शिव का विशेष दिन है, वहीं शुक्रवार भी धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इन दिनों में शिवलिंग लेने से शुभ फल मिलने की मान्यता है।
अन्य दिनों में शिवलिंग खरीदना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग किसी भी सामान्य दिन खरीदा जा सकता है। इसके लिए कोई मनाही नहीं है, लेकिन शुभ दिन में खरीदने से पूजा का महत्व बढ़ जाता है।
सावन और भाद्रपद माह का महत्व
सावन और भाद्रपद के महीने भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माने जाते हैं। इन महीनों में किसी भी दिन शिवलिंग खरीदना शुभ फलदायी माना गया है।
सावन में शिवलिंग खरीदने का विशेष फल
ऐसा माना जाता है कि सावन माह में शिवलिंग खरीदने और उसकी पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इससे जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
1. पूजा कक्ष या ईशान दिशा: शिवलिंग स्थापित करने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान घर का पूजा कक्ष होता है। यदि अलग पूजा घर न हो, तो उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में शिवलिंग रखना शुभ माना जाता है।
2. शिवलिंग की उचित दिशा: शिवलिंग इस प्रकार रखें कि पूजा करते समय भक्त का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे। इससे पूजा अधिक फलदायी मानी जाती है।
3. किन स्थानों पर न रखें: शिवलिंग को शयन कक्ष, रसोईघर या भंडारण कक्ष में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ये स्थान पूजा के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।
1. शुद्धता का ध्यान: स्थापना से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ कर पवित्र करें।
2. शिवलिंग का अभिषेक: शिवलिंग को जल, गंगाजल या दूध से स्नान कराएं और फिर साफ कपड़े से पोंछ लें।
3. शिवलिंग की स्थापना: शिवलिंग को आधार या जलहरी के साथ स्थापित करें, ताकि अभिषेक का जल एक स्थान पर एकत्र हो सके।
4. पूजा और मंत्रोच्चार: स्थापना के समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। इसके बाद बेलपत्र, फूल, धूप और दीप अर्पित करें।
भगवान शिव की उपासना सरल मानी जाती है, लेकिन इसमें पवित्रता, अनुशासन और श्रद्धा का विशेष महत्व होता है। नीचे शिव पूजा से संबंधित महत्वपूर्ण नियम विस्तार से और उपशीर्षकों के साथ दिए गए हैं।
1. शारीरिक और मानसिक शुद्धता: शिव पूजा करने से पहले स्नान कर शरीर को शुद्ध करना चाहिए। साफ वस्त्र पहनें और मन को शांत रखें। पूजा स्थल स्वच्छ और पवित्र होना आवश्यक है।
2. घर के लिए उपयुक्त शिवलिंग: घर में हमेशा छोटे आकार का शिवलिंग स्थापित करना शुभ माना जाता है। बड़ा शिवलिंग घर में रखना उचित नहीं समझा जाता, क्योंकि उसकी नियमित पूजा कठिन हो जाती है।
3. शिवलिंग पर जल अर्पण का नियम: प्रतिदिन शिवलिंग पर जल या गंगाजल चढ़ाना शुभ होता है। जल अर्पण करते समय श्रद्धा के साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
4. पूजा सामग्री का सही चयन: शिव पूजा में बेलपत्र, सफेद पुष्प, भस्म, चंदन, धूप और दीप का विशेष स्थान है। बेलपत्र ताजा, साफ और बिना कटे हुए होने चाहिए।
5. किन वस्तुओं से परहेज करें: केतकी के फूल, तुलसी पत्र और टूटे या सूखे बेलपत्र शिवलिंग पर नहीं चढ़ाने चाहिए। पूजा में बासी या अशुद्ध सामग्री का उपयोग न करें।
शिव उपासना में विधि से अधिक भावना का महत्व होता है। जब पूजा पवित्र मन, अनुशासन और निरंतर श्रद्धा के साथ की जाती है, तो भगवान शिव की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। ऐसी भक्ति से जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता बनी रहती है।
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