
यहां तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहु काल, सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रमा से संबंधित विवरण आसान भाषा में प्रस्तुत हैं।
दीपावली से पहले आने वाले दिन पूजा-पाठ और घर की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 6 नवंबर को धनतेरस, यम दीपक और शुक्र प्रदोष व्रत का उल्लेख पंचांग में मिलता है। इन अवसरों के कारण दिन में खरीदारी, दीपदान और शिव आराधना जैसी अलग-अलग परंपराएं जुड़ती हैं। धार्मिक कार्यों की योजना बनाते समय तिथि और प्रदोष काल पर ध्यान दें।
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6 नवंबर 2026, शुक्रवार को कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 10:32 AM तक रहेगी। आज के पंचांग में सुबह के समय तिथि, नक्षत्र और योग के बदलाव पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। हस्त नक्षत्र और विष्कुम्भ योग दोनों सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएंगे, जबकि दिन की शुरुआत द्वादशी तिथि और तैतिल करण के साथ होगी। शुक्रवार होने के कारण आज का दिन पूजा-पाठ, व्यक्तिगत कार्यों और सप्ताह के बाकी कामों की योजना बनाने के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
विवरण | जानकारी |
तिथि | कृष्ण पक्ष द्वादशी (10:32 AM तक) |
वार | शुक्रवार |
पूर्णिमांत मास | कार्तिक |
अमांत मास | अश्विन |
विक्रम संवत | 2083 (सिद्धार्थ) |
ऋतु | शरद |
सूर्योदय | 06:09 |
सूर्यास्त | 17:15 |
चंद्रोदय | 03:16 |
चंद्रास्त | 15:15 |
नक्षत्र | हस्त (4:44 AM तक) |
योग | विष्कुम्भ (4:10 AM तक) |
करण | तैतिल (10:32 AM तक) |
शुभ मुहूर्त | 11:20 AM से 12:04 PM |
राहुकाल | 10:19 AM से 11:42 AM |
गुलिक काल | 7:33 AM से 8:56 AM |
यमघण्टकाल | 2:29 PM से 3:52 PM |
आज कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 10:32 AM तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी। इसलिए व्रत, पूजा या किसी अन्य धार्मिक कार्य के लिए तिथि का समय देखना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से जो लोग द्वादशी से जुड़े नियमों का पालन करते हैं, उन्हें तिथि समाप्त होने के समय का ध्यान रखना चाहिए।
शुक्रवार का दिन पारंपरिक रूप से मां लक्ष्मी और शुक्र देव से जुड़ा माना जाता है। इस दिन घर में स्वच्छता बनाए रखना, मां लक्ष्मी की पूजा करना और अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ परंपराओं में शामिल है। शुक्रवार और द्वादशी का यह संयोग दिन की धार्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने का अवसर देता है।
पंचांग के अनुसार आज पूर्णिमांत गणना में कार्तिक मास और अमांत गणना में अश्विन मास है। चंद्र मास की इन दोनों गणना पद्धतियों में महीने की शुरुआत और समाप्ति का आधार अलग होता है। इसी वजह से एक ही दिन के लिए दोनों मासों के नाम अलग दिखाई देते हैं।
आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थ) चल रहा है। भारतीय पंचांग में संवत का उल्लेख पारंपरिक वर्ष की पहचान और धार्मिक तिथियों की गणना के लिए किया जाता है। कार्तिक मास को पूजा-पाठ, दीपदान और धार्मिक गतिविधियों की दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है।
आज शरद ऋतु का समय है। इस मौसम में सुबह और शाम का वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा हो सकता है, जबकि दिन में तापमान अलग महसूस हो सकता है। ऐसे में दिन की शुरुआत, बाहर जाने और शाम की गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा।
ऋतु का उल्लेख पंचांग में केवल मौसम की जानकारी नहीं देता, बल्कि पारंपरिक भारतीय काल गणना में वर्ष के प्राकृतिक बदलावों को भी दर्शाता है।
आज सूर्योदय सुबह 6:09 AM पर और सूर्यास्त शाम 5:15 PM पर होगा। इन समयों को ध्यान में रखकर सुबह की पूजा, दिन के कार्यों और संध्या की दिनचर्या तय की जा सकती है।
चंद्रमा का उदय देर रात 3:16 AM पर होगा और चंद्रास्त दोपहर 3:15 PM पर रहेगा। चंद्रमा के उदय और अस्त होने के समय में अंतर को देखते हुए आज धार्मिक या ज्योतिषीय गणना के लिए पंचांग में दिए गए समय का संदर्भ लेना उपयोगी है।
आज हस्त नक्षत्र सुबह 4:44 AM तक रहेगा। इसके बाद चित्रा नक्षत्र आरंभ होगा। चूंकि हस्त नक्षत्र सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए दिन के अधिकांश समय चित्रा नक्षत्र प्रभावी रहेगा। किसी नक्षत्र के आधार पर पूजा या अन्य धार्मिक गतिविधि तय करने वाले लोगों के लिए यह बदलाव ध्यान देने योग्य है।
विष्कुम्भ योग भी सुबह 4:10 AM तक रहेगा। इसके बाद प्रीति योग आरंभ होगा। योग का यह परिवर्तन नक्षत्र के समय से अलग है, इसलिए पंचांग में दोनों की समाप्ति को अलग-अलग समझना चाहिए।
आज तैतिल करण सुबह 10:32 AM तक रहेगा। द्वादशी तिथि समाप्त होने के साथ ही करण में भी बदलाव होगा। तिथि, नक्षत्र, योग और करण के ये अलग-अलग समय पंचांग की गणना को पूरा करते हैं।
आज का शुभ मुहूर्त सुबह 11:20 AM से 12:04 PM तक है। पारंपरिक रूप से इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए देखा जाता है। किसी विशेष पूजा, संस्कार या महत्वपूर्ण आयोजन के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित धार्मिक परंपरा के नियमों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
आज के प्रमुख अशुभ समय इस प्रकार हैं:
राहुकाल: 10:19 AM से 11:42 AM
गुलिक काल: 7:33 AM से 8:56 AM
यमघण्टकाल: 2:29 PM से 3:52 PM
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। आज शुभ मुहूर्त और राहुकाल के समय में कुछ अंतराल का मेल है, इसलिए किसी कार्य का समय तय करते हुए दोनों अवधियों को ध्यान से देखना बेहतर होगा। आवश्यक कामों के लिए व्यावहारिक जरूरतों को भी प्राथमिकता दें।
6 नवंबर के पंचांग में सुबह के समय कई महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज हैं। द्वादशी तिथि सुबह 10:32 AM पर समाप्त होगी, जबकि नक्षत्र और योग का परिवर्तन सूर्योदय से पहले ही हो जाएगा। इसलिए किसी धार्मिक कार्य के लिए केवल दिन या वार देखना पर्याप्त नहीं है; उससे जुड़ी तिथि और समय की जानकारी भी महत्वपूर्ण है।
दिन की योजना बनाते समय शुभ मुहूर्त, राहुकाल और अन्य समयों को एक साथ देखना उपयोगी रहेगा। शुक्रवार की पूजा-पाठ की परंपराओं के साथ अपने जरूरी कामों को संतुलित रखते हुए दिन बिताया जा सकता है।
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