आज का पंचांग 7 नवंबर 2026
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आज का पंचांग 7 नवंबर 2026

साथ ही राहु काल, सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति से जुड़ी जानकारी प्राप्त करें, ताकि दिन के धार्मिक कार्यक्रमों की योजना बनाना आसान हो।

आज के पंचांग के बारे में

शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है, जबकि प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है। इस बार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी दोपहर से शुरू हो रही है, इसलिए शाम का प्रदोष काल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। शिव पूजा की परंपरा निभाने वाले श्रद्धालु दिन के साथ संध्या के समय पर भी ध्यान दे सकते हैं।

आज का पंचांग 7 नवंबर 2026 | Aaj Ka Panchang 7th November 2026

7 नवंबर 2026, शनिवार को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 10:49 AM तक रहेगी। आज का दिन धार्मिक दृष्टि से इसलिए भी ध्यान देने योग्य है क्योंकि त्रयोदशी तिथि के साथ शनिवार का संयोग बन रहा है। सुबह चित्रा नक्षत्र और प्रीति योग का समय पूरा हो जाएगा, जबकि दिन की शुरुआत तुला सूर्य राशि और कन्या चंद्र राशि के प्रभाव में होगी। पूजा-पाठ, व्रत और यात्रा की योजना बनाते समय तिथि के साथ दिशाशूल और दिन के शुभ-अशुभ समय को देखना उपयोगी रहेगा।

आज का पंचांग

विवरणजानकारी
तिथिकृष्ण पक्ष त्रयोदशी (10:49 AM तक)
वारशनिवार
पूर्णिमांत मासकार्तिक
अमांत मासअश्विन
विक्रम संवत2083 (सिद्धार्थ)
शक संवत1948 (प्रभाउ)
ऋतुशरद
अयनदक्षिणायन
सूर्योदय06:10
सूर्यास्त17:15
चंद्रोदय04:12
चंद्रास्त15:47
नक्षत्रचित्रा (5:53 AM तक)
योगप्रीति (3:27 AM तक)
करणवणिज (10:49 AM तक)
शुभ मुहूर्त11:20 AM से 12:04 PM
राहुकाल8:56 AM से 10:19 AM
गुलिक काल6:10 AM से 7:33 AM
यमघण्टकाल1:05 PM से 2:28 PM
दिशाशूलपूर्व
सूर्य राशितुला
चंद्र राशिकन्या
चंद्र निवासदक्षिण

त्रयोदशी तिथि और शनिवार का धार्मिक महत्व

आज कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 10:49 AM तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की उपासना और प्रदोष व्रत के संदर्भ में विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि प्रदोष व्रत का निर्णय केवल तिथि के नाम से नहीं, बल्कि सूर्यास्त के समय तिथि की उपस्थिति के आधार पर किया जाता है।

शनिवार का दिन भगवान शनि देव की पूजा से जुड़ा माना जाता है। इस दिन शनि देव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने आचरण में संयम रखने की परंपरा है। आज त्रयोदशी और शनिवार के संयोग को देखते हुए पूजा या व्रत की योजना बनाने वाले लोग स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर सकते हैं।

कार्तिक मास, संवत और काल गणना

आज पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास और अमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास है। चंद्र मास की गणना की दोनों प्रणालियों में अंतर होने के कारण पंचांग में एक ही दिन के लिए दो अलग-अलग मास दिखाई देते हैं। व्रत और त्योहारों की तिथि समझते समय यह देखना जरूरी है कि संबंधित जानकारी किस पद्धति पर आधारित है।

आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। ये संवत भारतीय पंचांग में वर्ष की पारंपरिक पहचान और धार्मिक काल गणना का आधार हैं। कार्तिक मास में स्नान, दीपदान और पूजा-पाठ से जुड़ी कई परंपराओं का पालन किया जाता है।

शरद ऋतु और दक्षिणायन का समय

आज पंचांग के अनुसार शरद ऋतु और दक्षिणायन है। ऋतु का उल्लेख साल के प्राकृतिक मौसम चक्र को दर्शाता है, जबकि दक्षिणायन सूर्य की वार्षिक गति पर आधारित पारंपरिक गणना का हिस्सा है।

इस समय सुबह और शाम के तापमान में बदलाव महसूस हो सकता है। दैनिक कामकाज, बाहर निकलने या यात्रा की योजना बनाते समय मौसम की स्थानीय स्थिति के अनुसार तैयारी करना बेहतर रहेगा।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा के समय

आज सूर्योदय सुबह 6:10 AM पर और सूर्यास्त शाम 5:15 PM पर होगा। इन समयों के आधार पर दिन की शुरुआत, सुबह की पूजा और संध्या की दिनचर्या तय की जा सकती है।

चंद्रमा का उदय सुबह 4:12 AM पर और चंद्रास्त दोपहर 3:47 PM पर होगा। आज चंद्रमा कन्या राशि में स्थित रहेगा और पंचांग के अनुसार चंद्र निवास दक्षिण दिशा में है। चंद्रमा की राशि और निवास को तिथि तथा नक्षत्र के साथ देखकर पारंपरिक ज्योतिषीय गणना की जाती है।

चित्रा नक्षत्र, प्रीति योग और वणिज करण

आज चित्रा नक्षत्र सुबह 5:53 AM तक रहेगा। इसके बाद स्वाति नक्षत्र आरंभ होगा। चित्रा नक्षत्र का समय सूर्योदय के आसपास समाप्त हो रहा है, इसलिए किसी नक्षत्र विशेष से जुड़े कार्य की योजना बनाते समय इस परिवर्तन का ध्यान रखना चाहिए।

प्रीति योग सुबह 3:27 AM तक रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। योग की समाप्ति नक्षत्र के परिवर्तन से पहले हो रही है, इसलिए दोनों के समय को अलग-अलग समझना जरूरी है।

आज वणिज करण सुबह 10:49 AM तक रहेगा। इसके बाद करण में बदलाव होगा। यह समय त्रयोदशी तिथि की समाप्ति के साथ ही पूरा होगा। इस प्रकार सुबह के समय नक्षत्र और योग बदलेंगे, जबकि तिथि और करण का परिवर्तन पूर्वाह्न में होगा।

शुभ मुहूर्त और अशुभ समय

आज का शुभ मुहूर्त सुबह 11:20 AM से 12:04 PM तक रहेगा। पारंपरिक पंचांग में इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जाता है। किसी विशेष पूजा, संस्कार या आयोजन के लिए स्थानीय परंपरा और संबंधित धार्मिक नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए।

आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:

  • राहुकाल: 8:56 AM से 10:19 AM

  • गुलिक काल: 6:10 AM से 7:33 AM

  • यमघण्टकाल: 1:05 PM से 2:28 PM

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज राहुकाल और गुलिक काल सुबह के समय हैं, जबकि यमघण्टकाल दोपहर में रहेगा। इसलिए किसी काम का समय तय करते हुए उसकी अवधि और उपलब्ध शुभ मुहूर्त दोनों को ध्यान में रखना उपयोगी होगा।

दिशाशूल और राशिगत स्थिति

आज दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार शनिवार को पूर्व दिशा का दिशाशूल माना जाता है। यदि आज पूर्व दिशा की ओर यात्रा करनी हो, तो अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा के अनुसार उपायों पर विचार कर सकते हैं। यात्रा के दौरान सुरक्षा, सुविधा और जरूरी तैयारियों को प्राथमिकता देना चाहिए।

राशिगत स्थिति के अनुसार आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा। चंद्र निवास दक्षिण दिशा में बताया गया है। इन स्थितियों के साथ तिथि, नक्षत्र और योग को मिलाकर दिन की पारंपरिक ज्योतिषीय स्थिति समझी जाती है।

दिन की शुरुआत से पहले इन समयों पर रखें ध्यान

आज के पंचांग में सुबह के शुरुआती घंटों में नक्षत्र और योग का परिवर्तन है, जबकि त्रयोदशी तिथि सुबह 10:49 AM पर समाप्त होगी। इसलिए धार्मिक कार्यों की योजना बनाते समय यह देखना उपयोगी रहेगा कि संबंधित पूजा या व्रत किस तिथि और किस समय से जुड़ा है।

शनिवार की परंपराओं के साथ आज का दिन अपने जरूरी कामों को व्यवस्थित करने और समय का सही उपयोग करने के लिए भी अच्छा अवसर है। पंचांग के शुभ-अशुभ समय को मार्गदर्शन की तरह देखते हुए अपनी दिनचर्या और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें।

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Published by Sri Mandir·November 5, 2026

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