आज का पंचांग 9 नवंबर 2026
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आज का पंचांग 9 नवंबर 2026

9 नवंबर 2026 के लिए पंचांग में दर्ज तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ समय की जानकारी यहां पढ़ें। साथ ही जानें राहु काल, सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा से संबंधित प्रमुख ज्योतिषीय विवरण।

आज के पंचांग के बारे में

चंद्रमा की कलाओं के साथ हिंदू पंचांग में तिथियों और पक्षों का क्रम बदलता रहता है। 9 नवंबर को कृष्ण पक्ष की अमावस्या दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगी और शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। यह केवल एक तिथि का परिवर्तन नहीं, बल्कि चंद्रमा के नए पक्ष की शुरुआत भी है। इसी खगोलीय क्रम से पंचांग की गणना आगे बढ़ती है।

आज का पंचांग 9 नवंबर 2026 | Aaj Ka Panchang 9th November 2026

9 नवंबर 2026, सोमवार को कार्तिक अमावस्या की तिथि दोपहर 12:33 PM तक रहेगी। आज के दिन पंचांग के साथ त्योहारों की जानकारी भी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि कार्तिक अमावस्या के अवसर पर गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और बलि प्रतिपदा से जुड़े पर्व भी मनाए जा रहे हैं। तिथि दोपहर में समाप्त होगी, जबकि स्वाति नक्षत्र सुबह 7:25 AM तक रहेगा। पूजा, दान और पारिवारिक धार्मिक आयोजनों की तैयारी के लिए इन समयों को समझना उपयोगी है।

आज का पंचांग

विवरणजानकारी
तिथिकृष्ण पक्ष अमावस्या (12:33 PM तक)
वारसोमवार
पूर्णिमांत मासकार्तिक
अमांत मासअश्विन
विक्रम संवत2083 (सिद्धार्थ)
शक संवत1948 (प्रभाउ)
ऋतुशरद
अयनदक्षिणायन
सूर्योदय06:11
सूर्यास्त17:13
चंद्रोदय06:05
चंद्रास्त17:00
नक्षत्रस्वाति (7:25 AM तक)
योगसौभाग्य (2:57 AM तक)
करणनाग (12:34 PM तक)
शुभ मुहूर्त11:20 AM से 12:04 PM
राहुकाल7:34 AM से 8:57 AM
गुलिक काल1:05 PM से 2:28 PM
यमघण्टकाल10:20 AM से 11:42 AM
दिशाशूलपूर्व
सूर्य राशितुला
चंद्र राशितुला
चंद्र निवासपश्चिम
त्योहारकार्तिक अमावस्या, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा

कार्तिक अमावस्या और सोमवार का महत्व

आज कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि दोपहर 12:33 PM तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी। अमावस्या को हिंदू धर्म में स्नान, दान, दीपदान और पितरों के निमित्त धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

सोमवार का संबंध भगवान शिव से है। इस दिन शिव पूजा, जलाभिषेक और मंत्र-जप करने की परंपरा है। अमावस्या और सोमवार का संयोग होने के कारण श्रद्धालु अपनी मान्यता के अनुसार शिव आराधना, दान या अन्य धार्मिक कार्य कर सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान के लिए तिथि और स्थानीय पूजा-विधि का ध्यान रखना चाहिए।

आज के त्योहार: गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और बलि प्रतिपदा

आज के पंचांग में कार्तिक अमावस्या के साथ गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और बलि प्रतिपदा का उल्लेख है। गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा से जुड़ी है। इस अवसर पर गोवर्धन की पूजा की जाती है और प्रकृति तथा गौवंश के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा है।

अन्नकूट पर्व पर भगवान को विभिन्न प्रकार के पकवान और खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। मंदिरों में विशेष भोग सजाया जाता है और प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। वहीं बलि प्रतिपदा का संबंध राजा बलि की कथा और उनके दानशील स्वभाव से माना जाता है। इन पर्वों की पूजा-विधि और तिथि का पालन क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग हो सकता है।

कार्तिक मास, संवत और पंचांग की गणना

आज पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास और अमांत पद्धति के अनुसार अश्विन मास है। दोनों गणना प्रणालियों में चंद्र मास की शुरुआत और समाप्ति का आधार अलग होता है। इसलिए पंचांग में एक ही तारीख पर कार्तिक और अश्विन दोनों नाम दिखाई दे सकते हैं।

आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) और शक संवत 1948 (प्रभाउ) चल रहे हैं। ये संवत भारतीय काल गणना में पारंपरिक वर्ष की पहचान करते हैं। कार्तिक मास में दीपदान, स्नान, दान और पूजा-पाठ से जुड़ी परंपराओं का विशेष स्थान है।

शरद ऋतु और दक्षिणायन

आज शरद ऋतु और दक्षिणायन है। ऋतु का उल्लेख मौसम के पारंपरिक विभाजन को दर्शाता है, जबकि दक्षिणायन सूर्य की वार्षिक गति पर आधारित काल गणना का हिस्सा है।

इस समय सुबह और शाम के वातावरण में ठंडक बढ़ने लगती है। धार्मिक आयोजनों, मंदिर दर्शन या यात्रा की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम और दिन के उजाले की अवधि को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय

आज सूर्योदय सुबह 6:11 AM पर और सूर्यास्त शाम 5:13 PM पर होगा। सुबह की पूजा, दिन के धार्मिक कार्यक्रम और शाम की गतिविधियों के लिए इन समयों को ध्यान में रखा जा सकता है।

चंद्रोदय सुबह 6:05 AM पर और चंद्रास्त शाम 5:00 PM पर होगा। आज सूर्य और चंद्रमा दोनों तुला राशि में स्थित रहेंगे। पंचांग के अनुसार चंद्र निवास पश्चिम दिशा में है। अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को तिथि के साथ देखकर पारंपरिक ज्योतिषीय गणना की जाती है।

स्वाति नक्षत्र, सौभाग्य योग और नाग करण

आज स्वाति नक्षत्र सुबह 7:25 AM तक रहेगा। इसके बाद विशाखा नक्षत्र आरंभ होगा। इस कारण सूर्योदय के बाद सुबह ही नक्षत्र में परिवर्तन होगा। नक्षत्र के आधार पर किसी धार्मिक कार्य का समय तय करने वाले लोगों को इस बदलाव का ध्यान रखना चाहिए।

सौभाग्य योग सुबह 2:57 AM तक रहेगा। इसके बाद शोभन योग शुरू होगा। चूंकि सौभाग्य योग सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगा, इसलिए दिन के समय शोभन योग प्रभावी रहेगा।

आज नाग करण दोपहर 12:34 PM तक रहेगा। अमावस्या तिथि दोपहर 12:33 PM पर समाप्त होगी और करण का समय उसके एक मिनट बाद तक रहेगा। इसके बाद करण में बदलाव होगा। तिथि और करण की समाप्ति के समय में यह छोटा अंतर पंचांग की गणना में अलग-अलग दर्ज किया जाता है।

शुभ मुहूर्त और अशुभ समय

आज का शुभ मुहूर्त सुबह 11:20 AM से 12:04 PM तक है। पारंपरिक पंचांग में इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जाता है। हालांकि अमावस्या, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट जैसे पर्वों की विशेष पूजा के लिए संबंधित परंपरा के अनुसार अलग-अलग समय निर्धारित हो सकते हैं।

आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:

  • राहुकाल: 7:34 AM से 8:57 AM

  • गुलिक काल: 1:05 PM से 2:28 PM

  • यमघण्टकाल: 10:20 AM से 11:42 AM

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज यमघण्टकाल शुभ मुहूर्त शुरू होने से पहले समाप्त होगा। इसलिए किसी आयोजन का समय निर्धारित करते हुए शुभ मुहूर्त और अन्य समयों को साथ देखकर योजना बनाना बेहतर रहेगा।

दिशाशूल और राशिगत स्थिति

आज दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार सोमवार को पूर्व दिशा का दिशाशूल माना जाता है। यदि आज पूर्व दिशा की ओर यात्रा करनी हो, तो अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार उपायों पर विचार कर सकते हैं। यात्रा के लिए सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

राशिगत स्थिति के अनुसार आज सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा भी तुला राशि में रहेगा। चंद्र निवास पश्चिम दिशा में बताया गया है। सूर्य और चंद्रमा की समान राशि स्थिति के साथ अमावस्या तिथि का संयोग पंचांग की प्रमुख ज्योतिषीय विशेषताओं में शामिल है।

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Published by Sri Mandir·November 5, 2026

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